Bank of Baroda Cyber Security: IT खर्च 10% से अधिक होगा

डिजिटल बैंकिंग के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच ग्राहकों के खाते, भुगतान और निजी जानकारी की सुरक्षा बैंकों के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। इसी विषय पर 1 नवंबर 2026 को Bank of Baroda से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Debadatta Chand के अनुसार, बैंक अपने साइबर सुरक्षा और तकनीकी बचाव पर operating profit का 10 प्रतिशत से अधिक खर्च करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम जुलाई 2026 में सामने आई कर्मचारी ईमेल से जुड़ी सुरक्षा घटना के बाद उठाया गया है। बैंक ने तकनीक, कर्मचारियों की जागरूकता और काम करने की प्रक्रियाओं में सुधार पर ध्यान देने की बात कही है।

Bank of Baroda ने IT खर्च बढ़ाने का फैसला क्यों किया?

Business Standard की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में एक कर्मचारी का ईमेल अकाउंट प्रभावित हुआ था। बैंक प्रबंधन ने इस घटना को चेतावनी के रूप में देखा और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की। Debadatta Chand ने PTI को बताया कि साइबर सुरक्षा पर खर्च operating profit के 10 प्रतिशत से ऊपर जा सकता है। पहले बैंक का तकनीकी खर्च लंबे समय से operating profit के 10 प्रतिशत के भीतर रखा जाता था। अब सुरक्षा की जरूरत के अनुसार इस सीमा से अधिक खर्च करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल नए software खरीदना नहीं, बल्कि बैंक के पूरे डिजिटल सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना है।

बैंक के अनुसार, अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा वित्त वर्ष 2026-27 में किया जाएगा और कुछ खर्च अगले वित्त वर्ष तक जा सकता है। प्रबंधन ने कहा कि खर्च का सही आकार दिसंबर 2026 के बाद अधिक स्पष्ट हो सकता है। इस समय बैंक ने कुल अतिरिक्त राशि का अंतिम आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए 10 प्रतिशत से अधिक खर्च की बात को प्रस्तावित दिशा के रूप में समझना चाहिए, न कि किसी तय अंतिम बजट के रूप में।

सुरक्षा व्यवस्था में कौन से बदलाव होंगे?

बैंक ने बताया कि उसने software versions और आंतरिक प्रक्रियाओं को अपडेट किया है। User access management को मजबूत करना भी योजना का अहम हिस्सा है। इसका मतलब है कि किसी कर्मचारी को बैंक के सिस्टम में प्रवेश देने से पहले एक से अधिक जांच की जा सकती है। यदि किसी कर्मचारी के पास किसी खास काम की अनुमति नहीं है, तो उसे संवेदनशील जानकारी तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए। इस तरह की व्यवस्था से किसी एक ईमेल या पासवर्ड के प्रभावित होने पर पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

Bank of Baroda ने बाहरी सलाहकार की मदद से अपनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का काम भी किया है। इसके अलावा बैंक सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसियों, जिनमें CERT-In भी शामिल है, के साथ काम कर रहा है। साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी टीम की जिम्मेदारी नहीं होती। कर्मचारियों को फर्जी ईमेल, संदिग्ध लिंक, नकली फोन कॉल और पासवर्ड चोरी जैसी गतिविधियों को पहचानना भी सिखाना पड़ता है। इसलिए बैंक ने संगठन के भीतर सुरक्षा संस्कृति बेहतर करने पर भी जोर दिया है।

डिजिटल हमले कई तरीकों से हो सकते हैं। किसी कर्मचारी को नकली ईमेल भेजकर उससे पासवर्ड हासिल करना phishing कहलाता है। किसी कंप्यूटर में नुकसान पहुंचाने वाला software डालकर डेटा चुराने या सिस्टम बंद करने की कोशिश भी की जा सकती है। कभी-कभी हमलावर किसी बाहरी सेवा प्रदाता की कमजोरी का फायदा उठाते हैं। बैंक जैसे संस्थान में एक छोटी चूक भी भुगतान, ग्राहक सेवा और गोपनीय जानकारी को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से सुरक्षा जांच लगातार चलती रहनी चाहिए।

ग्राहकों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है?

ग्राहकों के लिए अधिक सुरक्षा खर्च का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित बनाना है। मजबूत login जांच, बेहतर निगरानी और समय पर software update से अनधिकृत पहुंच की आशंका कम हो सकती है। फिर भी कोई भी बैंक शत-प्रतिशत साइबर जोखिम खत्म करने की गारंटी नहीं दे सकता। ग्राहक को भी अपने स्तर पर सावधानी रखनी चाहिए। OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV और net banking password किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। बैंक कर्मचारी भी फोन पर ये गोपनीय जानकारी नहीं मांगते।

यदि किसी ग्राहक को बैंक के नाम से संदिग्ध संदेश या ईमेल मिलता है, तो उसमें दिए लिंक पर क्लिक करने के बजाय बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप खोलना बेहतर है। अनजान व्यक्ति के कहने पर screen sharing ऐप डाउनलोड न करें और न ही remote access दें। खाते से अनधिकृत पैसा निकलने पर तुरंत बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। शिकायत में समय, लेनदेन की राशि और संदर्भ संख्या सुरक्षित रखना मददगार हो सकता है।

बैंक की सुरक्षा में तकनीकी खर्च के साथ-साथ कर्मचारियों की ट्रेनिंग, जोखिम की जांच, backup व्यवस्था और घटना के बाद तेजी से सेवा बहाल करने की क्षमता भी शामिल होती है। किसी घटना के बाद बैंक को यह समझना होता है कि गलती कहां हुई, कौन-सी अनुमति अनावश्यक थी और कौन-सी जांच पहले होनी चाहिए थी। इसके बाद नियमों को अपडेट करना जरूरी है। यदि ऐसी समीक्षा केवल एक बार की जाए और फिर रोक दी जाए, तो नई तकनीकों के साथ जोखिम दोबारा बढ़ सकता है।

🔐 Bank of Baroda Cyber Security Update

  • रिपोर्ट की तारीख: 1 नवंबर 2026
  • बैंक: Bank of Baroda
  • सुरक्षा खर्च: Operating profit का 10% से अधिक
  • पृष्ठभूमि: जुलाई 2026 में कर्मचारी ईमेल से जुड़ी घटना
  • नए कदम: Software update और मजबूत login checks
  • सहयोग: CERT-In और बाहरी सलाहकार

इस बदलाव का असर बैंकिंग उद्योग के अन्य संस्थानों पर भी पड़ सकता है। जैसे-जैसे मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान बढ़ते हैं, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा में निवेश जरूरी होता जाता है। ग्राहकों का भरोसा केवल ऐप की सुविधा पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि उनका पैसा और डेटा कितनी सावधानी से सुरक्षित रखा जाता है। हालांकि अधिक खर्च का अर्थ अपने आप बेहतर सुरक्षा नहीं है। असली परिणाम इस बात से तय होगा कि बैंक जोखिम को कितनी जल्दी पहचानता है और घटना होने पर कितनी प्रभावी प्रतिक्रिया देता है।

साइबर सुरक्षा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी

ग्राहक साइबर सुरक्षा से जुड़ी सावधानियों के लिए CERT-In की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। बैंक से संबंधित किसी संदेश की पुष्टि केवल आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या शाखा से करें। सुरक्षा घटना के बारे में बैंक ने जो जानकारी सार्वजनिक की है, उसी तक यह रिपोर्ट सीमित है। जांच या आगे की कार्रवाई से जुड़ी नई जानकारी मिलने पर स्थिति बदल सकती है।

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पाठकों के जरूरी सवाल

1. Bank of Baroda साइबर सुरक्षा पर कितना खर्च करेगा?

बैंक के MD और CEO के अनुसार, तकनीकी और साइबर सुरक्षा पर खर्च operating profit के 10 प्रतिशत से अधिक जा सकता है। खर्च का अंतिम आकार दिसंबर 2026 के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।

2. बैंक ने साइबर सुरक्षा खर्च क्यों बढ़ाया है?

जुलाई 2026 में कर्मचारी ईमेल से जुड़ी सुरक्षा घटना के बाद बैंक ने अपनी व्यवस्था की समीक्षा की। अब वह तकनीक, कर्मचारियों की जागरूकता और आंतरिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे रहा है।

3. User access management क्या होता है?

यह ऐसी व्यवस्था है जिसमें तय किया जाता है कि कौन-सा कर्मचारी किस सिस्टम और जानकारी तक पहुंच सकता है। अतिरिक्त login जांच और सीमित अनुमति से अनधिकृत प्रवेश का खतरा कम किया जा सकता है।

4. ग्राहक अपने बैंक खाते को साइबर धोखाधड़ी से कैसे बचाएं?

ग्राहक OTP, UPI PIN, ATM PIN और पासवर्ड किसी से साझा न करें। संदिग्ध लिंक न खोलें, अनजान ऐप डाउनलोड न करें और किसी को मोबाइल का remote access न दें। धोखाधड़ी होने पर तुरंत शिकायत करें।

5. साइबर अपराध की शिकायत कहां करें?

अनधिकृत डिजिटल लेनदेन होने पर तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। लेनदेन का विवरण सुरक्षित रखें।

निष्कर्ष

Bank of Baroda का बढ़ता सुरक्षा निवेश डिजिटल बैंकिंग जोखिम को गंभीरता से लेने का संकेत है। ग्राहकों को भी अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। आने वाले महीनों में सुरक्षा खर्च और उसके वास्तविक परिणाम पर नजर रहेगी।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी है। बैंकिंग या साइबर शिकायत के लिए आधिकारिक बैंक और सरकारी माध्यमों से पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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