अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े कुछ तेल प्रतिबंधों और प्रस्तावित शुल्कों पर अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। इस फैसले से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ रहा संभावित दबाव कम हो सकता है।
शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि कुछ प्रतिबंधों को लागू न करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। पिछले महीने हस्ताक्षरित 2026 के रूस और ईरान प्रतिबंध कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था। ये उपाय 18 अक्टूबर से लागू होने वाले थे। हालांकि, छूट का दायरा और अवधि किन-किन मामलों पर लागू होगी, यह समझना जरूरी होगा।
यह फैसला भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के बीच आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि समझौते का पहला चरण तय हो चुका है और अब उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता जल्द पूरा होकर लागू हो सकता है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर अवसर मिलें।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी शुक्रवार को उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता जल्द पूरा होगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, दोनों पक्ष मतभेदों को दूर कर समझौते के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी बातचीत की गति को तेज बताया था।
फरवरी में दोनों देशों ने समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसके तहत ज्यादातर भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया दंडात्मक अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने अमेरिका को लगभग 87 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह निर्यात पिछले साल की समान अवधि से 11 प्रतिशत बढ़कर 50.8 अरब डॉलर रहा।
भारत के लिए रूसी तेल क्यों अहम है?
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। रूस भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है और चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बताया गया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई के बीच भारत ने रूस से करीब 28.33 अरब डॉलर का तेल खरीदा। यह अवधि में भारत के कुल 63.33 अरब डॉलर के तेल आयात का लगभग 45 प्रतिशत था।
अमेरिकी शुल्कों की आशंका के बावजूद भारत की रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल की जगह तुरंत दूसरे स्रोतों से पर्याप्त तेल जुटाना आसान नहीं था। ऐसे में प्रतिबंधों पर छूट से आपूर्ति संबंधी दबाव कम होने की संभावना है। फिर भी वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि छूट किन लेन-देन पर लागू होती है और वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता कैसी रहती है।
तेल की कीमतें और महंगाई का दबाव
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति और समुद्री मार्गों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर जोखिम बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है। समाचार रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट कच्चा तेल फरवरी में करीब 72 डॉलर प्रति बैरल था और अप्रैल में 130 डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के समय इसकी कीमत लगभग 109.9 डॉलर प्रति बैरल बताई गई।
पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल लगभग 123 अरब डॉलर था। बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुमान के मुताबिक, तेल की कीमत में प्रति बैरल एक डॉलर की लगातार बढ़ोतरी से सालाना आयात खर्च करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ सकता है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में भारत 74.85 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात कर चुका था।
तेल महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इससे चालू खाते के घाटे और आर्थिक विकास पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो 23 महीनों का ऊंचा स्तर बताया गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत किया था।
इस घटनाक्रम पर आधिकारिक अमेरिकी आदेशों और भारत-अमेरिका वार्ता से जुड़ी जानकारी के लिए व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। प्रतिबंधों पर राहत का अर्थ सभी प्रतिबंधों का खत्म होना नहीं है, इसलिए आयातकों और बाजारों को आदेश की शर्तों पर नजर रखनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. ट्रंप ने रूस के तेल से जुड़े प्रतिबंधों पर क्या फैसला लिया?
उन्होंने कुछ रूस-संबंधी प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने से छूट दी है। इसका उद्देश्य अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ उपायों को फिलहाल रोकना है।
2. इस फैसले से भारत को क्या फायदा हो सकता है?
भारत के लिए रूसी तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कम हो सकती है। इससे व्यापार वार्ता और तेल खरीद की योजना बनाने में राहत मिल सकती है, हालांकि असर छूट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
3. क्या इससे पेट्रोल और डीजल सस्ते हो जाएंगे?
जरूरी नहीं। खुदरा ईंधन की कीमतें कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव, रुपये की विनिमय दर, करों और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति सहित कई बातों पर निर्भर करती हैं।
4. भारत कितना कच्चा तेल आयात करता है?
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आपूर्ति में बदलाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।
5. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति क्या है?
भारतीय वाणिज्य मंत्री के अनुसार, समझौते के पहले चरण का मसौदा कानूनी रूप से तैयार किया जा रहा था। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी थी और इसे जल्द पूरा करने की उम्मीद जताई गई थी।
निष्कर्ष
रूस के तेल से जुड़े कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों पर छूट भारत के लिए राहत का संकेत है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। फिर भी तेल की कीमतों, आपूर्ति और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अंतिम असर छूट की शर्तों तथा पश्चिम एशिया की स्थिति से तय होगा।
अस्वीकरण: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय नीतियों और तेल कीमतों में बदलाव संभव है; इसे निवेश या वित्तीय सलाह न मानें।
