Bhubaneswar Declaration: केंद्र सरकार ने देश के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRI) को आधुनिक, मजबूत और शोध आधारित संस्थानों के रूप में विकसित करने के लिए ‘भुवनेश्वर घोषणा’ को अपनाया है। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है।
केंद्र सरकार ने देश के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRI) को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए ‘भुवनेश्वर घोषणा’ (Bhubaneswar Declaration) को अपनाया है। इस घोषणा का उद्देश्य इन संस्थानों को शोध, नवाचार, जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और साक्ष्य आधारित नीतियां तैयार करने वाले प्रमुख संस्थानों के रूप में विकसित करना है। यह फैसला ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन पर लिया गया।
भुवनेश्वर घोषणा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
🌿 भुवनेश्वर घोषणा की मुख्य बातें
- घोषणा: Bhubaneswar Declaration
- उद्देश्य: TRI संस्थानों को मजबूत और आधुनिक बनाना
- फोकस: शोध, नवाचार और नीति निर्माण
- संरक्षण: जनजातीय संस्कृति, भाषा और परंपराएं
- आयोजक: जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार
- स्थान: भुवनेश्वर, ओडिशा
इस कार्यशाला का आयोजन जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार ने संयुक्त रूप से किया था। इसमें देशभर के करीब 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें जनजातीय अनुसंधान संस्थानों, राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, तकनीकी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के विशेषज्ञ शामिल थे। बैठक में जनजातीय समुदायों के विकास के लिए शोध और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
घोषणा में कहा गया है कि जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को राज्यों में जनजातीय मामलों से जुड़े प्रमुख ज्ञान केंद्र और नीति सलाहकार संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही जनजातीय संस्कृति, भाषा, परंपराओं, लोककला और पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
TRI संस्थानों को कैसे किया जाएगा मजबूत?
सरकार ने सुझाव दिया है कि मजबूत TRI संस्थान नए और छोटे संस्थानों का मार्गदर्शन करेंगे। इसके अलावा जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर शोध कार्य किए जाएंगे ताकि उनके निष्कर्ष सीधे सरकारी योजनाओं और नीतियों में उपयोग किए जा सकें। इसके लिए एक राष्ट्रीय शोध एजेंडा और समान शोध मानक भी तैयार किए जाएंगे।
📊 प्रमुख सुधार और भविष्य की योजना
- राष्ट्रीय शोध एजेंडा: समान शोध मानक तैयार होंगे
- तकनीक: AI, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग
- रैंकिंग: TRI संस्थानों की राष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली
- सहयोग: विश्वविद्यालय, उद्योग और शोध संस्थानों के साथ साझेदारी
- लाभ: रोजगार, कौशल विकास और आजीविका के अवसर
- सम्मान: सात उत्कृष्ट TRI संस्थानों को सम्मानित किया गया
आधुनिक तकनीक और युवाओं की भागीदारी पर जोर
घोषणा में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े आंकड़ों को बेहतर तरीके से संग्रहित और विश्लेषित किया जाएगा। साथ ही देशभर के TRI संस्थानों
के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक राष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
जनजातीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, शोधकर्ताओं को प्रशिक्षण देने और विश्वविद्यालयों, उद्योगों तथा अन्य संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार, कौशल विकास और जनजातीय समुदायों की आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे।
किन संस्थानों को किया गया सम्मानित?
कार्यशाला के दौरान बेहतर काम करने वाले सात जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सम्मानित भी किया गया। इनमें छत्तीसगढ़, ओडिशा, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना और झारखंड के संस्थान शामिल हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय का कहना है कि भुवनेश्वर घोषणा के जरिए पहली बार पूरे देश के लिए एक साझा रोडमैप तैयार किया गया है, जिससे आने वाले वर्षों में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को आधुनिक, प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्टों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। समय के साथ नीतियों और सरकारी निर्णयों में बदलाव संभव है।
