सोने के बदले लिए जाने वाले कर्ज में पिछले दो वर्षों के दौरान काफी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2024 में गोल्ड लोन का बकाया करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये था, जो जुलाई 2026 तक बढ़कर 5.52 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी इस अवधि में इसमें करीब 4.4 गुना वृद्धि हुई। जुलाई 2025 में यह रकम 2.06 लाख करोड़ रुपये थी। सोने की बढ़ती कीमतों के साथ ऐसे कर्ज को लेकर बदले नियमों ने भी इस वृद्धि में भूमिका निभाई है।
गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव
इस बढ़ोतरी का असर व्यक्तिगत कर्ज के पूरे ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। जुलाई 2024 में कुल पर्सनल लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी केवल 2.2 प्रतिशत थी। एक साल बाद यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई और जुलाई 2026 में यह 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। दूसरी ओर, शिक्षा, कंज्यूमर ड्यूरेबल और क्रेडिट कार्ड से जुड़े कर्ज की संयुक्त हिस्सेदारी जुलाई 2024 के 7.7 प्रतिशत से घटकर जुलाई 2026 में 6.7 प्रतिशत रह गई।
गोल्ड लोन में बढ़ोतरी के प्रमुख आंकड़े
- जुलाई 2024 में बकाया गोल्ड लोन: करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये
- जुलाई 2025 में बकाया: करीब 2.06 लाख करोड़ रुपये
- जुलाई 2026 में बकाया: करीब 5.52 लाख करोड़ रुपये
- जुलाई 2026 में पर्सनल लोन में हिस्सेदारी: 7.7 प्रतिशत
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा गोल्ड लोन
देश में गोल्ड लोन का सबसे बड़ा हिस्सा अभी भी दक्षिण भारत में है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल को मिलाकर जून 2026 तक देश के कुल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा था। इसमें तमिलनाडु करीब 30 प्रतिशत हिस्से के साथ सबसे आगे रहा। आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 15.9 प्रतिशत और कर्नाटक की 10.2 प्रतिशत थी। हालांकि अब दूसरे राज्यों में भी इस तरह के कर्ज की रफ्तार बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी तेज वृद्धि
जून 2026 तक देश के बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की सालाना वृद्धि 122.8 प्रतिशत रही। पश्चिम बंगाल में यह बढ़ोतरी 99.7 प्रतिशत और राजस्थान में 91.2 प्रतिशत दर्ज की गई। गुजरात और तेलंगाना में भी करीब 80.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि सोने के बदले कर्ज लेने का चलन अब केवल दक्षिण भारतीय राज्यों तक सीमित नहीं रह गया है।
RBI के नए नियमों से छोटे कर्ज में बदलाव
नए RBI नियमों ने छोटे कर्ज लेने वालों के लिए भी स्थिति को आसान किया है। नए ढांचे के तहत 2.5 लाख रुपये तक के कर्ज पर गिरवी रखे गए सोने की कीमत का 85 प्रतिशत तक कर्ज दिया जा सकता है। 2.5 लाख से अधिक और 5 लाख रुपये तक के कर्ज के लिए यह सीमा 80 प्रतिशत है। 5 लाख रुपये से अधिक के कर्ज पर सीमा 75 प्रतिशत रखी गई है।
गोल्ड लोन में कर्ज सीमा
- 2.5 लाख रुपये तक: सोने की कीमत का 85 प्रतिशत तक
- 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक: 80 प्रतिशत तक
- 5 लाख रुपये से अधिक: 75 प्रतिशत तक
बैंकों का गोल्ड लोन पर बढ़ता फोकस
बैंकों ने भी इस क्षेत्र पर अपना ध्यान बढ़ाया है। पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधन के अनुसार, पहले बैंक का इस कारोबार में हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा था, लेकिन स्पष्ट नियम आने के बाद गोल्ड लोन को बढ़ावा दिया गया। इसके अलावा सोने की कीमत बढ़ने से लोगों के पास गिरवी रखने के लिए मौजूद संपत्ति का मूल्य भी बढ़ा है। 22 सितंबर को अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव करीब 1,52,511 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
बिना गारंटी वाले कर्ज के मुकाबले गोल्ड लोन
गोल्ड लोन की बढ़ती मांग ऐसे समय में आई है जब कुछ कर्जदाता बिना गारंटी वाले खुदरा कर्ज को लेकर अधिक सावधानी बरत रहे हैं। गोल्ड लोन में बैंक के पास सोना गिरवी रहता है, इसलिए भुगतान न होने की स्थिति में उस संपत्ति को बेचकर बकाया राशि की भरपाई की जा सकती है। जून 2026 के आंकड़ों में 31 से 90 दिनों तक बकाया गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 0.9 प्रतिशत थी, जबकि 91 से 180 दिनों वाले कर्ज की हिस्सेदारी 0.3 प्रतिशत और 180 दिनों से अधिक पुराने बकाये की हिस्सेदारी 0.2 प्रतिशत रही।
5 FAQs
1. जुलाई 2026 में गोल्ड लोन का बकाया कितना था?
जुलाई 2026 में गोल्ड लोन का बकाया करीब 5.52 लाख करोड़ रुपये था। जुलाई 2024 के करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले यह लगभग 4.4 गुना अधिक है।
2. पर्सनल लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी कितनी हो गई?
जुलाई 2026 में कुल पर्सनल लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2024 में यह करीब 2.2 प्रतिशत थी।
3. किस राज्य में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है?
जून 2026 तक तमिलनाडु गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे था। दक्षिण भारत के कई राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक थी।
4. 2.5 लाख रुपये तक के गोल्ड लोन पर कितने प्रतिशत तक कर्ज मिल सकता है?
दिए गए नए ढांचे के अनुसार, 2.5 लाख रुपये तक के गोल्ड लोन में गिरवी रखे गए सोने की कीमत का 85 प्रतिशत तक कर्ज दिया जा सकता है।
5. गोल्ड लोन में सोना गिरवी क्यों रखा जाता है?
गोल्ड लोन एक सुरक्षित कर्ज होता है, जिसमें सोना बैंक या कर्जदाता के पास गिरवी रहता है। भुगतान नहीं होने पर नियमों के अनुसार गिरवी संपत्ति से बकाया राशि की वसूली की जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध आंकड़ों और दिए गए विवरण पर आधारित है। कर्ज लेने से पहले नियम, ब्याज और शर्तों की जांच करें।
