दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन दंपतियों के पहले से दो या उससे अधिक बच्चे हैं, वे सामान्य श्रेणी के बच्चे को गोद लेने के लिए आम तौर पर पात्र नहीं माने जा सकते। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में Adoption Regulations 2022 के नियम लागू होंगे। हालांकि, विशेष जरूरत वाले बच्चों और ऐसे बच्चों के लिए अलग प्रावधान हैं जिन्हें गोद लेने के लिए उपयुक्त परिवार आसानी से नहीं मिलता।
Adoption Rules 2022 में क्या कहा गया?
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने सिंगापुर में रहने वाले भारतीय मूल के एक दंपति की याचिका पर फैसला सुनाया। दंपति के पहले से दो जैविक बेटे थे। उन्होंने Baby K नाम से पहचानी गई एक बच्ची को गोद लेने के लिए मिली रेफरल प्रक्रिया वापस लिए जाने को चुनौती दी थी।
अदालत के अनुसार, Adoption Regulations 2022 के नियम 5(7) के तहत दो या अधिक बच्चों वाले माता-पिता को सामान्य श्रेणी के बच्चे को गोद लेने के लिए विचार में नहीं लिया जा सकता। निर्धारित अपवादों के तहत वे विशेष जरूरत वाले बच्चे या कठिनाई से गोद लिए जाने वाली श्रेणी के बच्चे के लिए विचार किए जा सकते हैं। रिश्तेदार या सौतेले बच्चे से जुड़े कुछ मामलों में अलग नियम लागू हो सकते हैं।
📌 गोद लेने के नियम: मुख्य बातें
- नियम: Adoption Regulations 2022 का नियम 5(7)
- दो या अधिक बच्चे: सामान्य श्रेणी के बच्चे के लिए पात्रता पर रोक
- संभावित अपवाद: विशेष जरूरत वाले या कठिनाई से गोद लिए जाने वाले बच्चे
- फैसला: दिल्ली हाई कोर्ट
- मुख्य संदेश: रेफरल मिलना अपने आप गोद लेने का कानूनी अधिकार नहीं बनाता
अदालत ने रेफरल वापस लेने को सही क्यों माना?
दंपति ने दिसंबर 2020 में अंतरराष्ट्रीय गोद लेने के लिए पंजीकरण कराया था, उस समय उनका एक बच्चा था। मार्च 2022 में उनके दूसरे बच्चे का जन्म हुआ। उनकी होम स्टडी रिपोर्ट दिसंबर 2023 में समाप्त हो गई थी और 2025 में दोबारा मान्य की गई। जनवरी 2026 में CARA ने बच्ची का रेफरल दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने स्वीकार कर लिया।
30 मार्च 2026 को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने रेफरल वापस ले लिया। प्राधिकरण ने नियम 5(7) का हवाला दिया। दंपति ने इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने बच्ची की नई चिकित्सकीय जाँच का निर्देश भी दिया और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर पाया कि बच्ची को न तो विशेष जरूरत वाली श्रेणी में रखा जा सकता है और न ही कठिनाई से गोद लिए जाने वाली श्रेणी में।
रेफरल मिलने से गोद लेने का अधिकार नहीं बनता
अदालत ने कहा कि यदि रेफरल लागू नियमों के विपरीत जारी किया गया हो, तो उसे स्वीकार कर लेने से गोद लेने का पक्का अधिकार नहीं बन जाता। इसी तरह, अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने में देरी को अपने आप मंजूरी नहीं माना जा सकता। किसी प्रशासनिक प्रक्रिया की गलती कानूनी पात्रता की शर्तों को खत्म नहीं करती।
अदालत ने यह भी माना कि बच्चे के सर्वोत्तम हित का सिद्धांत महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका उपयोग गोद लेने के कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। बच्चे को ऐसे परिवार में रखा जाना चाहिए, जहां प्रक्रिया लागू कानून के अनुसार पूरी हो।
⚖️ CARA को अदालत के निर्देश
- पात्रता जाँच: रेफरल जारी करने से पहले माता-पिता की पात्रता की पुष्टि हो
- पोर्टल की समीक्षा: पोर्टल माइग्रेशन से प्रभावित प्रोफाइल का ऑडिट किया जाए
- NOC: निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी की जाए
- सही जानकारी: पोर्टल पर आवेदन की स्थिति और कारण स्पष्ट हों
- जवाबदेही: गलतियों और शिकायतों पर उचित कार्रवाई की जाए
- बच्ची की प्रक्रिया: Baby K को कानून के अनुसार गोद देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फैसला उन परिवारों के लिए अहम है जो पहले से दो या अधिक बच्चों के माता-पिता हैं और किसी बच्चे को गोद लेना चाहते हैं। अदालत ने यह नहीं कहा कि ऐसे माता-पिता हर तरह के गोद लेने से पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। फैसला नियमों के तहत अलग-अलग श्रेणियों की पात्रता और तय अपवादों को स्पष्ट करता है।
यह मामला CARA के लिए भी एक संदेश है कि रेफरल जारी करने से पहले पात्रता की जाँच होनी चाहिए और आवेदन की स्थिति सही रखी जानी चाहिए। गोद लेने की प्रक्रिया और संबंधित नियमों की आधिकारिक जानकारी के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की वेबसाइट देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या दो बच्चों वाले माता-पिता किसी बच्चे को गोद ले सकते हैं?
नियम 5(7) के अनुसार, दो या अधिक बच्चों वाले माता-पिता सामान्य श्रेणी के बच्चे को गोद लेने के लिए आम तौर पर पात्र नहीं होते। हालांकि, वे नियमों में बताई गई शर्तों के अनुसार विशेष जरूरत वाले या कठिनाई से गोद लिए जाने वाले बच्चे के लिए विचार किए जा सकते हैं।
2. Adoption Regulations 2022 का नियम 5(7) क्या बताता है?
यह नियम दो या अधिक बच्चों वाले संभावित दत्तक माता-पिता की पात्रता को सीमित करता है। ऐसे माता-पिता को सामान्य श्रेणी के बच्चे के बजाय कुछ निर्धारित श्रेणियों में विचार किया जा सकता है। रिश्तेदार या सौतेले बच्चे से जुड़े मामलों में अपवाद लागू हो सकते हैं।
3. CARA ने Baby K का रेफरल क्यों वापस लिया?
CARA ने कहा कि दंपति के पहले से दो बच्चे थे और नियम 5(7) के तहत वे सामान्य श्रेणी के बच्चे के लिए पात्र नहीं थे। अदालत ने उपलब्ध सामग्री देखने के बाद बच्ची को विशेष जरूरत या कठिनाई से गोद लिए जाने वाली श्रेणी में नहीं माना।
4. क्या रेफरल स्वीकार करने से बच्चा गोद लेने का अधिकार मिल जाता है?
नहीं। अदालत के अनुसार, रेफरल स्वीकार करना अपने आप में गोद लेने का पक्का कानूनी अधिकार नहीं बनाता, खासकर जब रेफरल पात्रता नियमों के खिलाफ जारी हुआ हो। पूरी प्रक्रिया को संबंधित कानून और नियमों के अनुसार पूरा करना आवश्यक है।
5. दिल्ली हाई कोर्ट ने CARA को क्या निर्देश दिए?
अदालत ने पात्रता की जाँच मजबूत करने, पोर्टल माइग्रेशन से प्रभावित प्रोफाइल का ऑडिट करने, NOC समय पर जारी करने और आवेदन की स्थिति सही रखने को कहा। प्राधिकरण को शिकायतों पर जवाबदेही तय करने और बच्ची की गोद लेने की प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ाने का निर्देश भी दिया गया।
निष्कर्ष
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि गोद लेने की प्रक्रिया में पात्रता के नियमों का पालन जरूरी है। दो या अधिक बच्चों वाले माता-पिता के लिए कुछ श्रेणियों में विकल्प बने रहते हैं, लेकिन रेफरल या प्रशासनिक देरी नियमों का स्थान नहीं ले सकती।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध अदालती रिपोर्ट पर आधारित सामान्य जानकारी है। गोद लेने से जुड़े व्यक्तिगत मामलों में आधिकारिक नियमों और योग्य कानूनी सलाह की जाँच करें।