दिल्ली में तिरंगा मार्च में शामिल होने जा रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को शुक्रवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह एक सप्ताह के भीतर उनकी दूसरी हिरासत बताई जा रही है। संगठन की ओर से कहा गया है कि दिपके को शनिवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाना था।
- दिपके शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ यात्रा में शामिल होने जा रहे थे।
- पुलिस ने क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों और शांति बनाए रखने के लिए की गई निवारक कार्रवाई का हवाला दिया।
- CJP की कानूनी प्रमुख ने कहा कि दिपके के वकील उनसे मुलाकात नहीं कर पाए थे और उनकी स्थिति का पता नहीं चल पा रहा था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने दिपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत हिरासत में लिया। धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा से जुड़ी है, जबकि धारा 170 किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक गिरफ्तारी से संबंधित है।
दिपके को हिरासत में लेने की वजह क्या बताई गई?
दिपके शुक्रवार को CJP की ओर से आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ यात्रा में भाग लेने के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क जा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उस क्षेत्र में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। पुलिस ने इन्हीं प्रतिबंधों और सार्वजनिक शांति बनाए रखने की जरूरत का हवाला दिया।
BNSS की धारा 163 के तहत सक्षम अधिकारी कुछ परिस्थितियों में सभा, जुलूस या अन्य गतिविधियों पर रोक लगा सकते हैं। ऐसे प्रतिबंधों का उद्देश्य संभावित तनाव, अव्यवस्था या खतरे को रोकना होता है। संबंधित क्षेत्र में लागू आदेशों की शर्तें और अवधि आधिकारिक निर्देशों से तय होती हैं।
यह प्रावधान प्रशासन को तत्काल रोकथाम के लिए आदेश जारी करने की शक्ति देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कनॉट प्लेस में पाँच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े, जुलूस और प्रदर्शन के लिए पहले से लिखित अनुमति जरूरी थी।
पुलिस ने जारी किए थे दो नोटिस
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिपके को दो नोटिस दिए गए थे। इनमें से एक में नई दिल्ली जिले की ओर से सेंट्रल पार्क नहीं जाने का निर्देश था, क्योंकि वहाँ धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। दूसरा नोटिस दक्षिण-पश्चिम दिल्ली जिले की ओर से जारी किया गया और उसमें पहले की निवारक कार्रवाई का उल्लेख था।
यह पिछली कार्रवाई 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। बाद में कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें इस शर्त पर रिहा किया था कि वे एक वर्ष तक शांति भंग नहीं करेंगे। पुलिस ने उस मामले में ₹50,000 का जमानती बांड हस्ताक्षरित किए जाने की बात कही थी।
CJP की ओर से क्या कहा गया?
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि दिपके को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय तक वकील उनसे मिल नहीं पाए थे और उनका ठिकाना स्पष्ट नहीं था। उनके अनुसार, शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे पेशी होने की उम्मीद थी। यह संगठन की ओर से दी गई जानकारी थी; पेशी और आगे की कानूनी स्थिति की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई निवारक प्रावधानों के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लागू प्रतिबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन सकती है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए अदालत की कार्यवाही, संबंधित आदेशों और सभी पक्षों के आधिकारिक बयानों को साथ में देखना जरूरी है। BNSS की जानकारी के लिए भारत सरकार के इंडिया कोड पोर्टल पर कानून का पाठ देखा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. अभिजीत दिपके को कब हिरासत में लिया गया?
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को हिरासत में लिया, जब वह कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित CJP की तिरंगा यात्रा में शामिल होने जा रहे थे।
2. पुलिस ने किन धाराओं का हवाला दिया?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिपके को BNSS की धारा 126 और 170 के तहत हिरासत में लिया गया। ये धाराएँ शांति बनाए रखने और संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई से संबंधित हैं।
3. BNSS की धारा 163 क्या है?
धारा 163 कुछ परिस्थितियों में प्रशासन को संभावित खतरे या सार्वजनिक अव्यवस्था रोकने के लिए आदेश जारी करने की शक्ति देती है। इसके तहत किसी क्षेत्र में सभाओं या जुलूसों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
4. दिपके को अदालत में कब पेश किया जाना था?
CJP की कानूनी प्रमुख के बयान के मुताबिक, दिपके को शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद थी। आगे की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
5. क्या यह उनकी पहली हिरासत थी?
नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर को भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिपके और दो अन्य CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया था।
निष्कर्ष
अभिजीत दिपके की दूसरी हिरासत का मामला दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शनों पर लागू प्रतिबंधों और निवारक पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। आगे की स्थिति समझने के लिए अदालत की कार्यवाही और पुलिस के आधिकारिक बयानों पर नजर रखना जरूरी होगा।
अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। कानूनी स्थिति और आगे की घटनाओं की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से करें।
