डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है। जानिए यह साइबर फ्रॉड कैसे होता है, सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं और इससे सुरक्षित रहने के आसान उपाय।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी देश में तेजी से बढ़ रही है और अब यह लोगों की जमा-पूंजी के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। साइबर अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि उनका नाम किसी गंभीर मामले में शामिल है।
डिजिटल अरेस्ट क्या है और ऑनलाइन ठगी कैसे होती है?
इसके बाद वे लोगों पर दबाव बनाकर उनसे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से मई 2026 तक इस तरह की ठगी से देशभर के लोगों को करीब ₹4,057.7 करोड़ का नुकसान हुआ है। इस दौरान लगभग 2,97,727 शिकायतें दर्ज की गईं, जिससे साफ है कि यह धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है।
⚠️ डिजिटल अरेस्ट ठगी: जरूरी तथ्य
- कुल नुकसान: ₹4,057.7 करोड़ (2022–मई 2026)
- कुल शिकायतें: 2,97,727
- सबसे ज्यादा मामले: वर्ष 2024
- 2024 नुकसान: ₹1,935.5 करोड़
- अपराधियों का तरीका: सरकारी अधिकारी बनकर डराना
- मुख्य उद्देश्य: बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करवाना
इस तरह की ठगी में अपराधी अक्सर खुद को सीबीआई, ईडी, आरबीआई, पुलिस या वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताते हैं। वे फोन कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए कहते हैं कि आपके नाम से कोई गैरकानूनी पार्सल पकड़ा गया है या आपका बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी या किसी अन्य अपराध से जुड़ा है। इसके बाद वे गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ित को लंबे समय तक वीडियो कॉल पर बनाए रखते हैं और जांच के नाम पर पैसे किसी दूसरे खाते में भेजने के लिए मजबूर करते हैं। कई लोग डर और घबराहट में उनकी बातों पर भरोसा कर लेते हैं और अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं।
सरकारी आंकड़ों में कितना बड़ा है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड?
सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2024 में इस तरह के सबसे ज्यादा 1,23,672 मामले सामने आए और लोगों को करीब ₹1,935.5 करोड़ का नुकसान हुआ। वहीं, जनवरी से मई 2026 के बीच ही 15,215 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें लगभग ₹481.1 करोड़ की ठगी हुई। यह दिखाता है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों का कहना है कि भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। कोई भी सरकारी विभाग किसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता। इसलिए यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे जमा करने, बैंक खाते की जांच कराने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहता है, तो समझ लें कि यह धोखाधड़ी है।
🛡️ डिजिटल अरेस्ट से बचने के आसान उपाय
- घबराएं नहीं: किसी भी धमकी भरी कॉल पर शांत रहें।
- पैसे ट्रांसफर न करें: किसी अनजान खाते में रकम न भेजें।
- OTP साझा न करें: बैंक या निजी जानकारी किसी को न दें।
- पहचान सत्यापित करें: केवल आधिकारिक माध्यम से जांच करें।
- संदिग्ध कॉल काटें: तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
- याद रखें: भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है।
डिजिटल अरेस्ट ठगी से बचने के जरूरी उपाय
ऐसी ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल से घबराएं नहीं। बिना जांच किए किसी के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें। कभी भी अपना ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड का विवरण, आधार नंबर या अन्य निजी जानकारी किसी अजनबी के साथ साझा न करें। अगर कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताता है, तो उसकी पहचान संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर या वेबसाइट से जरूर जांच लें। यदि कॉल संदिग्ध लगे तो तुरंत फोन काट दें और मामले की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन पर करें।
आज डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ा है। इसलिए हर व्यक्ति को सतर्क रहना चाहिए। किसी भी तरह की धमकी, जल्दबाजी या डराने वाली बातों में आने के बजाय शांत रहें, जानकारी की पुष्टि करें और केवल आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें। थोड़ी सी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी संदिग्ध साइबर घटना की पुष्टि संबंधित सरकारी एजेंसी से अवश्य करें।