रिंग रोड और बाईपास पर सरकार का नया नियम, Access-Controlled Highways से घटेगा जाम

भारत सरकार शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए रिंग रोड और बाईपास बनाने की नीति में बदलाव कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की संशोधित नीति के अनुसार, ऐसे मार्गों को पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य हाईवे पर वाहनों की रफ्तार बनाए रखना और शहरों के भीतर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव कम करना है।

रिंग रोड और बाईपास के लिए नए नियम

नई व्यवस्था के तहत रिंग रोड और बाईपास कम से कम चार लेन के होंगे। इन सड़कों पर प्रवेश और निकास केवल तय किए गए इंटरचेंज से होगा। इससे स्थानीय सड़कें, दुकानों के रास्ते और अनियंत्रित कट सीधे हाईवे पर नहीं खुलेंगे। नीति का लक्ष्य है कि वाहनों को लंबी दूरी तक बिना बार-बार रुकावट के चलने की सुविधा मिले।

सरकार चाहती है कि इन मार्गों पर वाहनों की गति लगभग 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा के स्तर पर बनी रहे। इसके लिए प्रवेश और निकास को नियंत्रित किया जाएगा तथा टोल की व्यवस्था दूरी के आधार पर बंद प्रणाली के तहत रखी जाएगी। यानी वाहन जिस प्रवेश बिंदु से सड़क पर आएगा और जहां से बाहर निकलेगा, टोल उसी दूरी के अनुसार तय हो सकेगा।

400 से 500 शहरों के आसपास सड़क नेटवर्क की योजना

योजना के तहत करीब 400 से 500 शहरों के आसपास लगभग 10,000 किलोमीटर लंबा रिंग रोड और बाईपास नेटवर्क विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में करीब 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत का अनुमान बताया गया है। इन सड़कों से लंबी दूरी के ट्रकों और अन्य वाहनों को भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों से बाहर निकलने का विकल्प मिल सकता है।

मंत्रालय ने शहरों के आसपास हाईवे की गति में गिरावट का आकलन भी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 83 शहरों का अध्ययन किया गया और उनमें से 80 शहरों के पास हाईवे की गति में 10 प्रतिशत से अधिक कमी देखी गई। इनमें 32 शहरों में सुधार से जुड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि 48 शहरों के लिए समाधान पर काम बाकी है।

इंटरचेंज और आसपास के निर्माण पर नियंत्रण

नए नियमों में इंटरचेंज के बीच कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी रखने की बात है। इससे सड़क पर बार-बार प्रवेश और निकास के कारण होने वाली रुकावटों को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, रिंग रोड और बाईपास के किनारे अनियोजित निर्माण तथा सड़क के साथ लगातार फैलते व्यावसायिक विकास को रोकने के लिए भी प्रावधान रखे जाएंगे।

प्रस्ताव में सड़क के पास 15 मीटर का नो-डेवलपमेंट क्षेत्र और उसके बाद दो किलोमीटर तक नियंत्रित विकास क्षेत्र रखने की बात शामिल है। इसका उद्देश्य यह है कि सड़क के आसपास बेतरतीब निर्माण न हो और भविष्य में मार्ग की क्षमता पर दबाव न बढ़े। इन नियमों को लागू करने में राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

शहरों और यात्रियों को क्या फायदा हो सकता है?

अगर योजना सही तरीके से लागू होती है, तो शहरों के बीच से गुजरने वाले भारी वाहनों की संख्या कम हो सकती है। इससे स्थानीय सड़कों पर जाम, यात्रा में लगने वाला समय और ईंधन की खपत घटने में मदद मिल सकती है। बेहतर कनेक्टिविटी से माल ढुलाई और शहरों के बाहरी हिस्सों तक पहुंच भी आसान हो सकती है।

हालांकि, इन परियोजनाओं का असर जमीन अधिग्रहण, लागत, राज्यों के सहयोग और निर्माण की समयसीमा पर निर्भर करेगा। केवल सड़क बना देना पर्याप्त नहीं होगा; उसके आसपास भूमि उपयोग पर नियंत्रण और प्रवेश-निकास नियमों का पालन भी जरूरी होगा।

निष्कर्ष

सरकार की संशोधित नीति का मकसद रिंग रोड और बाईपास को तेज, सुरक्षित और नियंत्रित यातायात के लिए तैयार करना है। यदि प्रस्तावित नेटवर्क और भूमि-उपयोग नियम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो शहरों में जाम कम करने और हाईवे पर यात्रा को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार जानकारी के आधार पर सामान्य सूचना के लिए तैयार किया गया है। परियोजनाओं की लागत, समयसीमा और नियमों में आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार बदलाव हो सकता है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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