भारत ने अमेरिका से मांगी russian oil छूट बढ़ाने की मांग, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा आयात

हालात से परिचित लोगों के अनुसार, भारत ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह रूसी तेल पर अपनी छूट (waiver) को बढ़ा दे, क्योंकि फ़ारसी खाड़ी में लगभग 11 हफ़्तों से चल रहा संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति में बाधा डाल रहा है।

बढ़ती तेल की कीमतों को और ज़्यादा तेल की आपूर्ति से रोकने की कोशिश में, अमेरिका ने सबसे पहले मार्च में मंज़ूरी दी थी और फिर इसे एक ऐसे अधिकार-पत्र के साथ बढ़ाया, जिसकी समय-सीमा 16 मई को समाप्त हो रही है।

Russian oil पर छूट बढ़ाने की भारत की मांग

हालाँकि Russian crude oil पर कोई आम प्रतिबंध नहीं हैं, फिर भी वॉशिंगटन ने पहले नई दिल्ली पर दबाव डाला था कि वह रियायती दरों पर तेल की खरीद कम करे, ताकि यूक्रेन में युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव बनाया जा सके।

चूँकि पश्चिम एशियाई संकट के समाप्त होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, इसलिए नई दिल्ली के अधिकारियों ने वॉशिंगटन को आगाह किया है कि आपूर्ति को ही सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि तेल बाज़ार में और ज़्यादा अस्थिरता के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

🛢️ भारत और रूसी तेल छूट

  • मुख्य मुद्दा: रूसी तेल पर अमेरिकी छूट बढ़ाने की मांग
  • कारण: फ़ारसी खाड़ी में जारी संघर्ष
  • छूट की समय-सीमा: 16 मई
  • भारत की चिंता: ऊर्जा आपूर्ति और बढ़ती कीमतें
  • प्रभाव: तेल बाज़ार में अस्थिरता का खतरा
  • प्राथमिकता: देश में ईंधन की स्थिर आपूर्ति बनाए रखना

ऊर्जा संकट और भारत की बढ़ती चिंता

इन लोगों के अनुसार, इसका असर 1.4 अरब भारतीयों पर भी पड़ता है, जो पहले से ही खाना पकाने वाली गैस की कमी का सामना कर रहे हैं। चूँकि ये बातचीत निजी थी, इसलिए उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया।

ज़्यादा जानकारी के लिए किए गए अनुरोधों का भारत के विदेश मंत्रालय या तेल मंत्रालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भी सवालों वाले ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।

📈 भारत में रूसी तेल आयात की स्थिति

  • मई 2026 आवक: 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन
  • रिकॉर्ड स्तर: अब तक की सबसे ऊँची दैनिक आवक
  • Kpler अनुमान: औसत 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन
  • मुख्य कारण: छूट समाप्त होने से पहले तेज खरीद
  • लाभ: रियायती दरों पर कच्चा तेल
  • जोखिम: वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता

Russian oil आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

जैसे-जैसे तेल रिफाइनरी कंपनियाँ मौजूदा छूट की समय-सीमा समाप्त होने से पहले हर संभव प्रयास कर रही हैं, रूसी तेल का भारतीय आयात ऐतिहासिक दर से बढ़ रहा है।

Kpler के आँकड़ों के अनुसार, इस छूट के परिणामस्वरूप मई महीने में अब तक, पहले से ही जहाज़ों में लदे रूसी तेल की दैनिक आवक (inflows) एक अभूतपूर्व स्तर—2.3 मिलियन बैरल—तक पहुँच गई है। Kpler के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे महीने की औसत आवक भी एक काफ़ी ऊँचे स्तर—1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन—तक पहुँच सकती है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट्स और सूत्रों पर आधारित है। ऊर्जा बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment