फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर, एफिल टॉवर समय से पहले बंद

फ्रांस में भीषण गर्मी: तीसरी हीटवेव से जनजीवन प्रभावित, एफिल टॉवर और लौवर म्यूजियम के समय में बदलाव

फ्रांस में लगातार बढ़ती गर्मी ने आम लोगों, पर्यटकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भीषण गर्मी के कारण पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली उत्पादन और सार्वजनिक जीवन पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

फ्रांस में इस साल मई के बाद तीसरी बार भीषण गर्मी की लहर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज गर्मी को देखते हुए पेरिस के कई मशहूर पर्यटन स्थलों के समय में बदलाव किया गया है। शनिवार और रविवार को एफिल टॉवर को सामान्य समय से पहले शाम 4 बजे बंद करने का फैसला लिया गया। इसी तरह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध संग्रहालयों में शामिल लौवर म्यूजियम भी शुक्रवार से सोमवार तक शाम 4 बजे तक ही खुला रहेगा, जबकि म्यूज़े द’ऑर्से शनिवार से बुधवार तक शाम 5 बजे बंद कर दिया जाएगा। इन कदमों का मकसद पर्यटकों और कर्मचारियों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रखना है।

फ्रांस में हीटवेव का बढ़ता असर

🌡️ फ्रांस हीटवेव: प्रमुख अपडेट

  • हीटवेव: मई के बाद तीसरी भीषण गर्मी
  • एफिल टॉवर: शाम 4 बजे तक बंद
  • लौवर म्यूजियम: शाम 4 बजे तक खुला
  • रेड अलर्ट: 24 इलाके
  • ऑरेंज अलर्ट: 59 इलाके
  • प्रभावित आबादी: लगभग 2.2 करोड़ लोग

फ्रांस के मौसम विभाग ने देश के 24 इलाकों में सबसे ऊंचे स्तर का रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि 59 अन्य इलाकों में ऑरेंज अलर्ट लागू है। करीब 2.2 करोड़ लोग इस भीषण गर्मी की चपेट में हैं। कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना जताई गई है। यह गर्मी ऐसे समय आई है जब बैस्टिल डे की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में लोग यात्रा कर रहे हैं, जिससे सड़क और रेल सेवाओं पर भी दबाव बढ़ गया है।

जंगलों में आग और सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगने वाली अधिकतर आग इंसानी लापरवाही की वजह से होती है और थोड़ी सी गलती भी बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। आग के बढ़ते खतरे को देखते हुए कई शहरों में बैस्टिल डे के आतिशबाजी कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं। इस साल अब तक देश में 8,000 से अधिक आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 25,000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन जल चुकी है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग दोगुना है।

⚠️ भीषण गर्मी का स्वास्थ्य और बिजली पर असर

  • अतिरिक्त मौतें: जून में 2,025
  • डूबने से मौत: 131 लोग
  • कूलिंग सेंटर: जरूरतमंदों के लिए शुरू
  • कूलिंग यूनिट: 30 हजार में से 6 हजार स्थापित
  • परमाणु रिएक्टर: कई की क्षमता घटाई गई
  • बिजली: निर्यात जारी, जरूरत पर आयात भी

स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली उत्पादन पर असर

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जून में पड़ी भीषण गर्मी के कारण 2,025 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जबकि मई के आखिर में आई गर्मी की लहर में करीब 300 लोगों की जान गई थी। वहीं 19 जून से शुरू हुई गर्मी के दौरान नदियों, झीलों और समुद्र तटों पर राहत पाने पहुंचे लोगों में डूबने की घटनाएं भी बढ़ीं और अब तक 131 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने बुजुर्गों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए कूलिंग सेंटर खोले हैं। साथ ही अस्पतालों में एयर कंडीशनर लगाने का काम भी तेज किया गया है। अब तक 30 हजार में से लगभग 6 हजार कूलिंग यूनिट लगाई जा चुकी हैं।

भीषण गर्मी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बिजली कंपनी ईडीएफ को ऊंचे नदी तापमान के कारण कई परमाणु रिएक्टरों का उत्पादन कम करना पड़ा। कुछ रिएक्टरों को अस्थायी रूप से बंद भी किया गया है, जबकि कुछ कम क्षमता पर चल रहे हैं। इसके बावजूद फ्रांस अभी भी इटली, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड जैसे देशों को बिजली निर्यात कर रहा है, हालांकि जरूरत पड़ने पर बेल्जियम, जर्मनी और स्पेन से बिजली भी आयात की जा रही है।


Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आधिकारिक और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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