Elara Securities के Global Liquidity Tracker के अनुसार, uभरते बाजारों और कमोडिटी से जुड़े लेन-देन में निवेशकों की थकान साफ दिख रही है, और ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश का बुलबुला तेजी से संयुक्त राज्य अमेरिका में सिमटता जा रहा है।
ग्लोबल AI निवेश अब अमेरिका तक सीमित होता दिख रहा है
ग्लोबल स्टॉक फंड्स में आठ हफ्तों में पहली बार शुद्ध निकासी (net withdrawals) हुई; यूरोप, चीन और जापान से भारी मात्रा में पैसे निकाले जाने के बीच निवेशकों ने लगभग $7 बिलियन बाहर निकाल लिए। पिछली बार ग्लोबल स्टॉक से पैसा मार्च में निकला था, जब ईरानी संकट से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताएं अपने चरम पर थीं।

अमेरिका पर केंद्रित टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और इंडस्ट्रियल फंड्स में, व्यापक ग्लोबल आवंटन में सुस्ती के बावजूद, लगातार भारी निवेश आ रहा है; यह AI व्यापार में अमेरिकी बाजारों के बढ़ते दबदबे को और मजबूत करता है।
🤖 ग्लोबल AI निवेश की प्रमुख बातें
- मुख्य रुझान: AI निवेश अमेरिका में केंद्रित
- ग्लोबल स्टॉक आउटफ्लो: लगभग $7 बिलियन
- प्रमुख लाभार्थी: अमेरिकी टेक और सेमीकंडक्टर फंड्स
- प्रभावित क्षेत्र: यूरोप, चीन और जापान
- निवेशक रुझान: सीमित अवसरों पर फोकस
- विश्लेषण: AI तेजी का दायरा सिमट रहा है
शोध में कहा गया है, “लिक्विडिटी (तरलता) अब काफी सीमित अवसरों के समूह में सिमटती जा रही है,” और यह बताया गया है कि 2025 के मध्य में शुरू हुई AI की वह व्यापक तेजी, जो कभी बहुत फैली हुई थी, अब तेजी से संयुक्त राज्य अमेरिका पर ही केंद्रित होती जा रही है।
उभरते बाजारों पर बढ़ता दबाव
उभरते बाजारों पर अभी भी लगातार दबाव बना हुआ है। जहां भारत में लगातार अंतरराष्ट्रीय निवेश आ रहा था, वहीं चीन में घरेलू स्तर पर बिकवाली जारी रही। पिछले सात हफ्तों में, अकेले भारत से कुल $463 मिलियन की निकासी हुई।
Global Emerging Market (GEM) फंड्स से कुल निकासी लगातार चौथे हफ्ते भी जारी रही और $4.2 बिलियन तक पहुंच गई; मार्च 2025 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि उभरते बाजारों में जोखिम उठाने की निवेशकों की इच्छा में उल्लेखनीय कमी आई है।
अब, AI-आधारित तेजी के कुछ शुरुआती अगुआ बाजार भी कमजोर पड़ने लगे हैं। ताइवान और ब्राजील में AI की तेजी शुरू होने के बाद से अब तक के सबसे खराब निवेश प्रवाह (flow patterns) देखने को मिल रहे हैं, जबकि दक्षिण कोरिया का 10-हफ्तों का औसत विदेशी निवेश प्रवाह जून 2025 के बाद पहली बार नकारात्मक हो गया है।
📉 उभरते बाजार और कमोडिटी पर दबाव
- भारत से निकासी: $463 मिलियन
- GEM फंड आउटफ्लो: $4.2 बिलियन
- कीमती धातु ETF निकासी: $1.1 बिलियन
- कमोडिटी इक्विटी रिडेम्पशन: $9.6 बिलियन
- एनर्जी फंड आउटफ्लो: $1.4 बिलियन
- प्रमुख चिंता: निवेशकों की घटती जोखिम लेने की क्षमता
AI तेजी के शुरुआती बाजारों में कमजोरी
विश्लेषण से पता चलता है कि जिन बाजारों ने पिछले साल ग्लोबल प्रदर्शन में दबदबा बनाया था, वे अब उस स्तर का पूंजी निवेश आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं, भले ही उन्हें ‘शुरुआती चेतावनी संकेतक’ (early warning indicators) के तौर पर देखा जाता रहा हो।
कमोडिटी बाजार में नरमी के संकेत
कमोडिटी से जुड़ी सभी संपत्तियों में नरमी का रुख दिखाई दे रहा है। इस हफ्ते, कीमती धातुओं के ETF से कुल $1.1 बिलियन की निकासी हुई। कमोडिटी क्षेत्र में सबसे पहले चांदी की चमक फीकी पड़ी, जिसकी शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी; इसके बाद मार्च में सोने की कीमतों में भी गिरावट आने लगी।
कमोडिटी इक्विटी फंड्स को मार्च से अब तक कुल $9.6 बिलियन के रिडेम्पशन का सामना करना पड़ा है, जबकि एनर्जी इक्विटी फंड्स में पिछले सात हफ़्तों में $1.4 बिलियन का आउटफ़्लो दर्ज किया गया है—जो अप्रैल 2025 के बाद से उनका दूसरा सबसे बड़ा रिडेम्पशन चक्र है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
