Akasa Air की कमाई में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अच्छी बढ़ोतरी हुई, लेकिन इससे कंपनी का घाटा कम नहीं हो पाया। एयरलाइन का परिचालन राजस्व 35 प्रतिशत बढ़कर ₹6,168 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹4,583 करोड़ था। इसके बावजूद कंपनी का शुद्ध घाटा 37 प्रतिशत बढ़कर ₹2,716 करोड़ पहुंच गया। विमान बेड़े और उड़ानों के नेटवर्क का विस्तार इसकी कमाई बढ़ाने में मददगार रहा, लेकिन बढ़ते खर्च ने मुनाफे की राह मुश्किल बनाए रखी।
Akasa Air का revenue बढ़ा, लेकिन घाटा भी बढ़ा
Akasa Air का संचालन SNV Aviation Pvt. Ltd करती है। कंपनी की FY26 रिपोर्ट के अनुसार, बेड़े में नए विमान जोड़ने, नेटवर्क बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने में निवेश के कारण घाटा बढ़ा। एयरलाइन ने वित्त वर्ष के दौरान 10 विमान जोड़े और अपनी क्षमता में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की।
विमानन क्षेत्र के विश्लेषकों के मुताबिक, केवल राजस्व बढ़ने से एयरलाइन का मुनाफा तय नहीं होता। नए विमानों से जुड़े खर्च, रखरखाव और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव कमाई पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, FY26 के दौरान छह महीने तक सकारात्मक EBITDA दर्ज होना परिचालन प्रदर्शन में सुधार का संकेत माना गया।
✈️ Akasa Air की FY26 कमाई और घाटा
- परिचालन राजस्व: ₹6,168 करोड़
- राजस्व में बढ़ोतरी: 35 प्रतिशत
- शुद्ध घाटा: ₹2,716 करोड़
- घाटे में बढ़ोतरी: 37 प्रतिशत
- विमान क्षमता: करीब 30 प्रतिशत बढ़ी
- मुख्य वजह: विमान, रखरखाव और विदेशी मुद्रा से जुड़े खर्च
विमान और विदेशी मुद्रा से जुड़े खर्च बढ़े
FY26 में Akasa Air का कुल खर्च 36 प्रतिशत बढ़कर ₹8,988 करोड़ हो गया। विदेशी मुद्रा से जुड़ा नुकसान लगभग छह गुना बढ़कर ₹992 करोड़ पहुंच गया, जबकि FY25 में यह ₹173 करोड़ था। विमान रखरखाव और अन्य विमान संबंधी खर्च 49 प्रतिशत बढ़कर ₹1,638 करोड़ हो गए। वित्तीय लागत भी 49 प्रतिशत बढ़कर ₹787 करोड़ दर्ज की गई।
ईंधन पर खर्च 12.5 प्रतिशत बढ़कर ₹2,265 करोड़ रहा। हालांकि, कुल परिचालन राजस्व में ईंधन खर्च का हिस्सा पिछले साल के 44 प्रतिशत से घटकर करीब 37 प्रतिशत हो गया। हवाई अड्डे से जुड़े शुल्क 26 प्रतिशत बढ़कर ₹504 करोड़ हो गए। इससे साफ है कि कंपनी पर दबाव केवल ईंधन की कीमतों से नहीं, बल्कि कई तरह के खर्चों से पड़ा।
📉 घाटा कम करने की राह में बड़ी चुनौतियां
- विदेशी मुद्रा नुकसान: ₹992 करोड़
- विमान रखरखाव खर्च: ₹1,638 करोड़
- वित्तीय लागत: ₹787 करोड़
- यात्री सीट भराव: 80 प्रतिशत से घटकर 77 प्रतिशत
- जरूरी कदम: लागत पर नियंत्रण और परिचालन क्षमता का बेहतर उपयोग
- लक्ष्य: लंबे समय में कंपनी को मुनाफे में लाना
Akasa Air ने लागत सुधार का दावा किया
कंपनी के CFO अंकुर गोयल के अनुसार, FY26 में उपलब्ध सीट किलोमीटर के आधार पर क्षमता 30 प्रतिशत बढ़ी। दूरी के असर को ध्यान में रखकर देखे गए प्रति इकाई राजस्व में 10 प्रतिशत सुधार हुआ, जबकि प्रति इकाई लागत 4 प्रतिशत कम हुई। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके EBITDA से जुड़े मार्जिन में सुधार आया।
कंपनी ने विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव को अलग रखते हुए अपने मूल प्रदर्शन में कुछ सुधार की बात कही। इस आधार पर उसका कर-पूर्व घाटा लगभग 5 प्रतिशत घटकर करीब ₹1,700 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह करीब ₹1,800 करोड़ था। फिर भी कंपनी को कुल घाटे से बाहर आने के लिए लगातार लागत बचत और अधिक परिचालन पैमाने की जरूरत होगी।
विमानों का बेड़ा और नेटवर्क बढ़ा
मार्च 2026 के अंत तक Akasa Air के बेड़े में 37 Boeing 737 MAX विमान थे, जबकि एक साल पहले 27 विमान थे। कंपनी का नेटवर्क 26 घरेलू और छह अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुंच गया था। 30 सितंबर 2026 तक बेड़े में विमानों की संख्या बढ़कर 43 हो गई।
इसके बावजूद भारत के घरेलू विमानन बाजार की वृद्धि धीमी रही। FY26 में घरेलू यात्रियों की संख्या सालाना आधार पर 1.33 प्रतिशत बढ़कर 16.746 करोड़ रही। अगस्त 2026 में Akasa Air की घरेलू बाजार हिस्सेदारी करीब 5.5 प्रतिशत बताई गई। यात्रियों की संख्या, सीट भराव और खर्चों के बीच संतुलन बनाना कंपनी के लिए अहम रहेगा। विमानन क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़ों के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की वेबसाइट देखी जा सकती है।
अन्य एयरलाइंस भी खर्च के दबाव में
वित्त वर्ष के दौरान बड़ी एयरलाइंस को भी खर्च और कमाई के बीच असंतुलन का सामना करना पड़ा। IndiGo का परिचालन राजस्व 5.1 प्रतिशत बढ़कर ₹84,962 करोड़ हुआ, लेकिन खर्च 17.2 प्रतिशत बढ़कर ₹89,678 करोड़ पहुंच गया। कंपनी ने ₹2,394 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया।
Air India Group का संयुक्त घाटा भी बढ़कर ₹22,238 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹10,859 करोड़ था। इन आंकड़ों से पता चलता है कि विमानन कंपनियों के लिए तेज विस्तार के साथ लागत नियंत्रित करना और स्थायी मुनाफा हासिल करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. FY26 में Akasa Air का राजस्व कितना रहा?
FY26 में Akasa Air का परिचालन राजस्व 35 प्रतिशत बढ़कर ₹6,168 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने ₹4,583 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था। बेड़े और उड़ानों के नेटवर्क के विस्तार से कमाई बढ़ी, लेकिन बढ़े हुए खर्चों ने मुनाफे को प्रभावित किया।
2. Akasa Air का शुद्ध घाटा कितना बढ़ा?
FY26 में Akasa Air का शुद्ध घाटा 37 प्रतिशत बढ़कर ₹2,716 करोड़ पहुंच गया। कंपनी ने नए विमान जोड़े और परिचालन का विस्तार किया, लेकिन विदेशी मुद्रा नुकसान, रखरखाव खर्च और वित्तीय लागत में तेज वृद्धि के कारण कुल घाटा बढ़ गया।
3. कंपनी के खर्च बढ़ने की मुख्य वजह क्या रही?
विदेशी मुद्रा में बदलाव से हुआ नुकसान, विमान रखरखाव, विमान से जुड़े अन्य खर्च और वित्तीय लागत बढ़ने से कंपनी पर दबाव पड़ा। ईंधन खर्च भी बढ़ा, लेकिन राजस्व में उसका हिस्सा कम हुआ। इसलिए घाटे के पीछे कई लागतों का संयुक्त असर रहा।
4. क्या Akasa Air के परिचालन प्रदर्शन में सुधार हुआ?
कंपनी के अनुसार, FY26 में प्रति इकाई लागत 4 प्रतिशत घटी और दूरी के हिसाब से समायोजित प्रति इकाई राजस्व 10 प्रतिशत बढ़ा। छह महीने तक सकारात्मक EBITDA भी दर्ज हुआ। हालांकि, ये संकेत कुल शुद्ध घाटे के खत्म होने का मतलब नहीं हैं।
5. Akasa Air को मुनाफे में आने के लिए क्या करना होगा?
Akasa Air को विमान और रखरखाव की लागत नियंत्रित करनी होगी, उपलब्ध सीटों का बेहतर उपयोग करना होगा और अपने नेटवर्क का विस्तार टिकाऊ तरीके से करना होगा। विदेशी मुद्रा और ईंधन की लागत में स्थिरता भी मदद कर सकती है, लेकिन मुनाफे तक पहुंचने में समय लग सकता है।
निष्कर्ष
Akasa Air की बढ़ती कमाई उसके विस्तार को दिखाती है, लेकिन बढ़ता घाटा बताता है कि विमानन कारोबार में विकास के साथ लागत नियंत्रण भी जरूरी है। कंपनी को बेहतर सीट भराव, कम परिचालन खर्च और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन के जरिए लंबे समय में मुनाफे की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। विमानन कंपनियों के वित्तीय आंकड़े बदल सकते हैं, इसलिए निर्णय लेने से पहले आधिकारिक दस्तावेज और नवीनतम जानकारी अवश्य जांचें।