भारत AI से 2035 तक GDP में $1 ट्रिलियन जोड़ सकता है, OpenAI-Z47 रिपोर्ट का बड़ा दावा

OpenAI और वेंचर कैपिटल फर्म Z47 की नई रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि AI तकनीक भारत की GDP में बड़ा योगदान दे सकती है और देश को ‘विकसित भारत’ लक्ष्य के करीब पहुंचाने में मदद कर सकती है।

OpenAI और वेंचर कैपिटल फर्म Z47 के एक संयुक्त विश्लेषण के अनुसार, AI से बढ़ने वाली प्रोडक्टिविटी 2035 तक भारत की GDP को $1 ट्रिलियन तक बढ़ा सकती है, जिससे देश अपने $8.3 ट्रिलियन के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य के और करीब पहुँच जाएगा। इस रिपोर्ट के अनुसार, AI भारत की सालाना GDP ग्रोथ को 1–1.5 प्रतिशत अंकों तक बढ़ा सकता है।

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI बाज़ार

‘The India AI Edge’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, हर महीने 100 मिलियन से ज़्यादा ChatGPT यूज़र्स के साथ, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI बाज़ार बन गया है। AI की “सोचने की क्षमता” (thinking capability) के मामले में भी भारत दुनिया के शीर्ष पाँच देशों में शामिल है; यह क्षमता इस बात से तय होती है कि यूज़र्स कितनी uन्नत तरीके से तर्क-वितर्क (reasoning) का इस्तेमाल करते हैं।

इस बड़े आकार के बावजूद, फ़िलहाल 10% से भी कम भारतीय AI का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में इसके इस्तेमाल में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है। सर्वे के अनुसार, देश की कुल आबादी का 10% से भी कम हिस्सा होने के बावजूद, भारत के शीर्ष 10 शहरों में AI से जुड़ी लगभग 50% गतिविधियाँ होती हैं। दिल्ली-NCR में ChatGPT का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा है, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद में AI से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर काम सबसे ज़्यादा हो रहा है।

🤖 भारत का AI बूम

  • रिपोर्ट: The India AI Edge
  • मुख्य अनुमान: 2035 तक GDP में $1 ट्रिलियन की बढ़ोतरी
  • AI ग्रोथ प्रभाव: GDP ग्रोथ में 1–1.5% अतिरिक्त बढ़त
  • ChatGPT यूज़र्स: हर महीने 100 मिलियन+ भारतीय यूज़र्स
  • वैश्विक रैंक: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI मार्केट
  • सबसे सक्रिय शहर: दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और हैदराबाद

AI स्टार्टअप्स और निवेश में तेज़ उछाल

इस रिपोर्ट में भारत के AI स्टार्टअप इकोसिस्टम में दिख रही ज़बरदस्त तेज़ी को भी रेखांकित किया गया है। निवेशक अब हेल्थकेयर, फ़िनटेक और क़ानूनी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले ‘वर्टिकल AI स्टार्टअप्स’ को ज़्यादा से ज़्यादा समर्थन दे रहे हैं; इसके चलते AI फ़ाइनेंसिंग में साल-दर-साल लगभग चार गुना बढ़ोतरी हुई है—यह $600 मिलियन से बढ़कर लगभग $1.3 बिलियन तक पहुँच गई है।

इस अध्ययन में पाया गया कि सर्वे में शामिल 95% भारतीय CXO (शीर्ष अधिकारियों) ने दावा किया कि AI पहले से ही उनके व्यावसायिक प्रक्रियाओं का एक अभिन्न अंग बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग आधे व्यवसायों को “परिपक्व उपयोगकर्ता” (mature adopters) की श्रेणी में रखा गया है; इसका अर्थ है कि AI अब केवल प्रायोगिक प्रोजेक्ट्स तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वह उनके मुख्य व्यावसायिक कार्यों का हिस्सा बन चुका है।

अध्ययन के अनुसार, AI को शुरुआती दौर में अपनाने वाले अधिकांश व्यवसाय अभी भी अपने सॉफ़्टवेयर बजट का 10% से भी कम हिस्सा AI पर खर्च करते हैं, जबकि AI को पूरी तरह से अपना चुके (mature adopters) लगभग 68% व्यवसाय ऐसा करते हैं।

कौन-कौन से सेक्टर AI को सबसे तेज़ी से अपना रहे हैं?

जिन उद्योगों में AI को अपनाने की दर सबसे अधिक है, उनमें इंजीनियरिंग, मार्केटिंग और ग्राहक सेवा (customer service) शामिल हैं। स्थापित और बड़ी कंपनियाँ अब DevOps, इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रबंधन और किसी भी समस्या या घटना के समाधान (incident resolution) से जुड़ी प्रक्रियाओं में AI का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल कर रही हैं।

Z47 के प्रबंध निदेशक विक्रम वैद्यनाथन के अनुसार, UPI के अलावा, छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMEs) ने अभी तक तकनीक के माध्यम से अपनी प्रोडक्टिविटी में कोई ख़ास बढ़ोतरी नहीं की है। हालाँकि, उनका मानना ​​है कि AI की मदद से अब SMEs भी अंततः तकनीक को पूरी तरह से अपना पाएँगे। वैद्यनाथन ने कहा, “हमें जिस कंप्यूटेशन की ज़रूरत है, वह ट्रेनिंग के लिए नहीं है। यह असल में इन्फरेंस है,” और उन्होंने यह भी बताया कि इन्फरेंस की लागत तेज़ी से कम हो रही है, जिससे “बड़े पैमाने पर लोग इसे अपना सकते हैं।”

📈 AI Adoption और भविष्य की संभावनाएं

  • भारतीय CXO: 95% कंपनियों ने AI को बिजनेस का हिस्सा बताया
  • AI Funding: $600 मिलियन से बढ़कर $1.3 बिलियन
  • मुख्य सेक्टर: हेल्थकेयर, फिनटेक और लीगल सर्विसेज
  • SME Impact: छोटे व्यवसायों में प्रोडक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद
  • AI Tools Use: कोडिंग, डेटा एनालिसिस और प्रोटोटाइपिंग में तेजी
  • भविष्य: AI adoption आने वाले वर्षों में और तेज़ होगा

इसके अलावा, सर्वे में यह भी बताया गया कि जहाँ एक तरफ AI ने टेक्निकल टैलेंट की माँग बढ़ाई है, वहीं दूसरी तरफ इसने इंजीनियरिंग हायरिंग में कोई खास कमी नहीं की है। प्रोडक्ट मैनेजर, डिज़ाइनर और एनालिस्ट अब वर्कफ़्लो और प्रोटोटाइप बनाने के लिए AI कोडिंग टूल्स का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

ChatGPT इस्तेमाल करने वालों में से लगभग आधे लोग ‘जेनरेशन Z’ के सदस्य हैं, जिससे भारत दुनिया के उन देशों में से एक बन गया है जहाँ AI इस्तेमाल करने वालों का औसत उम्र सबसे कम है। सर्वे के मुताबिक, दुनिया भर के औसत के मुकाबले, भारतीय यूज़र्स काम से जुड़े AI इस्तेमाल के मामलों में ज़्यादा आगे हैं, जिनमें डेटा एनालिसिस, कोडिंग और टीचिंग शामिल हैं।

भारत के AI मिशन पर भी फोकस

Z47 के वाइस प्रेसिडेंट अश्विन कन्नन के मुताबिक, “यह सारा ट्रैफ़िक और अब तक हमने जो कुछ भी देखा है, वह असल में सिर्फ़ 10 शहरों की वजह से है,” और उन्होंने बताया कि AI के कुल इस्तेमाल में इन शहरों का हिस्सा आधे से भी ज़्यादा है।

कन्नन ने कहा, “18 से 24 साल की उम्र के लोग ही अब हमारे ChatGPT के कुल मैसेज में से 50% के लिए ज़िम्मेदार हैं।”

रिपोर्ट में भारत के स्वतंत्र AI प्रयासों के एक और पहलू पर भी ज़ोर दिया गया है, जिसका नाम है ‘IndiaAI Mission’। यह मिशन रियायती दरों पर GPU एक्सेस, AI डेटासेट, स्टार्टअप फंडिंग और स्थानीय भाषाओं में AI डेवलपमेंट के लिए मदद मुहैया कराता है।

Disclaimer: यह लेख विभिन्न रिपोर्ट्स और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। AI से जुड़े अनुमान भविष्य की परिस्थितियों और तकनीकी बदलावों के अनुसार बदल सकते हैं।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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