ED के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर सत्यब्रत कुमार ने लिया स्वैच्छिक रिटायरमेंट, जानिए पूरा मामला

PTI के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व विशेष निदेशक सत्यब्रत कुमार ने सरकारी सेवा से स्वेच्छा से रिटायर होने का फैसला किया है। उन्होंने नीरव मोदी, विजय माल्या और महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क जैसे भगोड़ों से जुड़े कई बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच की देखरेख की थी।

ED के पूर्व अधिकारी का स्वैच्छिक रिटायरमेंट

एक साल पहले ED से अपने मूल विभाग में लौटने के बाद, कुमार – जो कस्टम्स और अप्रत्यक्ष कर कैडर के 2004 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं – पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर (अपील्स) के तौर पर काम कर रहे थे।

अपने लगभग 12 साल के कार्यकाल के दौरान, कुमार संघीय मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी एजेंसी में डेपुटेशन पर सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों में से एक बन गए।

📌 सत्यब्रत कुमार सेवा प्रोफाइल

  • पद: पूर्व स्पेशल डायरेक्टर, ED
  • कैडर: IRS (2004 बैच)
  • सेवा अवधि: लगभग 12 वर्ष (डेपुटेशन पर)
  • वर्तमान पोस्टिंग (पहले): कमिश्नर (अपील्स), सिलीगुड़ी
  • सेवानिवृत्ति: स्वैच्छिक रिटायरमेंट
  • मुख्य भूमिका: बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच

अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने अप्रैल में 48 वर्षीय अधिकारी के स्वैच्छिक रिटायरमेंट को मंजूरी दे दी थी; इसकी आधिकारिक सूचना इस महीने की शुरुआत में भेजी गई थी।

अधिकारियों के मुताबिक, कुमार ने सेवा छोड़ने का फैसला तब किया, जब रिटायरमेंट की उम्र 60 साल तक पहुंचने में उनके पास अभी भी लगभग 11 साल बाकी थे। कुमार का सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होने की उम्मीद थी।

ED में महत्वपूर्ण जांचों का नेतृत्व

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, कुमार ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला इसलिए किया ताकि वे अपने शौक और भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

इन वर्षों के दौरान, कुमार ने मुंबई स्थित ED के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की गई कई चर्चित जांचों का नेतृत्व किया। इनमें शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ बैंक ऋण डिफ़ॉल्ट और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला, हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़ा कथित 2 अरब डॉलर का पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाला, और महाराष्ट्र से जुड़ी कई राजनीतिक रूप से संवेदनशील जांचें शामिल थीं।

PNB धोखाधड़ी की जांच में, उन्होंने सैकड़ों करोड़ रुपये की विदेशी संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें जब्त करने में अहम भूमिका निभाई; ये संपत्तियां अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में पाई गई थीं।

⚖️ ED की प्रमुख हाई-प्रोफाइल जांचें

  • विजय माल्या केस: बैंक लोन डिफॉल्ट व मनी लॉन्ड्रिंग
  • नीरव मोदी केस: PNB घोटाला (लगभग $2 अरब)
  • महादेव ऐप: अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क
  • PNB जांच: विदेशी संपत्तियों की जब्ती
  • राजनीतिक केस: महाराष्ट्र से जुड़े संवेदनशील मामले
  • भूमिका: पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय में नेतृत्व

उन्होंने महादेव सट्टेबाजी ऐप की जांच की भी देखरेख की, जिसने छत्तीसगढ़ के राजनेताओं और कारोबारी अधिकारियों के बीच कथित संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे।

कुमार का इस्तीफा एक साल के भीतर दूसरी ऐसी घटना है, जब ED के किसी शीर्ष अधिकारी ने एजेंसी छोड़ने के तुरंत बाद सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया हो।

ED से जुड़े अन्य इस्तीफे और मामले

ED के पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने जुलाई 2025 में, अपने निर्धारित रिटायरमेंट से 15 साल से भी अधिक समय पहले ही अपना पद छोड़ दिया था। राज द्वारा जांच की देखरेख किए जाने के बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल को अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि प्रॉपर्टी खरीदने वालों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने नोएडा स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी के प्रमोटर को हिरासत में लिया है।

फेडरल अधिकारियों ने शुक्रवार को सतिंदर सिंह भसीन को गिरफ्तार किया। भसीन, भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL) के डायरेक्टर हैं और ग्रेटर नोएडा में मशहूर ‘ग्रैंड वेनिस मॉल’ के मालिक हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में, हिरासत में लिए जाने के बाद भसीन को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की विशेष अदालत में पेश किया गया। मामले में और गहन पूछताछ की अनुमति देते हुए, जज ने उन्हें 6 जून तक ED की हिरासत में भेज दिया।

भसीन चल रही जांच में “सहयोग नहीं कर रहे थे” और जानबूझकर ED के कई समन से “बच रहे थे”। सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई को एक सीधा आदेश जारी कर ED को उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था।

ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले का मुख्य आधार कई ‘फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट’ (FIRs) हैं, जिन्हें सबसे पहले 2015 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने दर्ज किया था।


Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी कानूनी या वित्तीय मामले में आधिकारिक स्रोत देखें।

Gourav Kumar Singh

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