CBSE कक्षा 12 मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच, मूल्यांकन में कथित विसंगतियों और तकनीकी समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है।
CPI(M) नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को CBSE कक्षा 12 की परीक्षाओं के मूल्यांकन में गंभीर विसंगतियों के बारे में एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा।
CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस पत्र में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, धुंधली स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं, स्टेप-मार्किंग (चरण-वार अंकन) की अनदेखी और पुनर्मूल्यांकन साइट से जुड़ी तकनीकी समस्याओं जैसे मुद्दों को उठाया गया है। पत्र में कहा गया है कि 21 मई को जारी पिछली अधिसूचना के बाद से, देश भर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से कई शिकायतें मिली हैं।
कई students ने दावा किया है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के जो स्कैन किए गए संस्करण CBSE की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, वे आंशिक रूप से पढ़ने योग्य नहीं हैं, धुंधले हैं और अस्पष्ट हैं। इसके परिणामस्वरूप, परीक्षार्थियों के लिए अब यह पुष्टि करना लगभग असंभव हो गया है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही ढंग से किया गया था या नहीं। पत्र में विशेष रूप से स्टेप-बाय-स्टेप (चरण-दर-चरण) अंक न दिए जाने की शिकायतों का उल्लेख किया गया है, खासकर गणित, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान जैसे विषयों में। छात्रों ने कहा है कि गणनाओं, मध्यवर्ती चरणों और व्युत्पत्तियों को स्पष्ट रूप से लिखने के बावजूद उन्हें उचित अंक नहीं मिले हैं।
📘 CBSE मूल्यांकन विवाद के मुख्य मुद्दे
- मुख्य शिकायत: ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में कथित विसंगतियाँ
- धुंधली कॉपियाँ: स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देने का आरोप
- स्टेप मार्किंग: चरण-दर-चरण अंक नहीं मिलने की शिकायत
- प्रभावित विषय: गणित, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान
- तकनीकी समस्या: पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में दिक्कतें
- मुख्य मांग: उच्च-स्तरीय जांच और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया
पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी समस्याएँ
पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने के लिए बनाए गए पोर्टलों में चल रही तकनीकी समस्याओं के कारण कई छात्र समय पर अपने आवेदन जमा करने में असमर्थ हैं। पत्र के अनुसार, कुछ स्थितियों में प्रवेश और छात्रवृत्ति प्रक्रियाओं में भाग लेने वाले छात्रों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है।
डॉ. जॉन ब्रिटास के अनुसार, शिक्षा मंत्री को पूरी CBSE मूल्यांकन प्रणाली की उच्च-स्तरीय जांच करवानी चाहिए। उन्होंने ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के निष्पक्ष मूल्यांकन की भी मांग की है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी छात्र को तकनीकी कारणों से नुकसान न हो, उन्होंने पुनर्मूल्यांकन की समय सीमा बढ़ाने और यदि उत्तर पुस्तिकाएं पढ़ने योग्य न पाई जाएं, तो उनके मानवीय सत्यापन (human verification) के लिए प्रक्रियाएं निर्धारित करने का आग्रह किया है।
⚠️ छात्रों और अभिभावकों की बढ़ती चिंता
- भविष्य पर असर: एडमिशन और छात्रवृत्ति प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका
- मूल्यांकन विवाद: सही उत्तरों पर भी कम अंक मिलने के आरोप
- OSM प्रणाली: पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल
- तकनीकी बाधाएँ: पोर्टल एक्सेस और आवेदन में परेशानी
- छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया: देशभर में असंतोष और चिंता
- मांग: छात्र-केंद्रित और जवाबदेह मूल्यांकन प्रणाली
CBSE परिणामों के बाद बढ़ा असंतोष
यह पत्र इस बात पर प्रकाश डालता है कि छात्रों के भविष्य की संभावनाओं, करियर और उच्च शिक्षा के लिए CBSE की परीक्षाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं। परिणामस्वरूप, मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विसंगति स्वीकार्य नहीं है। शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया गया है कि वे इस समस्या पर तत्काल ध्यान दें और CBSE को आवश्यक निर्देश जारी करें। इसके अतिरिक्त, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित हो।
यह पत्र CBSE के परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों के बीच व्याप्त सामान्य असंतोष को दर्शाता है। देश भर के कई छात्र संगठनों ने भी OSM प्रणाली और मूल्यांकन की गुणवत्ता के संबंध में अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। हालांकि शिक्षा मंत्रालय और CBSE ने अभी तक इस पत्र का औपचारिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया है, फिर भी अभिभावक और छात्र आशावादी हैं कि मंत्री जल्द ही इस गंभीर मामले पर विचार करेंगे।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक अपडेट आने पर तथ्यों में बदलाव संभव है।
