उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता को हमेशा पूरे समय किसी व्यक्ति की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने, दवाइयों का ध्यान रखने, सामान लाने या समय-समय पर उनका हाल जानने जैसी छोटी मदद ही काफी होती है। वहीं गिरने, ऑपरेशन या किसी गंभीर बीमारी के बाद उन्हें ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। खासकर उन बच्चों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है जो दूसरे शहर या देश में रहते हैं। इसलिए किसी सेवा को चुनने से पहले यह समझना जरूरी है कि माता-पिता को वास्तव में किस तरह की मदद चाहिए।
माता-पिता की जरूरत के अनुसार देखभाल सेवा चुनें
सबसे पहले माता-पिता की रोजमर्रा की स्थिति को समझें। देखें कि क्या वे खुद नहा और कपड़े पहन सकते हैं, खाना बना सकते हैं, सही समय पर दवाइयां ले सकते हैं और घर में सुरक्षित तरीके से चल सकते हैं। क्या उन्हें डॉक्टर की जांच के लिए किसी के साथ जाने की जरूरत पड़ती है? अगर वे ज्यादातर काम खुद कर लेते हैं तो समय-समय पर मिलने वाला व्यक्ति, घरेलू काम में मदद और आपात स्थिति में सहायता पर्याप्त हो सकती है। ऑपरेशन के बाद ठीक हो रहे व्यक्ति को कुछ सप्ताह के लिए देखभाल करने वाले व्यक्ति की जरूरत पड़ सकती है, जबकि गंभीर चिकित्सा समस्या वाले बुजुर्ग को प्रशिक्षित नर्स की आवश्यकता हो सकती है।
देखभाल करने वाले सहायक और नर्स की जिम्मेदारी एक जैसी नहीं होती। सहायक नहाने, खाना खाने, चलने, शौचालय जाने और घर में आने-जाने जैसे रोज के कामों में मदद कर सकता है। लेकिन घाव की देखभाल, इंजेक्शन, स्वास्थ्य की निगरानी या डॉक्टर द्वारा बताई गई चिकित्सा प्रक्रिया के लिए योग्य नर्स की जरूरत होती है। अगर माता-पिता को केवल साथ और रोजमर्रा की मदद चाहिए तो जरूरत से ज्यादा महंगी सेवा लेना सही नहीं होगा। दूसरी ओर बिना चिकित्सा योग्यता वाले सहायक से नर्सिंग का काम करवाना जोखिम भरा हो सकता है।
सही देखभाल सेवा की पहचान
- जरूरत समझें: माता-पिता को रोजमर्रा की मदद चाहिए या चिकित्सा देखभाल।
- योग्यता देखें: नर्सिंग कार्य के लिए योग्य और अनुभवी व्यक्ति चुनें।
- व्यवहार पर ध्यान दें: धैर्य और सम्मान से व्यवहार करने वाला व्यक्ति बेहतर विकल्प हो सकता है।
सेवा लेने से पहले खर्च और सुविधाओं की जांच करें
इस तरह की सेवा का खर्च शहर, काम के घंटे, देखभाल करने वाले व्यक्ति की योग्यता और मरीज की जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। बाजार में 12 घंटे के प्रशिक्षित सहायक की मासिक फीस लगभग 12,000 से 22,000 रुपये तक बताई जाती है। घर में रहकर पूरे समय मदद करने वाले सहायक का खर्च करीब 18,000 से 35,000 रुपये या इससे ज्यादा हो सकता है। प्रशिक्षित नर्स की सेवा आमतौर पर इससे महंगी होती है। कुछ संस्थाएं स्वास्थ्य जांच, डॉक्टर के पास ले जाना, आपातकालीन सहायता और साथ देने जैसी सुविधाओं के लिए मासिक योजना भी देती हैं। किसी भी सेवा को लेने से पहले लिखित रूप में पूछें कि फीस में कौन-कौन सी सुविधाएं शामिल हैं।
केवल कंपनी का नाम देखकर फैसला न करें। जिस व्यक्ति को माता-पिता के घर भेजा जाएगा, उसके बारे में भी जानकारी लेना जरूरी है। पूछें कि उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जांच हुई है या नहीं। अगर वह नर्स है तो उसकी योग्यता और अनुभव के बारे में जानकारी लें। अगर माता-पिता को याददाश्त की समस्या, चलने में परेशानी या किसी बीमारी से ठीक होने के दौरान विशेष मदद चाहिए तो यह भी पता करें कि देखभाल करने वाले व्यक्ति को ऐसी स्थिति का अनुभव है या नहीं। साथ ही यह जरूर पूछें कि नियमित सहायक छुट्टी पर चला जाए या अचानक काम छोड़ दे तो उसकी जगह कौन आएगा।
देखभाल करने वाले व्यक्ति की जांच क्यों जरूरी है
आपात स्थिति की पूरी जानकारी पहले से लेना बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता रात में गिर जाएं तो कौन उनकी मदद करेगा, एंबुलेंस कौन बुलाएगा, उन्हें किस अस्पताल ले जाया जाएगा और परिवार को कब सूचना दी जाएगी, इन सभी बातों का स्पष्ट जवाब होना चाहिए। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि आपात स्थिति को संभाल लिया जाएगा। घर में माता-पिता की मेडिकल रिपोर्ट, दवाइयों की सूची, डॉक्टर के नंबर, बीमा की जानकारी और जरूरी संपर्क नंबर आसानी से मिलने वाली जगह पर रखें।
आपात स्थिति के लिए पहले से तैयारी
- जरूरी नंबर: डॉक्टर, अस्पताल और परिवार के संपर्क नंबर तैयार रखें।
- मेडिकल जानकारी: दवाइयों और मेडिकल रिपोर्ट को आसानी से मिलने वाली जगह पर रखें।
- वैकल्पिक सहायता: नियमित सहायक उपलब्ध न हो तो दूसरी व्यवस्था पहले से तय रखें।
माता-पिता की पसंद और सहजता को महत्व दें
सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता खुद उस व्यक्ति के साथ सहज महसूस करें। अच्छी योग्यता होने के बावजूद कोई व्यक्ति उनके लिए सही साबित नहीं हो सकता। व्यवहार, भाषा, धैर्य और निजी जीवन का सम्मान भी बहुत मायने रखता है। संभव हो तो माता-पिता को भी देखभाल करने वाले व्यक्ति को चुनने की प्रक्रिया में शामिल करें। शुरुआती कुछ दिनों के बाद उनसे अलग से पूछें कि उन्हें उस व्यक्ति के साथ कैसा महसूस हो रहा है।
इस व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा भी करनी चाहिए। अगर बच्चे दूर रहते हैं तो यह तय करें कि उन्हें कितनी बार माता-पिता की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। दवाइयों, डॉक्टर की जांच, चलने-फिरने, खाने की आदत और स्वास्थ्य में बदलाव पर ध्यान दें। केवल देखभाल करने वाले व्यक्ति की बात पर निर्भर रहने के बजाय माता-पिता से भी सीधे बात करें। सबसे महंगी सेवा जरूरी नहीं कि सबसे अच्छी हो। सही तरीका यही है कि माता-पिता की वास्तविक जरूरत समझी जाए, उनकी पसंद का ध्यान रखा जाए और आपात स्थिति के लिए भरोसेमंद व्यवस्था के साथ वैकल्पिक सहायता भी तैयार रखी जाए। समय के साथ उनकी जरूरत बदल सकती है, इसलिए देखभाल की व्यवस्था को भी उसी के अनुसार बदला जाना चाहिए।
Disclaimer: देखभाल सेवा चुनने से पहले परिवार अपनी जरूरत, खर्च और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर उचित निर्णय लें।
