COVID-19 Test Fraud: अमेरिकी लैब मालिक पर $66.2 मिलियन का आरोप

अमेरिका के इलिनॉय राज्य में भारतीय मूल के एक लैब मालिक पर कोविड-19 जांच से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, राजेश “राज” पटेल पर आरोप है कि उनकी लैब ने करीब 3.8 लाख ऐसे COVID-19 टेस्ट के लिए भुगतान मांगा, जो कथित तौर पर किए ही नहीं गए थे। इस मामले में दावा की गई धोखाधड़ी की रकम 66.2 मिलियन डॉलर, यानी रिपोर्ट के अनुसार करीब ₹628.7 करोड़ है। आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।

COVID-19 Test Fraud मामला क्या है?

52 वर्षीय राजेश पटेल, इलिनॉय के शॉम्बर्ग में रहते हैं। उन पर वायर फ्रॉड के पांच आरोप लगाए गए हैं। दोषी ठहराए जाने पर हर आरोप में अधिकतम 20 साल की जेल हो सकती है। यह संभावित सजा है, अंतिम फैसला नहीं। अदालत में अभियोजन पक्ष को आरोपों को साबित करना होगा।

अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, मई 2021 से अप्रैल 2022 के बीच कथित तौर पर लगभग 3.8 लाख फर्जी नेगेटिव टेस्ट नतीजे तैयार किए गए। इन नमूनों को Meridian Medical Staffing Inc. से जुड़ा बताया गया था। इसके बाद बिना बीमा वाले लोगों के लिए बनी संघीय सहायता योजना से भुगतान मांगा गया।

📋 मामले के मुख्य आंकड़े

  • कथित धोखाधड़ी: 66.2 मिलियन डॉलर
  • भारतीय रुपये में: लगभग ₹628.7 करोड़, रिपोर्ट के अनुसार
  • कथित फर्जी टेस्ट: करीब 3.8 लाख
  • सरकारी योजना से मिला भुगतान: लगभग 44.1 मिलियन डॉलर
  • आरोपी: राजेश “राज” पटेल, उम्र 52 वर्ष
  • आरोप: वायर फ्रॉड के पांच मामले

कथित धोखाधड़ी कैसे की गई?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इलिनॉय के हिलसाइड में स्थित क्लिनिकल लैब कोविड-19 महामारी के दौरान PCR जांच करती थी। मार्च 2021 के आसपास लैब ने Meridian Medical Staffing Inc. के साथ समझौता किया था। इस व्यवस्था के तहत लैब ने कथित तौर पर नमूने इकट्ठा करने और मरीजों से जुड़ी जैविक जानकारी देने के लिए कंपनी को बड़ी रकम दी।

अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि बताए गए कई मरीज या तो मौजूद ही नहीं थे या उन्होंने Meridian को कोई नमूना नहीं दिया था। इसके बावजूद लैब ने कथित तौर पर संघीय कार्यक्रम के सामने जांच के दावे जमा किए। अधिकारियों के अनुसार, करीब 66.2 मिलियन डॉलर के दावे किए गए और लगभग 44.1 मिलियन डॉलर का भुगतान मिला। पटेल ने कथित योजना से लगभग 28 मिलियन डॉलर हासिल किए।

यह कार्यक्रम उन लोगों के COVID-19 टेस्ट का खर्च उठाने के लिए बनाया गया था जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं था। इसलिए जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में सार्वजनिक सहायता राशि के कथित गलत इस्तेमाल की जांच की जा रही है।

⚖️ जांच और कानूनी स्थिति

  • संघीय योजना: बिना स्वास्थ्य बीमा वाले लोगों की COVID-19 जांच का खर्च
  • अभियोजन का आरोप: जांच किए बिना नतीजे और भुगतान के दावे
  • FBI का रुख: सरकारी सहायता के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई प्राथमिकता
  • कानूनी स्थिति: आरोप अदालत में अभी साबित नहीं हुए हैं
  • संभावित सजा: दोष सिद्ध होने पर हर आरोप में अधिकतम 20 साल तक

अमेरिकी अधिकारियों ने क्या कहा?

अमेरिकी न्याय विभाग की धोखाधड़ी इकाई के सहायक अटॉर्नी जनरल कॉलिन एम. मैकडोनाल्ड ने कहा कि आरोपी पर वैश्विक संकट का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने और बड़ी संख्या में कोविड टेस्ट के नतीजे गढ़ने का आरोप है। उनके अनुसार, इन कथित नतीजों के आधार पर करदाताओं के पैसे से भुगतान मांगा गया।

FBI शिकागो कार्यालय के प्रभारी विशेष एजेंट रयान व्हेलन ने कहा कि सरकारी सहायता को निजी लाभ के लिए गलत तरीके से हासिल करने वालों को जवाबदेह ठहराना एजेंसी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान सहायता योजनाएं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए बनाई गई थीं और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिलने वाली सरकारी राशि का सही हिसाब देना जरूरी है।

अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 2007 से अब तक संघीय स्वास्थ्य योजनाओं और निजी बीमा कंपनियों से जुड़े कथित फर्जी बिलिंग मामलों में 6,200 से अधिक लोगों पर आरोप लगाए जा चुके हैं। इन मामलों में कथित धोखाधड़ी की कुल रकम 45 अरब डॉलर से अधिक बताई गई है। अधिक जानकारी के लिए अमेरिकी न्याय विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।

इस मामले का महत्व

यह मामला दिखाता है कि महामारी के समय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दी गई सरकारी सहायता की जांच किस तरह की जाती है। हालांकि, आरोप लगना दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत में पेश सबूत ही तय करेंगे कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. राजेश पटेल पर किस मामले में आरोप लगे हैं?

राजेश पटेल पर अमेरिका में वायर फ्रॉड के पांच आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि उनकी लैब ने ऐसे COVID-19 टेस्ट के लिए भुगतान मांगा जो कथित तौर पर किए नहीं गए थे। इन आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।

2. कथित COVID-19 टेस्ट धोखाधड़ी की रकम कितनी है?

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, कथित रूप से 66.2 मिलियन डॉलर के दावे जमा किए गए थे। इनमें से लगभग 44.1 मिलियन डॉलर का भुगतान हुआ। रिपोर्ट में इस कुल दावे की रकम करीब ₹628.7 करोड़ बताई गई है।

3. इस मामले में कितने टेस्ट फर्जी बताए गए हैं?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, लगभग 3.8 लाख टेस्ट नतीजे कथित तौर पर बिना वास्तविक जांच के तैयार किए गए। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ मरीज मौजूद नहीं थे या उन्होंने नमूने नहीं दिए थे। ये दावे अदालत में जांच के अधीन हैं।

4. राजेश पटेल को कितनी सजा हो सकती है?

अगर राजेश पटेल दोषी ठहराए जाते हैं, तो वायर फ्रॉड के प्रत्येक आरोप में अधिकतम 20 साल की जेल हो सकती है। यह अधिकतम संभावित सजा है। वास्तविक सजा, यदि दोष सिद्ध होता है, तो अदालत और लागू कानून पर निर्भर करेगी।

5. अमेरिकी COVID-19 सहायता योजना किसके लिए थी?

यह संघीय कार्यक्रम उन लोगों के COVID-19 टेस्ट का खर्च उठाने के लिए बनाया गया था जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं था। अधिकारियों का आरोप है कि इसी कार्यक्रम से कथित रूप से गलत दावों के जरिए भुगतान हासिल किया गया।

निष्कर्ष

अमेरिका में भारतीय मूल के लैब मालिक पर COVID-19 टेस्ट से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में करोड़ों डॉलर के दावों और लाखों टेस्ट का उल्लेख है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले और पेश किए जाने वाले सबूतों पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत में आरोप साबित न हों।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment