भारत की कई बड़ी भुगतान कंपनियां अब छोटे और मध्यम कारोबारियों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए एआई आधारित सुविधाओं का इस्तेमाल कर रही हैं। इसका मुख्य कारण भुगतान कारोबार में बढ़ती ग्राहक जोड़ने की लागत और कम होता मुनाफा है। कंपनियों का मानना है कि अगर कारोबारियों के रोजमर्रा के कई काम एक ही प्लेटफॉर्म पर आसानी से पूरे हो जाएं, तो उनके दूसरी सेवाओं की ओर जाने की संभावना कम हो सकती है।
भुगतान कंपनियां एआई पर क्यों बढ़ा रही हैं निर्भरता?
रेजरपे, कैशफ्री, भारतपे और पेयू ने ऐसी सुविधाएं शुरू की हैं, जिनमें कारोबारी कामों को अपने आप संभालने वाली तकनीक शामिल है। इनमें अधूरी खरीदारी के बाद ग्राहक से संपर्क करना, असफल भुगतान की जानकारी संभालना, विवाद से जुड़े मामलों को देखना, कैश ऑन डिलीवरी की पुष्टि, ग्राहक पहचान जांच, सदस्यता और ग्राहक प्रतिक्रिया जैसे काम शामिल हैं। भारतपे की सुविधा कारोबारियों के सवालों का जवाब देने के साथ वित्तीय उत्पादों की जानकारी और कर्ज से जुड़ी सलाह देने में भी मदद करती है।
रेजरपे ने छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए मार्च में अपनी सुविधा पेश की थी। इसके बाद कैशफ्री ने अगस्त में अपनी सेवा शुरू की। भारतपे और पेयू ने भी सितंबर में मुंबई में हुए ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान अपनी ऐसी योजनाओं की जानकारी दी। इन कंपनियों की कोशिश केवल भुगतान की सुविधा देने तक सीमित नहीं रह गई है। वे कारोबारियों के दूसरे कामों को भी अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ना चाहती हैं।
एआई से जुड़े भुगतान प्लेटफॉर्म के प्रमुख काम
- असफल भुगतान से जुड़ी जानकारी संभालना।
- अधूरी खरीदारी को पूरा कराने में मदद करना।
- कैश ऑन डिलीवरी की पुष्टि करना।
- ग्राहक पहचान और विवाद से जुड़े काम संभालना।
- सदस्यता और ग्राहक प्रतिक्रिया से जुड़े कामों को आसान बनाना।
मुफ्त सुविधाओं के जरिए कारोबारियों को बनाए रखने की कोशिश
इनमें से कुछ कंपनियां शुरुआत में इन सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं ले रही हैं। इसका उद्देश्य कारोबारियों को लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखना है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती दौर में नई तकनीक पर खर्च बढ़ सकता है, लेकिन अगर कारोबारी ज्यादा सेवाओं का इस्तेमाल करने लगते हैं तो कंपनियों को आगे चलकर दूसरे वित्तीय उत्पाद बेचने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। यूपीआई पर शून्य एमडीआर होने के कारण भुगतान से सीधे कमाई की सीमा भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कैशफ्री की एजेंट आधारित सुविधा
कैशफ्री की एजेंट आधारित सुविधा कई काम एक ही प्रक्रिया में पूरा कर सकती है। इसमें अधूरी खरीदारी को वापस पूरा कराने की कोशिश, असफल भुगतान, कैश ऑन डिलीवरी की पुष्टि, सदस्यता और विवाद दर्ज कराने जैसे काम शामिल हैं। कंपनी ने पहले इसका परीक्षण किया और बाद में छोटे तथा मध्यम कारोबारियों के लिए इसे व्यापक रूप से उपलब्ध कराया। कंपनी के अनुसार, अभी इससे सीधे कमाई शुरू नहीं की गई है, लेकिन इससे कारोबारी उसके प्लेटफॉर्म पर ज्यादा सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
रेजरपे के एआई फीचर से बिक्री बढ़ने का दावा
रेजरपे ने दावा किया है कि उसकी इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले कुछ कारोबारियों की कुल बिक्री में लगभग 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी का मानना है कि ऐसी तकनीक उसे केवल भुगतान सेवा देने वाली कंपनी से आगे ले जाकर कारोबार के कई वित्तीय काम संभालने वाले प्लेटफॉर्म में बदल सकती है।
भुगतान कारोबार में कंपनियों की बड़ी चुनौतियां
- ग्राहक जोड़ने की लागत लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
- यूपीआई पर शून्य एमडीआर के कारण सीधे भुगतान से कमाई सीमित है।
- एआई सुविधाओं को विकसित करने और चलाने में शुरुआती खर्च बढ़ सकता है।
- छोटे कारोबारियों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना जरूरी है।
एआई बदल रहा है ऑनलाइन खरीदारी का तरीका
ऑनलाइन खरीदारी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। एआई की मदद से ग्राहक सामान खोजने, विकल्प देखने और खरीदारी की प्रक्रिया पूरी करने में अधिक स्वचालित तरीके अपना सकते हैं। ऐसे में भुगतान कंपनियां भी अपनी सेवाओं को इसी बदलाव के अनुसार तैयार कर रही हैं। इसका उद्देश्य खरीदारी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करना और भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाना है।
एक ही प्लेटफॉर्म पर निर्भरता की चिंता
हालांकि, इस मॉडल से एक दूसरी चिंता भी सामने आती है। अगर किसी कारोबारी का भुगतान, ग्राहक सेवा और अन्य जरूरी काम एक ही कंपनी की तकनीक पर निर्भर हो जाएं, तो बाद में दूसरी सेवा पर जाना कठिन हो सकता है। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि सुविधा और कंपनी पर निर्भरता के बीच संतुलन जरूरी है। बड़ी कंपनियां अक्सर एक से अधिक भुगतान सेवा का इस्तेमाल करती हैं, जबकि छोटे कारोबारी एक ही सेवा पर ज्यादा निर्भर हो सकते हैं।
भारतपे की रणनीति में एआई की भूमिका
भारतपे के लिए भी ऐसी तकनीक का उद्देश्य केवल नई सुविधा देना नहीं है। कंपनी ग्राहक जोड़ने की लागत घटाने, मौजूदा कारोबारियों को बनाए रखने और दूसरे वित्तीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। कारोबारियों के सवालों का जवाब तेजी से देना और उनकी जरूरत के अनुसार जानकारी उपलब्ध कराना इस रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में इन सेवाओं की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कारोबारियों का काम कितना आसान बनाती हैं और उन्हें किसी एक प्लेटफॉर्म पर कितना निर्भर करती हैं।
5 FAQs
1. भुगतान कंपनियां एआई सुविधाओं का इस्तेमाल क्यों कर रही हैं?
भुगतान कंपनियां ग्राहक जोड़ने की लागत कम करने और मौजूदा कारोबारियों को अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए एआई आधारित सुविधाओं का इस्तेमाल कर रही हैं।
2. एआई भुगतान प्लेटफॉर्म पर कौन-कौन से काम कर सकता है?
एआई आधारित सुविधाएं असफल भुगतान, अधूरी खरीदारी, कैश ऑन डिलीवरी की पुष्टि, ग्राहक पहचान, सदस्यता, विवाद और ग्राहक प्रतिक्रिया जैसे कामों में मदद कर सकती हैं।
3. यूपीआई पर शून्य एमडीआर का भुगतान कंपनियों पर क्या असर है?
यूपीआई पर शून्य एमडीआर होने के कारण भुगतान लेनदेन से सीधे कमाई की सीमा रहती है। इसलिए कंपनियां दूसरे वित्तीय उत्पादों और सेवाओं से आय बढ़ाने के अवसर तलाश रही हैं।
4. क्या एआई से कारोबारियों की बिक्री बढ़ सकती है?
रेजरपे ने दावा किया है कि उसकी सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले कुछ कारोबारियों की कुल बिक्री में लगभग 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है। यह कंपनी का दावा है।
5. एक ही भुगतान प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने की क्या चिंता है?
अगर भुगतान, ग्राहक सेवा और अन्य जरूरी काम एक ही कंपनी की तकनीक पर निर्भर हो जाएं, तो बाद में दूसरी सेवा पर जाना कठिन हो सकता है। इसलिए सुविधा और निर्भरता के बीच संतुलन महत्वपूर्ण है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और कंपनियों के दावों पर आधारित है। कारोबारी निर्णय से पहले जानकारी जांचें।
