कॉर्नरस्टोन वेंचर्स का 250 मिलियन डॉलर फंड प्लान

भारत की निवेश कंपनियां अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत तकनीक और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अधिक पैसा लगाने की तैयारी कर रही हैं। इसी दिशा में वेंचर कैपिटल कंपनी कॉर्नरस्टोन वेंचर्स 2027 की दूसरी छमाही में अपना तीसरा निवेश कोष शुरू करने पर विचार कर रही है। इस कोष के जरिए अधिकतम 250 मिलियन डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा जा सकता है।

कॉर्नरस्टोन वेंचर्स की तीसरे निवेश कोष की योजना

मुंबई स्थित कॉर्नरस्टोन वेंचर्स के प्रबंध साझेदार अभिषेक प्रसाद ने बताया कि कंपनी अपने दूसरे निवेश कोष के नतीजों का इंतजार कर रही है। इसके बाद तीसरे कोष की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरा कोष इस साल के अंत तक या अगले साल के शुरुआती महीनों में पूरा हो सकता है।

कंपनी का तीसरा कोष उसके दूसरे कोष से लगभग 50 मिलियन डॉलर बड़ा हो सकता है। हालांकि, कंपनी निवेश के लिए स्टार्टअप की संख्या 20 से अधिक नहीं रखना चाहती। इसका उद्देश्य हर कंपनी पर पर्याप्त ध्यान देना और निवेश से बेहतर लाभ हासिल करने की संभावना बढ़ाना है। कंपनी का मानना है कि कोष में बहुत अधिक पैसा जुटाने से निवेश पर अच्छा प्रतिफल हासिल करना कठिन हो सकता है।

तीसरे निवेश कोष की मुख्य बातें

  • शुरू करने का संभावित समय: 2027 की दूसरी छमाही।
  • लक्ष्य आकार: अधिकतम 250 मिलियन डॉलर।
  • निवेश पोर्टफोलियो: 20 से अधिक स्टार्टअप नहीं रखने की योजना।
  • प्रमुख क्षेत्र: उन्नत तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक विनिर्माण।

कॉर्नरस्टोन के पहले निवेश कोष का आकार 50 मिलियन डॉलर था। इसमें शामिल 21 कंपनियों में से छह उन्नत तकनीक से जुड़ी थीं। दूसरे कोष का आकार 150 मिलियन डॉलर रखा गया था और इसमें उन्नत तकनीक वाली कंपनियों का हिस्सा लगभग 10 से 15 प्रतिशत रहा। नए कोष में इस क्षेत्र पर कितना अधिक निवेश किया जाएगा, कंपनी ने अभी इसका स्पष्ट आंकड़ा नहीं बताया है।

उन्नत तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बढ़ता ध्यान

कंपनी पहले की तरह कारोबार से कारोबार करने वाली कंपनियों पर ध्यान बनाए रखेगी। इसके साथ ही वह अंतरिक्ष तकनीक, आधुनिक विनिर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कारोबार में निवेश के अवसर तलाश रही है। कंपनी का मानना है कि उन्नत तकनीक से जुड़े कई कारोबार अब व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। कई निवेश कंपनियां ऐसी नई कंपनियों को समर्थन देने के अवसर तलाश रही हैं, जो अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान तैयार करती हैं। भारत के सूचना प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग में भी इस तरह के समाधानों के लिए अवसर देखे जा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए भारत के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वेबसाइट देखी जा सकती है।

निवेशकों के लिए इसका क्या अर्थ है?

उन्नत तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों को निवेश मिलना नए कारोबारों के विकास के अवसर बढ़ा सकता है। हालांकि, ऐसे निवेशों में जोखिम भी रहता है और भविष्य में मिलने वाला लाभ निश्चित नहीं होता।

दूसरे निवेश कोष का आकार बढ़ाने की तैयारी

कॉर्नरस्टोन ने 2024 में अपने दूसरे निवेश कोष की घोषणा 150 मिलियन डॉलर के आकार के साथ की थी। इसमें जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त 50 मिलियन डॉलर जुटाने का विकल्प भी रखा गया था। कंपनी अब इस अतिरिक्त राशि को जुटाने की योजना पर काम कर रही है। इससे दूसरा कोष लगभग 170 से 200 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अंतिम राशि अगले कुछ महीनों में होने वाली धन जुटाने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

कंपनी के अनुसार, दूसरे कोष के लिए लगभग आधा निवेश पोर्टफोलियो तैयार हो चुका है और अब तक आठ निवेश किए गए हैं। इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं, जिनमें कंपनी पहले निवेश कर चुकी थी। दूसरे कोष में कंपनी ने शुरुआती चरण की कंपनियों के साथ-साथ आगे बढ़ चुकी कंपनियों में भी निवेश किया है। इस रणनीति का उद्देश्य निवेशकों को अपेक्षाकृत जल्दी पैसा वापस मिलने के अवसर तैयार करना है।

दूसरे कोष के निवेशों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े डेटा सेंटर कारोबार योट्टा और कारोबारों के लिए ई-कॉमर्स तथा वित्तीय सेवाएं देने वाली ऑफबिजनेस शामिल हैं। इन कंपनियों के आने वाले समय में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना जताई जा रही है।

पहले निवेश कोष से बाहर निकलने की प्रक्रिया

अब कंपनी का पहला निवेश कोष भी निवेश से बाहर निकलने के चरण में पहुंच रहा है। इस कोष में कुल 21 कंपनियां थीं। इनमें से छह उन्नत तकनीक से जुड़ी थीं, जबकि बाकी कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर सेवाएं देने वाले कारोबार से संबंधित थीं। कंपनी तीन निवेशों से बाहर निकल चुकी है और दो अन्य निवेशों से बाहर निकलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

अब तक बाहर निकल चुकी कंपनियों में क्रेडिटनिर्वाना शामिल है, जिसे पिछले साल परफियोस ने खरीदा था। इसके अलावा विग्जो को 2022 में शिपरॉकेट ने अधिग्रहित किया था, जबकि इंटेलिजेंस नोड को 2024 में विज्ञापन क्षेत्र की कंपनी इंटरपब्लिक ग्रुप ने खरीदा था।

डीपीआई क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

अभिषेक प्रसाद के अनुसार, दो अन्य निकासी पूरी होने पर पहले कोष का निवेशकों को वापस की गई राशि और लगाए गए कुल पैसे का अनुपात लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इन पांच निकासियों पर औसतन 2.7 से 3.3 गुना तक प्रतिफल मिला है।

निवेश की दुनिया में डीपीआई का अर्थ है कि निवेशकों द्वारा लगाए गए पैसे की तुलना में उन्हें वास्तव में कितनी राशि वापस मिली है। उदाहरण के लिए, 1 गुना डीपीआई का मतलब है कि निवेशकों को उनकी मूल निवेश राशि वापस मिल गई है। इससे अधिक का स्तर वास्तविक लाभ को दर्शा सकता है। यह केवल कागजों पर दिखाई देने वाली कंपनी की कीमत से अलग होता है।

पहले कोष में बची हुई दस कंपनियों में से कम से कम तीन के अगले तीन वर्षों में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। अन्य कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने, कारोबारों के विलय या किसी दूसरी कंपनी द्वारा अधिग्रहण जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

निष्कर्ष

कॉर्नरस्टोन वेंचर्स की योजना भारत में उन्नत तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में निवेश की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है। हालांकि, तीसरे निवेश कोष का अंतिम आकार, शुरुआत का समय और निवेश की प्राथमिकताएं आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी।

अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश की सलाह न मानें। निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

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