एयर इंडिया में बढ़ते घाटे और परिचालन खर्च को कम करने के लिए कंपनी के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने खर्चों पर नियंत्रण बढ़ाने की पहल की है। पद संभालने के एक महीने से भी कम समय में उन्होंने पूरे समूह में बचत के अवसर तलाशने के लिए एक विशेष टीम बनाई है।
इसके साथ ही कंपनी में खर्च से जुड़े फैसलों की मंजूरी की प्रक्रिया को भी सख्त किया गया है। एयर इंडिया समूह में मुख्य एयरलाइन के अलावा कम लागत वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस भी शामिल है।
एयर इंडिया में खर्च घटाने के लिए नई टीम का गठन
कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार, इन बदलावों की जानकारी 12 अक्टूबर को कर्मचारियों के आंतरिक डिजिटल मंच के माध्यम से दी गई थी। गेब्रेमेरियम ने कर्मचारियों को बताया कि खर्च कम करने के लिए अलग-अलग विभागों के लोगों की एक पूर्णकालिक टीम बनाई गई है। यह टीम कंपनी के सभी विभागों में खर्चों की समीक्षा करेगी और बचत के नए तरीके खोजेगी। एक अक्टूबर से खर्च से जुड़े प्रस्तावों को विभाग प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की मंजूरी से गुजरना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य फैसलों में पारदर्शिता बढ़ाना और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाना है।
एयर इंडिया की नई खर्च नियंत्रण योजना की मुख्य बातें
- पूरे समूह के खर्चों की समीक्षा के लिए पूर्णकालिक टीम बनाई गई है।
- खर्च से जुड़े प्रस्तावों पर कई स्तरों पर मंजूरी जरूरी होगी।
- कर्मचारियों को बचत और कमाई बढ़ाने के सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- बचाए गए धन का इस्तेमाल सेवाओं और परिचालन में सुधार के लिए किया जा सकता है।
टाटा समूह के अधीन आने के बाद एयर इंडिया की रणनीति
कंपनी की नई रणनीति से उसकी प्राथमिकताओं में बदलाव दिखाई दे रहा है। वर्ष 2022 में टाटा समूह के नियंत्रण में लौटने के बाद एयर इंडिया ने अपने कारोबार को दोबारा मजबूत करने, विमानों के बेड़े का आधुनिकीकरण करने और दूसरी एयरलाइनों के साथ कामकाज को एकीकृत करने पर जोर दिया था। इस दौरान विस्तारा का एयर इंडिया में और एयरएशिया इंडिया का एयर इंडिया एक्सप्रेस में विलय किया गया। कंपनी ने विमानों के बड़े ऑर्डर भी दिए। अब नए नेतृत्व के सामने इन निवेशों का बेहतर इस्तेमाल करके परिचालन में सुधार करना और कारोबार को लंबे समय तक लाभदायक बनाना बड़ी चुनौती है।
नए सीईओ का लाभ और टिकाऊ विकास पर जोर
28 सितंबर को कर्मचारियों के साथ हुई पहली बैठक में गेब्रेमेरियम ने लाभ और टिकाऊ विकास पर ध्यान देने की बात कही थी। उन्होंने कमाई बढ़ाने, उपलब्ध सीटों के बेहतर इस्तेमाल और खर्चों को नियंत्रित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा, उड़ानों की नियमितता और समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल को भी प्राथमिकता बताया। खर्चों में कटौती के लिए बनाई गई नई टीम इसी रणनीति का हिस्सा है।
खर्चों की जिम्मेदारी सभी कर्मचारियों पर
कंपनी के प्रमुख के अनुसार, कई बाहरी परिस्थितियां ऐसी हैं जिन पर एयरलाइन का सीधा नियंत्रण नहीं है, लेकिन खर्चों को बेहतर तरीके से संभालना कर्मचारियों के हाथ में है। उन्होंने कहा कि बचत की जिम्मेदारी केवल किसी एक विभाग की नहीं है, बल्कि इसमें सभी कर्मचारियों की भागीदारी जरूरी है। इसके लिए कंपनी के हर विभाग में होने वाले खर्चों की व्यवस्थित समीक्षा की जाएगी और उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां कम खर्च में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कर्मचारियों को बचत के सुझाव देने पर मिल सकता है पुरस्कार
कर्मचारियों को खर्च कम करने और कमाई बढ़ाने के नए सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है। इसमें अच्छे सुझाव देने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जा सकता है। अनुबंधों की शर्तों पर दोबारा बातचीत करना, संसाधनों का सही इस्तेमाल करना, खरीद प्रक्रिया में सुधार करना और बर्बादी कम करना इस पहल के प्रमुख हिस्से होंगे।
एयर इंडिया के सामने खर्च कम करने की प्रमुख चुनौतियां
- पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से कुछ उड़ानों के रास्ते लंबे होना।
- विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी।
- विमानों के आधुनिकीकरण में आपूर्ति संबंधी देरी।
- विदेशी मुद्रा की दरों में उतार-चढ़ाव से लागत बढ़ना।
- वित्तीय घाटे के साथ सुरक्षा और परिचालन की गुणवत्ता बनाए रखना।
पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से बढ़ी उड़ानों की लागत
एयर इंडिया के लिए परिचालन खर्च कम करना इसलिए भी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि कई बाहरी समस्याओं के कारण उड़ानों की लागत बढ़ गई है। अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण पश्चिम दिशा में जाने वाली कई उड़ानों को लंबे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। इससे विमानों को अधिक ईंधन खर्च करना पड़ता है और उड़ान का समय भी बढ़ जाता है। इसके अलावा चालक दल से जुड़े खर्चों पर भी असर पड़ता है। एयर इंडिया के पूर्व प्रमुख कैंपबेल विल्सन ने इस वजह से एक साल में लगभग 4,000 करोड़ रुपये के प्रभाव का अनुमान लगाया था।
पश्चिम एशिया संघर्ष और विमान आधुनिकीकरण में देरी
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भी विमान सेवाओं के संचालन को प्रभावित किया है। इसके साथ ही आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के कारण विमानों के आधुनिकीकरण की योजना में देरी हुई है। पिछले वर्ष जून में एआई-171 विमान दुर्घटना के बाद कंपनी पर नियामकीय निगरानी भी बढ़ गई थी। इन परिस्थितियों के कारण एयरलाइन को सुरक्षा, संचालन और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का एक साथ सामना करना पड़ रहा है।
विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से दबाव
विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है। अक्टूबर में दिल्ली में विमान ईंधन की कीमत लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गई। इससे पहले भी लगातार महीनों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। बढ़ती लागत की भरपाई के लिए एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो और अकासा एयर ने 9 अक्टूबर से घरेलू और कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार बढ़ा दिया।
खर्चों में बचत से सेवाओं में सुधार की योजना
गेब्रमेरियम का कहना है कि खर्चों में बचत से कंपनी को अपने कामकाज और यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में दोबारा निवेश करने का अवसर मिलेगा। बचाए गए पैसे का इस्तेमाल उड़ानों की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादों और सेवाओं को बेहतर बनाने तथा भविष्य में कारोबार को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है। कंपनी की कोशिश है कि खर्चों पर नियंत्रण के साथ यात्रियों के अनुभव और परिचालन की गुणवत्ता से समझौता न करना पड़े।
वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया समूह को 22,238 करोड़ रुपये का घाटा
एयर इंडिया समूह का वित्तीय प्रदर्शन भी चिंता का विषय बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में समूह को कुल 22,238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष के 10,859 करोड़ रुपये के घाटे से दोगुने से भी अधिक है। एयर इंडिया को अकेले 15,368 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि उसकी कुल आय 51,452 करोड़ रुपये रही। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस को 6,767 करोड़ रुपये का घाटा हुआ और उसकी आय 19,088 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
समूह की कुल आय 71,870 करोड़ रुपये
समूह की कुल आय 71,870 करोड़ रुपये रही। इसमें खानपान, जमीन पर विमान सेवाओं के प्रबंधन और गिफ्ट सिटी स्थित इकाई जैसी सहायक कंपनियों का योगदान भी शामिल था। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कारोबार से अच्छी आय होने के बावजूद कंपनी का खर्च काफी अधिक है और उसे लाभदायक बनाने के लिए बड़े बदलावों की जरूरत है।
विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव से भी बढ़ा नुकसान
विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव ने भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाला है। वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया को विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन में 5,033 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह नुकसान 1,299 करोड़ रुपये था। एयर इंडिया एक्सप्रेस को भी लगभग 2,370 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा नुकसान हुआ। डॉलर में होने वाले विमान पट्टे के भुगतान और दूसरे खर्चों पर मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव का असर पड़ता है, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
टाटा संस ने एयर इंडिया में किया 45,347 करोड़ रुपये का निवेश
जनवरी 2022 में एयर इंडिया का स्वामित्व मिलने के बाद से टाटा संस इसमें 45,347 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है। कंपनी से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, टाटा संस के बोर्ड ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त पूंजी लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी भी दी है। हालांकि, इस राशि के वास्तविक निवेश के लिए संबंधित कारोबारी योजनाओं और जरूरतों का मूल्यांकन किया जाएगा।
एयर इंडिया के सामने अब क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
एयर इंडिया के नए नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बड़े निवेश और खर्चों के बावजूद कंपनी को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। इसके लिए केवल खर्चों में कटौती करना पर्याप्त नहीं होगा। उड़ानों का बेहतर प्रबंधन, ईंधन की लागत पर नियंत्रण, उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देना भी जरूरी होगा। कंपनी इन सभी क्षेत्रों में सुधार कर पाती है या नहीं, इसका असर आने वाले समय में उसके घाटे और कारोबार की स्थिति पर दिखाई देगा।
एयर इंडिया की कंपनी संबंधी जानकारी और आधिकारिक घोषणाओं के लिए एयर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
निष्कर्ष
एयर इंडिया ने बढ़ते घाटे और परिचालन खर्च को नियंत्रित करने के लिए नई टीम बनाई है और खर्चों की मंजूरी की प्रक्रिया सख्त की है। हालांकि, ईंधन की कीमतें, लंबे उड़ान मार्ग और विदेशी मुद्रा का असर बड़ी चुनौतियां हैं। कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए खर्च नियंत्रण के साथ बेहतर परिचालन और यात्री सेवाएं भी जरूरी होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. एयर इंडिया ने खर्च कम करने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
एयर इंडिया ने समूह के विभिन्न विभागों के खर्चों की समीक्षा करने के लिए पूर्णकालिक टीम बनाई है। खर्च से जुड़े प्रस्तावों की मंजूरी प्रक्रिया भी सख्त की गई है, ताकि अनावश्यक खर्च घटाया जा सके और बचत के अवसर खोजे जा सकें।
2. वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया समूह को कितना घाटा हुआ?
दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया समूह को 22,238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। यह पिछले वित्त वर्ष के 10,859 करोड़ रुपये के घाटे से दोगुने से भी अधिक था।
3. पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से एयर इंडिया पर क्या असर पड़ा?
पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण पश्चिम दिशा में जाने वाली कई उड़ानों को लंबे मार्गों से गुजरना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत, उड़ान का समय और चालक दल से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं।
4. विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों का एयर इंडिया पर क्या असर है?
विमान ईंधन की कीमत बढ़ने से एयरलाइन का परिचालन खर्च बढ़ता है। लागत के दबाव को कम करने के लिए कई विमान कंपनियों ने घरेलू और कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार बढ़ाया है।
5. टाटा संस ने एयर इंडिया में कितना निवेश किया है?
दी गई जानकारी के अनुसार, जनवरी 2022 में एयर इंडिया का स्वामित्व मिलने के बाद से टाटा संस 45,347 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है। अतिरिक्त पूंजी लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी भी बताई गई है, लेकिन वास्तविक निवेश कारोबारी जरूरतों के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर
यह लेख उपलब्ध समाचार विवरण पर आधारित है। वित्तीय आंकड़ों और कंपनी की घोषणाओं की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें। यह निवेश संबंधी सलाह नहीं है।
