दीपिंदर गोयल अब फूड डिलीवरी कारोबार से आगे बढ़कर हेल्थ टेक और एयरोस्पेस जैसे नए क्षेत्रों में बड़ा दांव लगा रहे हैं। कंपनी की कमान छोड़ने के बाद वह ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य नई तकनीक के जरिए लोगों की जिंदगी और यात्रा के तरीके को बदलना है।
हेल्थ टेक और एयरोस्पेस में दीपिंदर गोयल का नया दांव
दीपिंदर गोयल ने बताया कि उनकी नई हेल्थ टेक पहल के तहत ‘टेंपल’ नाम का एक पहनने योग्य उपकरण विकसित किया जा रहा है। यह डिवाइस माथे के किनारे लगाया जाएगा और शरीर की मेटाबॉलिक स्थिति को रियल टाइम में मापने में सक्षम होगा। उनका कहना है कि इसे अगले छह महीने से एक साल के भीतर बाजार में उतारा जा सकता है। शुरुआती दौर में यह एक वेलनेस डिवाइस के रूप में लॉन्च होगा और इसके पीछे वैज्ञानिक शोध भी पेश किए जाएंगे।
गोयल के अनुसार, यह डिवाइस तनाव, ध्यान, नींद, व्यायाम और शरीर की रिकवरी जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दे सकेगा। उनका दावा है कि यह मौजूदा स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड की तुलना में शरीर की गतिविधियों को अधिक सटीक तरीके से समझने में मदद करेगा। हालांकि इस तकनीक को अभी स्वतंत्र वैज्ञानिकों से पूरी तरह मान्यता मिलना बाकी है और इसे मेडिकल मंजूरी भी नहीं मिली है।
🩺 टेंपल डिवाइस की प्रमुख बातें
- डिवाइस का नाम: टेंपल (Temple)
- उपयोग: शरीर की मेटाबॉलिक स्थिति की रियल टाइम निगरानी
- संभावित लॉन्च: 6 महीने से 1 साल के भीतर
- संभावित कीमत: करीब 1,000 डॉलर
- मुख्य फोकस: तनाव, नींद, रिकवरी और फिटनेस डेटा
उच्च प्रदर्शन करने वाले लोगों पर रहेगा फोकस
उन्होंने बताया कि टेंपल की शुरुआती कीमत करीब 1,000 डॉलर हो सकती है। यह आम ग्राहकों के बजाय खिलाड़ियों, बड़े अधिकारियों, उद्यमियों और उच्च प्रदर्शन करने वाले लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। गोयल का कहना है कि उन्होंने इस उत्पाद को सबसे पहले अपनी जरूरत के लिए बनाया है और कारोबार इसके बाद की बात है।
हेल्थ टेक के अलावा दीपिंदर गोयल एयरोस्पेस क्षेत्र में भी निवेश कर रहे हैं। उन्होंने एलएटी एयरोस्पेस नामक कंपनी में 2 करोड़ डॉलर का व्यक्तिगत निवेश किया है। यह कंपनी कम दूरी में उड़ान भरने और छोटे रनवे पर उतरने वाले कम लागत वाले विमानों का विकास कर रही है। इसका उद्देश्य बड़े शहरों के हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ को कम करना और छोटे शहरों तथा कस्बों को सीधे हवाई सेवा से जोड़ना है।
✈️ एयरोस्पेस प्रोजेक्ट की खास बातें
- कंपनी: एलएटी एयरोस्पेस
- निवेश: 2 करोड़ डॉलर
- उद्देश्य: छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ना
- विमान: 8 सीटों वाले कम दूरी के विमान
- फायदा: बड़े एयरपोर्ट पर निर्भरता कम करना
नई तकनीकों पर लगातार काम करने की सोच
गोयल का मानना है कि आठ सीटों वाले छोटे विमान भारत के कई छोटे एयरस्ट्रिप को जोड़ सकते हैं, जिससे लोगों को बड़े हवाई अड्डों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि यह बेहद कठिन परियोजना है और इसके सफल होने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसमें तकनीक, नियमों और बुनियादी ढांचे जैसी कई बड़ी चुनौतियां हैं।
दीपिंदर गोयल ने यह भी कहा कि उनकी इच्छा है कि ईटर्नल जैसी कंपनियां समय के साथ खुद को लगातार बदलती रहें। उनके अनुसार, किसी भी कंपनी के लिए लगातार नए प्रयोग करना और नई तकनीकों पर काम करना ही लंबे समय तक सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी तकनीकी या निवेश से जुड़ा निर्णय लेने से पहले आधिकारिक जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
