Andhra Pradesh Investment: आंध्र प्रदेश की निवेश में बढ़त

भारत में नए निवेश और परियोजनाओं को आकर्षित करने की होड़ में आंध्र प्रदेश की स्थिति मजबूत हुई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, देश में घोषित नई परियोजनाओं में राज्य की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 के करीब 3 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 15 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसी अवधि में कर्नाटक की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई। यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब राज्य निवेश बढ़ाने के लिए नियमों और मंजूरी की प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।

Andhra Pradesh Investment में तेज बढ़ोतरी

IndiaStat और Projects Today के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में देशभर में घोषित नई परियोजनाओं में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 3.01 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 15.36 प्रतिशत हो गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की रैंकिंग नौवें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गई। दूसरी ओर, कर्नाटक की हिस्सेदारी 8.25 प्रतिशत से घटकर 5.67 प्रतिशत रह गई और उसकी रैंकिंग चौथे स्थान से छठे स्थान पर आ गई।

वित्त वर्ष 2024-25 में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 6.95 प्रतिशत थी। अगले वित्त वर्ष में इसमें 8.41 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। कर्नाटक में इसी अवधि के दौरान हिस्सेदारी 8.88 प्रतिशत से घटकर 5.67 प्रतिशत रह गई। ये आंकड़े दोनों राज्यों की स्थिति में आए बदलाव को दिखाते हैं, हालांकि इनसे यह साबित नहीं होता कि इस बदलाव के लिए केवल नियमों में ढील ही जिम्मेदार है।

📈 नई परियोजनाओं में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी

  • वित्त वर्ष 2023-24: 3.01 प्रतिशत
  • वित्त वर्ष 2024-25: 6.95 प्रतिशत
  • वित्त वर्ष 2025-26: 15.36 प्रतिशत
  • राष्ट्रीय रैंकिंग: नौवें स्थान से दूसरे स्थान पर
  • आंकड़ों का स्रोत: IndiaStat और Projects Today

कर्नाटक और दूसरे राज्यों की स्थिति

आंध्र प्रदेश की बढ़ती हिस्सेदारी के बीच कर्नाटक की नई परियोजनाओं में भागीदारी कम हुई है। हालांकि, विदेशी निवेश के मामले में कर्नाटक अब भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आंध्र प्रदेश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की हिस्सेदारी 2023 में 0.29 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 1.03 प्रतिशत हुई। इसके बावजूद देश में आने वाली कुल विदेशी पूंजी का लगभग एक चौथाई हिस्सा 2025 में कर्नाटक की ओर गया।

दूसरे राज्यों की रैंकिंग में भी बदलाव देखने को मिला। महाराष्ट्र वित्त वर्ष 2025-26 में नई परियोजनाओं के लिए देश का सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा और उसकी हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत थी। गुजरात दूसरे स्थान से चौथे स्थान पर आ गया, जबकि राजस्थान आठवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। इससे पता चलता है कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा कई क्षेत्रों में बदल रही है।

नियमों में ढील से निवेश को कैसे मदद मिल सकती है?

राज्यों के बीच निवेश की प्रतिस्पर्धा में नियमों को आसान बनाना एक उपयोगी तरीका माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खास तौर पर उन राज्यों के बीच अधिक दिख सकता है जो एक ही क्षेत्र में मिलते-जुलते निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि इससे देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों की पूरी सूची बदल जाएगी।

जमीन के इस्तेमाल और विकास से जुड़े नियम आसान करना, मंजूरी जल्दी देना और नियामकीय अनुपालन की लागत घटाना निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल बना सकता है। एक अधिकारी ने उदाहरण देते हुए कहा कि बेहतर नियमों के कारण त्रिपुरा, तमिलनाडु या कर्नाटक जैसे बड़े निवेश केंद्रों से आगे नहीं निकल सकता, लेकिन असम और मिजोरम जैसे राज्यों के मुकाबले अपनी स्थिति सुधार सकता है।

🏗️ निवेश बढ़ाने के लिए प्रमुख सुधार

  • जमीन: भूमि उपयोग और विकास से जुड़े नियम आसान करना
  • मंजूरी: अनुमति की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना
  • लागत: नियमों के पालन पर आने वाला खर्च घटाना
  • निर्माण: भवन और औद्योगिक निर्माण से जुड़े नियमों में सुधार
  • उद्देश्य: कारोबार शुरू करने और परियोजनाएं लगाने की प्रक्रिया आसान बनाना

केंद्र सरकार की सुधार योजना

केंद्र सरकार की नियमों में ढील देने की पहल में जमीन के इस्तेमाल, भवन निर्माण और अलग-अलग मंजूरियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर है। सुधारों के पहले चरण में भूमि उपयोग, भवन और निर्माण, श्रम, जरूरी सेवाओं, अनुमतियों और अन्य नियामकीय क्षेत्रों सहित 23 प्राथमिक क्षेत्रों को शामिल किया गया था।

अधिकारी के अनुसार, दूसरे चरण में 2026 के अंत तक पहचाने गए सुधारों में से लगभग 70 प्रतिशत पूरे करने का लक्ष्य है। आवास, खासकर औद्योगिक आवास, इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। राज्यों के स्तर पर इन बदलावों को लागू करने की गति और प्रभाव आने वाले समय में निवेश आकर्षित करने की उनकी क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

इस विषय पर मूल रिपोर्ट Moneycontrol की वेबसाइट पर पढ़ी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. आंध्र प्रदेश में नई परियोजनाओं की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी?

आंध्र प्रदेश की देशभर में घोषित नई परियोजनाओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 3.01 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 15.36 प्रतिशत हो गई। इस अवधि में राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग नौवें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंची।

2. कर्नाटक की नई परियोजनाओं में हिस्सेदारी क्यों चर्चा में है?

कर्नाटक की नई परियोजनाओं में हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 के 8.25 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 5.67 प्रतिशत रह गई। हालांकि, इन आंकड़ों से यह तय नहीं होता कि गिरावट का कारण केवल दूसरे राज्यों के नियमों में बदलाव हैं।

3. आंध्र प्रदेश में विदेशी निवेश की स्थिति क्या है?

आंध्र प्रदेश की विदेशी प्रत्यक्ष निवेश हिस्सेदारी 2023 में 0.29 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 1.03 प्रतिशत हुई। यह बढ़ोतरी है, लेकिन भारत में आने वाले कुल विदेशी निवेश में राज्य की हिस्सेदारी अब भी अपेक्षाकृत छोटी है।

4. राज्य नियमों को आसान करके निवेश कैसे आकर्षित कर सकते हैं?

राज्य जमीन के उपयोग से जुड़े नियम सरल कर सकते हैं, निर्माण और कारोबार की मंजूरी जल्दी दे सकते हैं और नियमों का पालन करने की लागत घटा सकते हैं। इससे निवेशकों के लिए परियोजना शुरू करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

5. केंद्र सरकार के सुधारों का लक्ष्य क्या है?

केंद्र की पहल का उद्देश्य जमीन, भवन निर्माण, श्रम, सेवाओं और अनुमतियों से जुड़े नियमों को सरल बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, दूसरे चरण में 2026 के अंत तक पहचाने गए सुधारों में से लगभग 70 प्रतिशत पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।

निष्कर्ष

आंध्र प्रदेश की नई परियोजनाओं में बढ़ती हिस्सेदारी और कर्नाटक की घटती हिस्सेदारी राज्यों के बीच निवेश प्रतिस्पर्धा में बदलाव दिखाती है। नियम आसान करना मददगार हो सकता है, लेकिन निवेश पर असर जानने के लिए अन्य आर्थिक कारणों और आने वाले आंकड़ों पर भी नजर रखना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और आंकड़ों पर आधारित है। निवेश और नीतिगत फैसले लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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