घरेलू प्राकृतिक गैस क्षेत्र की कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की कम आपूर्ति और गैस खरीद की बढ़ती लागत के कारण कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कारणों का असर खास तौर पर गैस ट्रांसमिशन, एलएनजी प्रोसेसिंग और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के तिमाही नतीजों में दिखाई दे सकता है।
प्राकृतिक गैस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के लिए पहली तिमाही आसान नहीं रहने वाली है। गैस की कम आपूर्ति, बढ़ती खरीद लागत और पश्चिम एशिया के तनाव का असर कंपनियों की आय और मुनाफे पर देखने को मिल सकता है।
प्राकृतिक गैस कंपनियों पर क्यों बढ़ा दबाव?
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के शुरुआती दो महीनों में देश की प्राकृतिक गैस खपत सालाना आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक घटकर करीब 170 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) रह गई। घरेलू गैस उत्पादन में कमी और एलएनजी आयात घटने से आपूर्ति प्रभावित हुई। कतर के एक बड़े एलएनजी संयंत्र के बंद होने से भारत के आयात पर असर पड़ा, जिसके बाद कुछ गैस स्पॉट मार्केट से ऊंचे दामों पर खरीदनी पड़ी।
⛽ प्राकृतिक गैस सेक्टर की प्रमुख बातें
- मुख्य चुनौती: एलएनजी की कम आपूर्ति
- प्राकृतिक गैस खपत: करीब 170 MMSCMD
- सालाना गिरावट: 10% से अधिक
- मुख्य वजह: पश्चिम एशिया तनाव और महंगी गैस खरीद
- प्रभाव: गैस ट्रांसमिशन, LNG और CGD कंपनियां
- निवेशकों की नजर: गैस कीमत और आपूर्ति
इसका असर गैस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों पर पड़ने की उम्मीद है। विश्लेषकों के मुताबिक, गैस ट्रांसमिशन कंपनी GAIL की पहली तिमाही की परिचालन आय (EBITDA) में सालाना आधार पर लगभग 25 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। हालांकि सरकार के निर्देश पर एलपीजी उत्पादन बढ़ने और एलपीजी की कीमतों में सुधार से कंपनी को कुछ राहत मिल सकती है।
एलएनजी आयात और प्रोसेसिंग करने वाली Petronet LNG की कमाई पर भी दबाव रहने का अनुमान है। दहेज और कोच्चि टर्मिनलों पर कम प्रोसेसिंग वॉल्यूम के कारण कंपनी की EBITDA में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। भविष्य में ऐसी बाधाओं से बचने के लिए कंपनी नए एलएनजी स्टोरेज टैंक बनाने में निवेश कर रही है, जिससे आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
किन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर?
📊 प्रमुख कंपनियों का अनुमान
| कंपनी | अनुमानित असर |
|---|---|
| GAIL | EBITDA में लगभग 25% गिरावट |
| Petronet LNG | EBITDA में लगभग 10% गिरावट |
| MGL | EBITDA में लगभग 48% गिरावट |
| IGL | EBITDA में लगभग 28% गिरावट |
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों जैसे इंद्रप्रस्थ गैस (IGL) और महानगर गैस (MGL) की बिक्री में बढ़ोतरी की संभावना है, लेकिन गैस खरीद महंगी होने और रुपये की कमजोरी के कारण उनके मुनाफे पर दबाव रह सकता है। अनुमान है कि MGL की EBITDA में लगभग 48 प्रतिशत और IGL की EBITDA में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
आगे प्राकृतिक गैस सेक्टर का आउटलुक
हालांकि लंबी अवधि के नजरिए से इस क्षेत्र की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं। घरेलू रसोई में एलपीजी की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का बढ़ता उपयोग, वाहनों में सीएनजी की मांग और उद्योगों द्वारा स्वच्छ ईंधन अपनाने की वजह से प्राकृतिक गैस की खपत लगातार बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही गैस आपूर्ति सामान्य होगी, इस क्षेत्र की कंपनियों की आय और मुनाफे में भी सुधार देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर अब गैस की कीमतों और एलएनजी आपूर्ति की स्थिति पर बनी रहेगी, क्योंकि यही आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

