सरकार की टैक्स कमाई में बड़ा उछाल, कंपनियों ने बढ़ाया राजस्व

केंद्र सरकार की शुद्ध प्रत्यक्ष कर आय में इस वित्त वर्ष की शुरुआत से अब तक 16.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 13 जुलाई तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस वृद्धि में कॉरपोरेट टैक्स से होने वाली आय का बड़ा योगदान रहा है।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में बढ़ोतरी से सरकार को मिली मजबूती

आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.11 प्रतिशत बढ़कर 7.74 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि करदाताओं को किए गए रिफंड में भी 14.57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा।

कॉरपोरेट टैक्स से मिलने वाली शुद्ध आय में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 2.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, व्यक्तिगत आयकर, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), कंपनियों और अन्य संस्थाओं से मिलने वाले गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 11.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह राशि बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

STT संग्रह में तेज उछाल, शेयर बाजार में बढ़ी भागीदारी

शेयर बाजार से जुड़े सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। STT संग्रह 47.85 प्रतिशत बढ़कर 26,429 करोड़ रुपये हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कारण शेयर बाजार में बढ़ा कारोबार और निवेशकों की अधिक भागीदारी है।

📊 भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह अपडेट

  • शुद्ध प्रत्यक्ष कर: 6.51 लाख करोड़ रुपये
  • वृद्धि दर: 16.4 प्रतिशत
  • कॉरपोरेट टैक्स: करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि
  • कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह: 7.74 लाख करोड़ रुपये
  • STT संग्रह: 26,429 करोड़ रुपये
  • मुख्य कारण: बेहतर अनुपालन, डिजिटल तकनीक और आर्थिक मजबूती

सरकार ने रखा 26.97 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपये रखा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 23.40 लाख करोड़ रुपये था। कर विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती महीनों में हुई यह वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन को दिखाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कॉरपोरेट टैक्स में मजबूत वृद्धि से पता चलता है कि कंपनियों की कमाई पर वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक दबाव का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। साथ ही, टैक्स व्यवस्था में सुधार, डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और बेहतर अनुपालन से भी राजस्व बढ़ाने में मदद मिली है।

भारत-ईयू टेक्सटाइल डायलॉग से बढ़ेगा व्यापार सहयोग

दूसरी ओर, भारत और यूरोपीय संघ के बीच कपड़ा और परिधान उद्योग को लेकर एक नया सहयोग मंच शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को बेहतर तरीके से लागू करने में उद्योगों की मदद करना है।

भारतीय कपड़ा उद्योग संगठन (CITI) और यूरोपीय परिधान एवं कपड़ा महासंघ (EURATEX) ने मिलकर इंडिया-ईयू टेक्सटाइल एंड अपैरल डायलॉग (TAD) की शुरुआत की है। इस मंच के जरिए दोनों क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधि बाजार पहुंच बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और उद्योग की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

🌐 भारत-ईयू कपड़ा व्यापार सहयोग

  • नया मंच: इंडिया-ईयू टेक्सटाइल एंड अपैरल डायलॉग (TAD)
  • संगठन: CITI और EURATEX
  • उद्देश्य: बाजार पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत करना
  • यूरोपीय बाजार: भारत के कपड़ा निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा
  • FTA लाभ: भारतीय निर्यातकों को बेहतर प्रतिस्पर्धा का अवसर

भारत के कपड़ा निर्यात को मिल सकती है नई गति

यूरोपीय संघ लंबे समय से भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात का एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है। साल 2025 में भारत से यूरोपीय संघ को कपड़ा और परिधान निर्यात करीब 7.6 अरब डॉलर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को फायदा मिल सकता है और उन्हें वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक आंकड़ों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है, निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment