भारत में बीमा नियामक संस्था इरडाई (IRDAI) क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन के नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। इस बीमा का उद्देश्य कर्ज लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर बकाया लोन चुकाने में मदद करना है। बीमा कंपनियों का कहना है कि यह सुविधा खासकर कम आय वाले परिवारों को आर्थिक परेशानी से बचा सकती है।
Credit Life Insurance पर कमीशन घटाने का प्रस्ताव
इरडाई ने प्रस्ताव दिया है कि एक बार में प्रीमियम चुकाने वाली क्रेडिट लाइफ पॉलिसी पर कर्ज देने वाली संस्थाओं को मिलने वाला कमीशन 2% तक सीमित किया जाए। कई साल के लिए ली जाने वाली पॉलिसी पर यह सीमा 2.5% रखने का सुझाव है। नियामक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को लोन के साथ बीमा लेना अनिवार्य करने से भी रोकना चाहता है।
इरडाई के परामर्श पत्र के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में ग्रुप क्रेडिट लाइफ बीमा पर कमीशन करीब 28% तक पहुंच गया था। अन्य भुगतान जोड़ने पर प्रभावी भुगतान लगभग 45% बताया गया। प्रस्ताव का मकसद वितरण लागत कम करना और ग्राहकों को अपनी पसंद की पॉलिसी चुनने की अधिक स्वतंत्रता देना है।
क्रेडिट लाइफ बीमा: मुख्य बातें
- बीमा का उद्देश्य: उधार लेने वाले की मृत्यु पर बकाया लोन चुकाने में मदद
- कमीशन सीमा: एकल प्रीमियम पर 2% का प्रस्ताव
- कई साल की पॉलिसी: 2.5% कमीशन सीमा का प्रस्ताव
- ग्राहक का विकल्प: लोन के साथ बीमा अनिवार्य करने पर रोक का प्रस्ताव
- नियामक: भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI)
बीमा कंपनियां इसे क्यों जरूरी मानती हैं?
HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसी कंपनियों का कहना है कि क्रेडिट लाइफ बीमा कम आय वाले कर्जदारों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षा दे सकता है। यदि कर्ज लेने वाले की मृत्यु हो जाए, तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा राशि से बकाया कर्ज चुकाया जा सकता है। इससे परिवार पर अचानक कर्ज चुकाने का दबाव कम हो सकता है।
ICICI Prudential Life के मुख्य वित्त अधिकारी धीरन सालियन ने कहा कि जिस लोन के पीछे कोई संपत्ति सुरक्षा के रूप में नहीं होती, वहां इस तरह के बीमा की जरूरत अधिक हो सकती है। हालांकि, उन्होंने माना कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती काफी बड़ी है।
कंपनी के निवेशक प्रस्तुतीकरण के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में उसके क्रेडिट लाइफ कारोबार से वार्षिकीकृत प्रीमियम के बराबर राशि 619 करोड़ रुपये रही। यह उसके सुरक्षा बीमा कारोबार के इस माप का 32.5% था। पिछले साल यह आंकड़ा 608 करोड़ रुपये और हिस्सा 37.1% था।
कम प्रीमियम से बढ़ सकती है मांग
Canara HSBC Life के प्रबंध निदेशक अनुज माथुर को उम्मीद है कि कमीशन पर सीमा लगने से प्रीमियम कम हो सकता है और इससे कारोबार की मात्रा बढ़ने में मदद मिल सकती है। कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में उसका क्रेडिट लाइफ कारोबार 35% बढ़ा। HDFC Life ने भी इसी अवधि में इस कारोबार में 19% वृद्धि दर्ज की।
Canara Bank इस बीमा कंपनी के क्रेडिट लाइफ कारोबार का 90% से अधिक हिस्सा उपलब्ध कराता है। कंपनी के अनुसार, बैंक के करीब 43% होम लोन और 72% शिक्षा लोन के साथ यह बीमा जुड़ा हुआ है। हालांकि, लोन लेने वाले को बीमा चुनने का विकल्प देना प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा है।
ग्राहकों और बैंकों पर संभावित असर
- ग्राहक: लोन के साथ बीमा लेने का विकल्प अधिक स्पष्ट हो सकता है
- प्रीमियम: वितरण लागत घटने पर बीमा सस्ता होने की संभावना
- बैंक: कमीशन आय में कमी आ सकती है
- परिवार: पॉलिसी की शर्तें पूरी होने पर बकाया कर्ज से राहत मिल सकती है
- ध्यान दें: कवरेज, अपवाद और भुगतान पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेंगे
कमीशन पर सवाल भी उठे
इरडाई और Tata AIA Life Insurance के पूर्व बोर्ड सदस्य निलेश साठे ने सवाल उठाया कि क्रेडिट लाइफ बीमा बेचने के लिए कर्ज देने वाली संस्था को कमीशन क्यों दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, बीमा से बैंक को यह भरोसा मिलता है कि कर्जदार की मृत्यु होने पर बकाया राशि चुकाने में मदद मिलेगी। बीमा न होने पर बैंक को गिरवी रखी संपत्ति के जरिए वसूली करनी पड़ सकती है, जिसमें समय और खर्च लग सकता है।
23 सितंबर को नियामक ने वितरण लागत और कमीशन घटाने के लिए प्रस्ताव रखे थे। इनमें प्रबंधन खर्च की सीमा सख्त करना, उत्पाद के हिसाब से कमीशन तय करना और बैंक या NBFC द्वारा लोन के साथ बीमा को अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक शामिल है। बीमा एजेंटों और ब्रोकरों ने आशंका जताई है कि नए नियमों से उनके कारोबार और रोजगार पर असर पड़ सकता है। इरडाई के अध्यक्ष अजय सेठ ने कहा है कि प्रस्तावों का उद्देश्य किसी कारोबार मॉडल या बाजार वर्ग को बाधित करना नहीं है।
इस विषय पर मूल रिपोर्ट Mint की वेबसाइट पर पढ़ी जा सकती है।
निष्कर्ष
क्रेडिट लाइफ बीमा कर्जदार के परिवार को मुश्किल समय में राहत दे सकता है, लेकिन लोन के साथ इसे अनिवार्य करना ग्राहकों की पसंद को सीमित कर सकता है। इरडाई का प्रस्ताव कमीशन घटाने और विकल्प बढ़ाने की दिशा में है। अंतिम असर नियमों और पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार और सामान्य जागरूकता के लिए है। बीमा खरीदने से पहले पॉलिसी की शर्तें, अपवाद और प्रीमियम ध्यान से पढ़ें।

