Gold Consumer Survey: भारतीय खरीदार अब कैसे चुन रहे गहने?

भारत में सोना खरीदने का तरीका बदल रहा है। ऊंची कीमतों के बावजूद कई परिवार गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, लेकिन अब वे बजट, शुद्धता, वजन और पुराने गहनों के उपयोग पर पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और कांतर के नए उपभोक्ता सर्वे में यह बदलाव साफ दिखाई देता है। सर्वे के अनुसार अगले तीन महीनों में गहनों की खरीद बढ़ाने की सोच रखने वाले लोगों का हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर ग्राहक ज्यादा सोना खरीदेगा। इसका संकेत यह है कि लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी का तरीका बदल रहे हैं।

सर्वे में खरीदारी की इच्छा क्यों बढ़ी?

यह सर्वे 4 से 18 सितंबर 2026 के बीच 12 बड़े और टियर-1 शहरों के 1,957 लोगों के बीच किया गया था। इसके नतीजों की तुलना मई और जून में किए गए पहले सर्वे से की गई। पहली रिपोर्ट में 51 प्रतिशत लोगों ने अगले तीन महीनों में गहनों की खरीद घटाने की बात कही थी। नए सर्वे में यह हिस्सा घटकर 40 प्रतिशत रह गया। वहीं खरीद बढ़ाने की इच्छा 20 प्रतिशत से 29 प्रतिशत हुई। इससे पता चलता है कि बाजार में सावधानी बनी हुई है, लेकिन खरीदारी को लेकर डर कुछ कम हुआ है।

सोने की कीमतों में हाल की नरमी, त्योहारों का समय और शादी-ब्याह की जरूरतें इस बदलाव के पीछे हो सकती हैं। भारत में गहने केवल निवेश नहीं, बल्कि पारिवारिक परंपरा, शादी, उपहार और सामाजिक अवसरों से भी जुड़े हैं। इसलिए कीमत ऊंची होने पर भी लोग पूरी तरह खरीदारी बंद नहीं करते। वे छोटे वजन, हल्के डिजाइन या सीमित बजट वाले विकल्प चुनते हैं।

कम कैरेट और हल्के गहनों की ओर रुझान

सर्वे का एक अहम नतीजा यह है कि खरीदारी के तरीके में बदलाव करने वाले या उसी तरीके को जारी रखने वाले 77 प्रतिशत लोगों ने कम शुद्धता या कम कैरेट वाले गहने चुनने की संभावना जताई। पिछली बार यह आंकड़ा 72 प्रतिशत था। इसका मतलब है कि ग्राहक अपनी जेब पर बोझ कम रखने के लिए 22 कैरेट के बजाय 18 कैरेट जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि हर डिजाइन और उपयोग के लिए कैरेट का चुनाव अलग हो सकता है। रोज पहनने वाले गहने और शादी में रखे जाने वाले पारंपरिक गहने खरीदने का उद्देश्य एक जैसा नहीं होता।

कम कैरेट का गहना खरीदने से पहले ग्राहक को हॉलमार्क, कैरेट, वजन और बिल की जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। केवल कम कीमत देखकर खरीदना सही नहीं है। अलग-अलग कैरेट में शुद्ध सोने की मात्रा अलग होती है। गहने का कुल वजन और उसमें लगे पत्थरों का वजन भी बिल में स्पष्ट होना चाहिए। ग्राहक को यह भी पूछना चाहिए कि वापसी या बदलने पर दुकान किस आधार पर मूल्य तय करेगी। हल्के गहनों का चलन भी बढ़ सकता है। रोज पहनने वाली चेन, छोटी बालियां, अंगूठी और हल्के पेंडेंट ऐसे विकल्प हैं जिनमें ग्राहक सीमित बजट में डिजाइन चुन सकते हैं। लेकिन हल्के गहने खरीदते समय मजबूती, जोड़ और ताले की गुणवत्ता देखना जरूरी है।

पुराने गहनों से नई खरीदारी का रास्ता

सर्वे में पुराने गहनों को बदलकर नए गहने खरीदने पर विचार करने वाले लोगों का हिस्सा 70 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया। यह बदलाव बताता है कि परिवार घर में रखे पुराने आभूषणों को नई जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना चाहते हैं। शादी, त्योहार या पारिवारिक कार्यक्रम के लिए नया डिजाइन लेने में पुराने सोने का मूल्य मदद कर सकता है। लेकिन ग्राहक को पुराने गहने की शुद्धता की जांच अपने सामने करवानी चाहिए। तौल में पत्थर, मोती या धागे का वजन अलग किया गया है या नहीं, यह पूछें। दुकान द्वारा काटे जाने वाले गलाने या जांच शुल्क की जानकारी लें। नए गहने का वजन, कैरेट, बनाने का शुल्क और कर अलग-अलग बिल में दर्ज होने चाहिए।

पुराने गहने का भाव केवल उसके पुराने खरीद बिल से तय नहीं होता। वर्तमान सोने का भाव, शुद्धता, वास्तविक सोने का वजन और दुकान की कटौती अहम होती है। ग्राहक को जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए। अलग-अलग दुकानों से मूल्यांकन कराने पर बेहतर तुलना हो सकती है। यदि गहने का भाव कम बताया जा रहा है, तो उसका कारण पूछना चाहिए। ग्राहक को यह भी समझना चाहिए कि पुराने गहने को बदलना और उसे नकद बेच देना दो अलग लेनदेन हो सकते हैं। दोनों में मिलने वाला मूल्य अलग हो सकता है।

त्योहार और शादी खरीदारी को दिशा दे रहे हैं

सर्वे के अनुसार अगली गहना खरीद में शादी का हिस्सा 22 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हुआ। त्योहार और शुभ अवसरों का हिस्सा 16 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत पहुंचा। इससे स्पष्ट है कि खरीदारी अब खास तारीखों और पारिवारिक आयोजनों के आसपास अधिक केंद्रित हो रही है। कुछ ग्राहक सामान्य दिनों में खरीद टालकर धनतेरस, दिवाली या शादी के समय खरीदना पसंद करते हैं। सर्वे में 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे त्योहार, शुभ दिन या विशेष छूट के दौरान खरीदारी सीमित रखना चाहते हैं। पिछली बार यह हिस्सा 33 प्रतिशत था।

इसका अर्थ है कि ग्राहक ऑफर और अवसर देखकर फैसला करना चाहते हैं। दुकानदारों के लिए यह अच्छी बात हो सकती है, लेकिन खरीदारों को छूट की शर्तें और वास्तविक अंतिम बिल देखना चाहिए। सर्वे में अगले तीन महीनों में कीमत बढ़ने की उम्मीद रखने वाले लोगों का हिस्सा 69 प्रतिशत से घटकर 61 प्रतिशत हुआ। यह बाजार की सोच में बदलाव है, भविष्य की कीमत का पक्का संकेत नहीं। सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों और रुपये की चाल से बदलती है।

खरीदारों और ज्वेलर्स के लिए क्या मायने?

नए आंकड़े बताते हैं कि सोने की खरीदारी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। ग्राहक खरीदना चाहते हैं, लेकिन वे अपने बजट के अनुसार वजन, कैरेट और पुराने गहनों के उपयोग पर विचार कर रहे हैं। इसलिए दुकानदारों को भी हल्के डिजाइन, स्पष्ट बिल और पुराने सोने के सही मूल्यांकन पर ध्यान देना होगा। परिवारों के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि खरीदारी से पहले कुल बजट तय करें। केवल गहने के डिजाइन पर नहीं, बल्कि शुद्धता, बनाने का शुल्क, कर और वापसी नीति पर भी ध्यान दें।

यदि खरीद निवेश के लिए है, तो गहने के बजाय सिक्के या अन्य विकल्पों की लागत और बेचने की शर्तों की तुलना करें। गहने का भाव और निवेश का लाभ एक ही बात नहीं है। सोने के गहने पहनने, उपहार देने और पारिवारिक परंपरा निभाने के काम आते हैं, जबकि निवेश के लिए खरीदते समय खरीद और बिक्री के बीच का अंतर भी देखना चाहिए। वजन जांचने के लिए उपयोगी उपकरण देखना चाहें तो यहां आभूषण तौलने वाला डिजिटल तराजू देखें। खरीदने से पहले उसकी माप क्षमता और सटीकता की जानकारी जरूर पढ़ें।

सर्वे के मुख्य संकेत

  • खरीद बढ़ाने की सोच: 20% से 29%
  • कम कैरेट चुनने पर विचार: 77%
  • पुराने गहने बदलने पर विचार: 70% से 76%
  • शादी से जुड़ी खरीदारी: 22% से 25%

खरीदारी से पहले जरूरी जांच

  • हॉलमार्क और कैरेट की पुष्टि करें
  • पत्थरों का वजन अलग लिखवाएं
  • पुराने सोने की जांच अपने सामने कराएं
  • मेकिंग चार्ज और कर का पूरा बिल लें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. नए सर्वे में गहने खरीदने की इच्छा कितनी बढ़ी?

सितंबर के सर्वे में अगले तीन महीनों में गहनों की खरीद बढ़ाने की इच्छा रखने वाले लोगों का हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़कर 29 प्रतिशत हुआ। यह खरीदारी की योजना का संकेत है, वास्तविक बिक्री का आंकड़ा नहीं।

2. कितने लोग कम कैरेट के गहने चुन सकते हैं?

सर्वे में खरीदारी का तरीका बदलने वाले या उसे जारी रखने वाले 77 प्रतिशत लोगों ने कम शुद्धता या कैरेट वाले गहने चुनने की संभावना बताई। इससे बजट के अनुसार विकल्प चुनने का रुझान सामने आया।

3. पुराने गहने बदलने का चलन क्यों बढ़ रहा है?

पुराने गहनों का मूल्य नई खरीद में उपयोग करने से परिवार को पूरा भुगतान नकद नहीं करना पड़ता। नए डिजाइन की जरूरत पूरी हो सकती है, लेकिन शुद्धता, वजन और दुकान की कटौती पहले जांचना जरूरी है।

4. शादी और त्योहारों का सोने की मांग पर क्या असर है?

शादी और शुभ अवसरों पर गहने खरीदना भारतीय परिवारों की परंपरा है। सर्वे में इन अवसरों का हिस्सा बढ़ा है, इसलिए अंतिम तिमाही में मौसमी मांग को सहारा मिल सकता है।

5. क्या कम कैरेट का सोना खरीदना हमेशा सस्ता पड़ता है?

कम कैरेट में शुद्ध सोने की मात्रा कम होती है, इसलिए कीमत भी अलग हो सकती है। लेकिन डिजाइन, बनाने का शुल्क और पत्थरों की लागत भी बिल बदलते हैं। तुलना पूरी लागत देखकर करें।

निष्कर्ष

नया सर्वे बताता है कि भारतीय ग्राहक सोने से दूरी नहीं बना रहे, बल्कि खरीदारी को बजट के अनुसार ढाल रहे हैं। कम वजन, कम कैरेट और पुराने गहनों का उपयोग बढ़ सकता है। पारदर्शी बिल और शुद्धता की जांच सबसे जरूरी रहेगी।

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। सोने की कीमत और खरीदारी का फैसला करने से पहले आधिकारिक जानकारी और बिल की शर्तें जांचें।

स्रोत: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की भारत-केंद्रित तीसरी तिमाही रिपोर्ट

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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