एशियाई शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियां सुर्खियों में हैं, लेकिन बाजार में निवेश के दूसरे अवसर भी उभर रहे हैं। Reuters के लिए लिखे गए विश्लेषण में Manishi Raychaudhuri ने बताया कि 2026 में एशिया के बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी के साथ वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, औद्योगिक कंपनियां और प्रोसेस इंडस्ट्री भी शामिल हैं। ऐसे क्षेत्रों को रक्षा खर्च, बुनियादी ढांचे की जरूरत और ऊर्जा सुरक्षा की मांग से समर्थन मिल सकता है।
AI के बाहर भी एशियाई बाजार में अवसर
विश्लेषण के अनुसार, 2026 में अब तक एशिया के 15 सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाजार क्षेत्रों में से छह टेक्नोलॉजी से जुड़े थे, जबकि बाकी नौ दूसरे उद्योगों से संबंधित थे। इनमें वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, औद्योगिक कारोबार और प्रोसेस इंडस्ट्री शामिल हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों की वृद्धि का संबंध AI से भी है। उदाहरण के लिए, डेटा सेंटर के लिए बिजली उत्पादन, पावर ग्रिड और औद्योगिक कूलिंग पर निवेश बढ़ रहा है।
इसके बावजूद रक्षा जरूरतें, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतें भी इन उद्योगों को आगे बढ़ाने वाले कारक हैं। यदि AI से जुड़ी कंपनियों के मूल्यांकन या निवेश को लेकर चिंता बढ़ती है, तो एशियाई बाजार में उतार-चढ़ाव हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि क्षेत्र के सभी उद्योग एक साथ कमजोर पड़ जाएंगे।
📌 एशियाई बाजार के प्रमुख निवेश विषय
- रक्षा उद्योग: सैन्य आधुनिकीकरण और बढ़ते रक्षा बजट
- इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, पुल, बंदरगाह, रेलवे और ऊर्जा ग्रिड
- ग्रीन एनर्जी: सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ऑफशोर विंड
- इलेक्ट्रिक वाहन: ऊर्जा सुरक्षा और तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश
- औद्योगिक कंपनियां: बड़े ऑर्डर और सरकारी परियोजनाओं से संभावित मांग
रक्षा खर्च से एशियाई कंपनियों को कैसे मिल सकता है फायदा?
दुनिया के कई देशों में रक्षा खर्च बढ़ाने की योजनाएं चल रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह रुझान तेज हुआ और यूरोप के देशों पर रक्षा क्षमता मजबूत करने का दबाव भी बढ़ा। NATO सदस्यों ने जून 2025 में 2035 तक सालाना रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 5% तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी। विश्लेषण में बताया गया कि 2025 में वैश्विक रक्षा खर्च लगभग 2.4% GDP के बराबर था।
इस माहौल में एशिया की रक्षा कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना हो सकती है। विश्लेषण में Stockholm International Peace Research Institute के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि 2021 से 2025 के दौरान यूरोपीय NATO सदस्यों के हथियार आयात में दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी 8.6% रही। यह इजरायल की 7.7% और फ्रांस की 7.4% हिस्सेदारी से अधिक थी।
कई एशियाई देश अपने यहां रक्षा उपकरण बनाने की क्षमता भी बढ़ाना चाहते हैं। भारत ने 2027 तक रक्षा क्षेत्र में 70% स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखा है। इंडोनेशिया 2030 तक रक्षा उपकरणों में 60% स्थानीय सामग्री और वियतनाम कुछ हथियार प्रणालियों में 2030 तक 50% घरेलू इनपुट का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ये लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे सकते हैं, लेकिन इनकी सफलता वास्तविक उत्पादन, बजट और समयसीमा पर निर्भर करेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की बड़ी जरूरत
रक्षा उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए मजबूत सड़क, पुल, बंदरगाह और रेलवे जरूरी हैं। इसी तरह बिजली ग्रिड, दूरसंचार नेटवर्क और साइबर सुरक्षा पर भी खर्च बढ़ सकता है। विश्लेषण में McKinsey के अनुमान का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार 2040 तक दुनिया को इंफ्रास्ट्रक्चर में 106 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत हो सकती है। इसमें एशिया का हिस्सा करीब 65% बताया गया है।
एशिया में परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी भारी निवेश की जरूरत बताई गई है। Asian Transport Observatory और Asian Development Bank के अनुमानों के अनुसार, 2035 तक क्षेत्र को परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर में सालाना लगभग 2.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की जरूरत हो सकती है। यह 2020 से 2025 के बीच के करीब 800 अरब डॉलर के सालाना औसत से तीन गुने से अधिक है। इस तरह की जरूरतों से निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों को संभावित काम मिल सकता है।
विश्लेषण में Larsen & Toubro, Hanwha Aerospace और China Railway Group जैसी कंपनियों के ऑर्डर बुक का उदाहरण दिया गया है। बड़े ऑर्डर भविष्य की आय के लिए समर्थन दे सकते हैं, लेकिन ऑर्डर का समय पर पूरा होना, लागत नियंत्रण और भुगतान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
🌱 ग्रीन एनर्जी में एशिया की भूमिका
- सौर ऊर्जा: बिजली उत्पादन के वैकल्पिक स्रोतों में विस्तार
- बैटरी स्टोरेज: बिजली को जमा करने और जरूरत पर इस्तेमाल करने की तकनीक
- ऑफशोर विंड: समुद्र में पवन ऊर्जा परियोजनाएं
- इलेक्ट्रिक वाहन: पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटाने का विकल्प
- मुख्य चुनौती: कीमतों की प्रतिस्पर्धा, टैरिफ और मुनाफे पर दबाव
ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों पर नजर
तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने और Strait of Hormuz में व्यवधान जैसी घटनाओं से ऊर्जा सुरक्षा का महत्व बढ़ा है। इससे सरकारों और कंपनियों को सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, समुद्र में पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे विकल्पों में निवेश बढ़ाने की प्रेरणा मिल सकती है। एशिया, खासकर चीन, इन तकनीकों के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है।
हालांकि, इस उद्योग में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव है। अमेरिका और यूरोप के साथ व्यापारिक तनाव तथा ऊंचे टैरिफ भी चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। विश्लेषण में FactSet के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि चीनी EV कंपनियों BYD और Geely की कुल आय में विदेशों से आने वाला हिस्सा क्रमशः 43% और 23% था, जबकि बैटरी निर्माता CATL के लिए यह करीब 34% था। विदेशी बाजारों में मजबूत मौजूदगी और स्थानीय उत्पादन सुविधाएं कुछ कंपनियों को व्यापारिक बाधाओं से निपटने में मदद कर सकती हैं।
इन क्षेत्रों में निवेश के जोखिम भी हैं
AI से जुड़े शेयरों के बजाय रक्षा या भारी उद्योग में निवेश करना जोखिम खत्म नहीं करता। रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के ऑर्डर अक्सर सरकारों पर निर्भर होते हैं। मंजूरी में देरी, परियोजना की लागत बढ़ना या बजट में कटौती कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। ग्रीन एनर्जी में घरेलू बाजार की मूल्य प्रतिस्पर्धा दूसरे देशों में भी फैल सकती है, जिससे मुनाफे में कमी आ सकती है।
इसके अलावा, लंबे समय तक महंगाई और महंगी ऊर्जा के कारण ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं। इससे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं धीमी हो सकती हैं और कंपनियों पर कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ सकता है। यदि AI में बहुत बड़ी गिरावट आती है, तो उसका असर पूरे क्षेत्र के शेयर बाजारों तक भी पहुंच सकता है। इसलिए किसी भी उद्योग को बिना जोखिम वाला विकल्प मानना सही नहीं होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. एशियाई शेयर बाजार में AI के अलावा किन क्षेत्रों पर नजर है?
विश्लेषण के अनुसार, वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक कंपनियां और ग्रीन एनर्जी भी अहम क्षेत्र हैं। इनकी मांग सरकारी खर्च, ऊर्जा सुरक्षा और परिवहन नेटवर्क के विस्तार से बढ़ सकती है। हालांकि, कंपनियों का प्रदर्शन बाजार की स्थिति और उनकी अपनी वित्तीय मजबूती पर निर्भर करेगा।
2. बढ़ता रक्षा खर्च एशियाई कंपनियों को कैसे प्रभावित कर सकता है?
देशों की सैन्य जरूरतें बढ़ने पर हथियार, उपकरण और उनसे जुड़ी सेवाओं के ऑर्डर बढ़ सकते हैं। दक्षिण कोरिया और भारत जैसे देशों में घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाएं भी हैं। फिर भी सरकारी खरीद में देरी, बजट बदलाव और प्रतिस्पर्धा से कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
3. एशिया में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश क्यों बढ़ सकता है?
सड़क, रेलवे, पुल, बंदरगाह, बिजली ग्रिड और संचार नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत बढ़ रही है। रक्षा उपकरणों की ढुलाई और आर्थिक विकास दोनों के लिए ये सुविधाएं जरूरी हैं। निवेश की वास्तविक गति हालांकि सरकारी वित्त, मंजूरी, लागत और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
4. ग्रीन एनर्जी और EV कंपनियों के लिए क्या अवसर हैं?
ऊर्जा सुरक्षा और तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश से सौर ऊर्जा, बैटरी, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ सकती है। एशियाई कंपनियों को इससे कारोबार के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन घरेलू प्रतिस्पर्धा, टैरिफ और विदेशों में उत्पादन की लागत उनके मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।
5. क्या AI शेयरों से दूसरे क्षेत्रों में जाना सुरक्षित है?
नहीं, किसी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में निवेश करने पर जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकारी बजट तथा मंजूरी का जोखिम है, जबकि ग्रीन एनर्जी में मूल्य प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक बाधाएं हो सकती हैं। निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़े, मूल्यांकन और जोखिमों का अध्ययन जरूरी है।
निष्कर्ष
एशियाई बाजार में AI के अलावा रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी लंबी अवधि की मांग के संकेत हैं। लेकिन सरकारी खर्च, ब्याज दरों, व्यापारिक तनाव और प्रतिस्पर्धा से जोखिम बने रहेंगे। निवेशक किसी भी कंपनी का मूल्यांकन करके ही फैसला लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। शेयर बाजार में जोखिम रहता है; निवेश से पहले स्वतंत्र शोध और योग्य सलाहकार की मदद लें।