Coal India और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) की संयुक्त कंपनी Bharat Coal Gasification and Chemicals Ltd (BCGCL) ने ओडिशा में ₹25,000 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन परियोजना का निर्माण शुरू कर दिया है। कंपनी के अनुसार, अब तक करीब ₹15,000 करोड़ के ठेके दिए जा चुके हैं। इस परियोजना का लक्ष्य हर साल 6.6 लाख टन तकनीकी ग्रेड अमोनियम नाइट्रेट बनाना है।
Coal India-BHEL Project की प्रमुख जानकारी
यह परियोजना ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में विकसित की जा रही है। कोयले को पहले सिंथेसिस गैस में बदला जाएगा और फिर इस गैस से औद्योगिक रसायन तैयार किए जाएंगे। कोयला मंत्रालय के अनुसार, परियोजना को सितंबर 2029 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
BCGCL के प्रबंध निदेशक पीयूष कुमार ने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में Gasification India 2026 कार्यक्रम के दौरान बताया कि निर्माण शुरू हो चुका है और ज्यादातर टेंडर दिए जा चुके हैं।
🏭 परियोजना की लागत और उत्पादन
- कुल लागत: ₹25,000 करोड़
- वार्षिक उत्पादन लक्ष्य: 6.6 लाख टन अमोनियम नाइट्रेट
- निर्माण स्थल: लखनपुर, झारसुगुड़ा, ओडिशा
- लक्ष्य: सितंबर 2029 तक परियोजना चालू करना
- सरकारी सहायता: ₹1,350 करोड़ की वित्तीय मदद
BHEL और L&T को मिले बड़े ठेके
अब तक दिए गए ₹15,000 करोड़ के ठेकों में से ₹10,000 करोड़ के काम BHEL को और ₹5,000 करोड़ के काम Larsen & Toubro (L&T) को मिले हैं। BHEL को कोयला गैसीफिकेशन और सिंथेसिस गैस की सफाई से जुड़े काम सौंपे गए हैं। L&T अमोनिया बनाने और अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन से जुड़े पैकेज संभालेगी।
BCGCL में Coal India की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि BHEL के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। परियोजना के लिए Coal India की सहायक कंपनी Mahanadi Coalfields Limited हर साल लगभग 7.9 लाख टन धुला हुआ कोयला और 11.9 लाख टन वॉशरी रिजेक्ट उपलब्ध कराएगी।
कोयला गैसीफिकेशन तकनीक क्यों अहम है?
कोयला गैसीफिकेशन में कोयले को सिंथेसिस गैस यानी सिंगैस में बदला जाता है। इस गैस का इस्तेमाल रसायन, ईंधन और दूसरे औद्योगिक उत्पाद बनाने में हो सकता है। सरकार घरेलू कोयले से अधिक मूल्य वाले उत्पाद बनाने और कुछ जरूरी वस्तुओं के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है।
यह परियोजना भारत की शुरुआती व्यावसायिक स्तर की पहलों में शामिल है, जिसमें रसायन उत्पादन के लिए देश में विकसित pressurised fluidised bed gasification तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना और सरकारी योजना की अधिक जानकारी के लिए कोयला मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
🌱 भारत को क्या फायदा हो सकता है?
- घरेलू उत्पादन: अमोनियम नाइट्रेट बनाने की क्षमता बढ़ेगी
- आयात में कमी: अमोनिया, यूरिया, मेथनॉल और प्राकृतिक गैस जैसे उत्पादों पर निर्भरता घटाने की कोशिश
- स्थानीय संसाधन: देश में उपलब्ध कोयले का उपयोग रसायन बनाने में
- औद्योगिक अवसर: निर्माण और उत्पादन से जुड़े कामों को बढ़ावा मिल सकता है
- सरकारी लक्ष्य: 2030 तक हर साल 10 करोड़ टन कोयले की गैसीफिकेशन क्षमता विकसित करने की व्यापक योजना
निष्कर्ष
Coal India-BHEL की यह परियोजना घरेलू कोयले से औद्योगिक रसायन बनाने की दिशा में एक बड़ा निवेश है। यदि निर्माण और उत्पादन तय समय पर शुरू होते हैं, तो इससे देश में अमोनियम नाइट्रेट की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Coal India-BHEL परियोजना की कुल लागत कितनी है?
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹25,000 करोड़ है। कंपनी ने अब तक लगभग ₹15,000 करोड़ के ठेके दिए हैं। इनमें BHEL और Larsen & Toubro को अलग-अलग काम सौंपे गए हैं।
2. यह परियोजना कहाँ बनाई जा रही है?
यह परियोजना ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में बनाई जा रही है। इसके लिए कोयला Coal India की सहायक कंपनी Mahanadi Coalfields Limited से उपलब्ध कराया जाएगा।
3. परियोजना में हर साल कितना अमोनियम नाइट्रेट बनेगा?
परियोजना का लक्ष्य हर साल 0.66 मिलियन टन यानी करीब 6.6 लाख टन तकनीकी ग्रेड अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करना है। इसका उत्पादन कोयले से बनी सिंथेसिस गैस के जरिए रासायनिक प्रक्रिया से किया जाएगा।
4. BHEL और L&T को कितने रुपये के ठेके मिले हैं?
अब तक दिए गए ठेकों में BHEL को करीब ₹10,000 करोड़ और L&T को लगभग ₹5,000 करोड़ के काम मिले हैं। BHEL गैसीफिकेशन और गैस शुद्धिकरण संभालेगी, जबकि L&T अमोनिया और अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन से जुड़े काम करेगी।
5. परियोजना कब तक चालू करने का लक्ष्य है?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, परियोजना को सितंबर 2029 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। वास्तविक समय निर्माण की प्रगति, उपकरणों की स्थापना और उत्पादन व्यवस्था पूरी होने पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। परियोजना की लागत, समयसीमा और उत्पादन लक्ष्य में आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार बदलाव संभव है।
