घर खरीदने के बाद यदि बिल्डर की कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली जाए, तो खरीदारों को लंबे समय तक अपने घर का कब्जा और पंजीकरण मिलने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में राहत देने के उद्देश्य से Insolvency and Bankruptcy Board of India यानी IBBI ने रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े दिवालिया समाधान नियमों में बदलाव किए हैं।
30 अक्टूबर 2026 को अधिसूचित और 31 अक्टूबर को सार्वजनिक हुई जानकारी के अनुसार, अब एक ही कंपनी की अलग-अलग आवासीय परियोजनाओं को अलग-अलग आधार पर देखने की व्यवस्था मजबूत की गई है। इससे पूरी तरह तैयार परियोजनाओं को अधूरी परियोजनाओं के कारण अनावश्यक रूप से अटकने से बचाने में मदद मिल सकती है।
IBBI के नए नियमों में क्या बदला?
पहले जब किसी रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ Corporate Insolvency Resolution Process यानी CIRP शुरू होती थी, तो कंपनी की कई परियोजनाएं एक ही प्रक्रिया में आ सकती थीं। इससे ऐसी परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती थीं जिनका निर्माण पूरा हो चुका था या जिनमें खरीदारों को कब्जा देने की स्थिति थी। नए नियमों के तहत अब प्रत्येक परियोजना की स्थिति अलग से समझने और उसके आधार पर समाधान का रास्ता तय करने पर जोर दिया गया है।
Resolution Professional यानी समाधान पेशेवर को कंपनी की हर परियोजना की जानकारी समिति के सामने रखनी होगी। इसमें निर्माण कितना पूरा हुआ, कितने घर बिके, कितने खाली हैं, कब्जा और occupancy की स्थिति क्या है तथा जरूरी मंजूरियां मिली हैं या नहीं, जैसी बातें शामिल होंगी। इससे ऋणदाताओं और घर खरीदारों को वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
IBBI के अनुसार, परियोजना के निर्माण की लागत, बाकी काम, जरूरी धन और संभावित समय का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा। स्वतंत्र विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी और लागत संबंधी जांच कराई जा सकती है। यह जानकारी संभावित खरीदारों या समाधान आवेदकों को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे बिना अधूरी जानकारी के बोली न लगाएं।
तैयार घरों का कब्जा मिलने की प्रक्रिया
नए प्रावधानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार घरों, भूखंडों और इमारतों का कब्जा देने से जुड़ा है। Committee of Creditors यानी CoC खरीदारों के कब्जे और पंजीकरण के अनुरोध पर विचार कर सकती है। अब हर खरीदार के आवेदन पर अलग-अलग नई मंजूरी लेने के बजाय समिति पहले से सैद्धांतिक मंजूरी देने का रास्ता भी अपना सकती है। इसके बाद समाधान पेशेवर पात्र अनुरोधों को तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ा सकता है।
इस व्यवस्था से उन खरीदारों को समय बचाने में मदद मिल सकती है जिनकी इकाई तैयार है और जिनके दस्तावेज पूरे हैं। फिर भी कब्जा अपने आप नहीं मिलेगा। परियोजना की कानूनी स्थिति, भुगतान, आवश्यक मंजूरी, सुरक्षा और अन्य शर्तें देखी जाएंगी। किसी खरीदार को अपने मामले में लागू प्रक्रिया जानने के लिए समाधान पेशेवर और संबंधित प्राधिकरण से लिखित जानकारी लेनी चाहिए।
घर खरीदारों के लिए जरूरी बदलाव
- परियोजना की अलग जांच: हर परियोजना की स्थिति अलग दर्ज होगी
- लागत का आकलन: बचे निर्माण और धन की जरूरत का अनुमान
- कब्जे की प्रक्रिया: CoC सामान्य मंजूरी दे सकती है
- खरीदारों की भागीदारी: उनकी राय बैठक के रिकॉर्ड में आएगी
- समय सीमा: समाधान योजना में परियोजना के अनुसार समय बताया जाएगा
किस परियोजना को दिवालिया प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है?
यदि एक कंपनी के पास कई परियोजनाएं हैं, तो कुछ परियोजनाएं अच्छी स्थिति में हो सकती हैं और कुछ में वित्तीय या निर्माण संबंधी गंभीर परेशानी हो सकती है। नए नियमों के तहत CoC किसी खास परियोजना को CIRP से अलग रखने की सिफारिश कर सकती है। इसके लिए परियोजना की स्थिति, निर्माण, कब्जा, मंजूरी और आर्थिक व्यवहार्यता का विवरण जरूरी होगा। अंतिम निर्णय National Company Law Tribunal यानी NCLT जैसे सक्षम प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में रहेगा।
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में CoC को कम से कम 66 प्रतिशत मतदान हिस्सेदारी के आधार पर कारण दर्ज करते हुए परियोजना को अलग करने की सिफारिश करनी होगी। यह प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि कानून और नियमों के तहत संबंधित परियोजना पात्र है या नहीं। इसलिए हर बिल्डर या हर परियोजना को इस सुविधा का लाभ मिलेगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा।
परियोजना आधारित समाधान से एक अच्छी स्थिति वाली इमारत को किसी दूसरी अधूरी परियोजना की वजह से रोकने का जोखिम कम हो सकता है। इससे खरीदारों, ऋणदाताओं और नए निवेशकों के लिए अलग-अलग परियोजनाओं की स्थिति साफ हो सकती है। हालांकि जमीन के अधिकार, पर्यावरण मंजूरी, स्थानीय निकाय की अनुमति और वित्तीय दावों जैसी जटिलताएं फिर भी बनी रह सकती हैं।
घर खरीदारों की आवाज को अधिक महत्व
नए नियमों में घर खरीदारों के अधिकृत प्रतिनिधियों की भूमिका को भी मजबूत किया गया है। CoC की बैठकों में प्रतिनिधि खरीदारों की चिंताएं और सुझाव रख सकते हैं। इन विचारों को बैठक के विवरण में दर्ज करना होगा। इससे खरीदारों की समस्याएं केवल व्यक्तिगत शिकायतों तक सीमित न रहकर सामूहिक रूप से निर्णय लेने वाली समिति तक पहुंच सकती हैं।
समाधान योजना लागू करने के लिए बनने वाली निगरानी समिति में घर खरीदारों के प्रतिनिधि और संबंधित RERA प्राधिकरण के प्रतिनिधि को शामिल करने की व्यवस्था भी की गई है, यदि संबंधित प्राधिकरण सहमत हो। इसका उद्देश्य निर्माण की प्रगति, मंजूरियों और तय समय सीमा पर नजर रखना है। इससे जवाबदेही बढ़ सकती है, लेकिन निगरानी तभी असरदार होगी जब नियमित रिपोर्टिंग और कार्रवाई भी हो।
समाधान योजना में परियोजना, चरण या tower के हिसाब से निर्माण पूरा करने और कब्जा देने की समय सीमा स्पष्ट होनी चाहिए। इससे खरीदारों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनका घर कब तक तैयार हो सकता है। यदि समय पर काम नहीं होता, तो निगरानी समिति के सामने कारण और प्रगति की जानकारी रखी जा सकती है।
खरीदारों को अभी क्या करना चाहिए?
यदि किसी खरीदार की परियोजना दिवालिया प्रक्रिया में है, तो उसे सबसे पहले परियोजना का नाम, RERA पंजीकरण, भुगतान रसीद, allotment letter, builder-buyer agreement और अन्य जरूरी दस्तावेज एक जगह सुरक्षित रखने चाहिए। भुगतान का पूरा रिकॉर्ड और बिल्डर के साथ हुई लिखित बातचीत भविष्य में उपयोगी हो सकती है। केवल फोन पर मिली जानकारी पर निर्भर न रहें।
खरीदार को यह पता करना चाहिए कि समाधान पेशेवर कौन है, CoC की बैठक कब हुई है और परियोजना की स्थिति पर क्या जानकारी दी गई है। अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए अपनी समस्या और जरूरी दस्तावेज समिति तक पहुंचाने का तरीका समझें। यदि कब्जे या पंजीकरण की मांग है, तो लिखित आवेदन दें और उसकी प्राप्ति सुरक्षित रखें।
किसी भी खरीदार को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि नया नियम पुराने सभी विवादों को तुरंत समाप्त कर देगा। मामला किस चरण में है, परियोजना की मंजूरी और भुगतान की स्थिति क्या है तथा NCLT ने क्या आदेश दिए हैं, इन बातों से परिणाम प्रभावित होगा। जरूरत पड़ने पर दिवालिया कानून और रियल एस्टेट मामलों के जानकार वकील से सलाह लें।
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नियमों का विवरण यहां पढ़ें: Business Standard की रिपोर्ट।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. IBBI ने रियल एस्टेट नियमों में बदलाव क्यों किया?
इन बदलावों का उद्देश्य दिवालिया बिल्डर की अलग-अलग परियोजनाओं को अलग आधार पर समझना, तैयार घरों के कब्जे में देरी घटाना और खरीदारों की भागीदारी बढ़ाना है। इससे समाधान प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बन सकती है।
2. क्या तैयार फ्लैट का कब्जा अब तुरंत मिल जाएगा?
नहीं, कब्जा तुरंत मिलने की गारंटी नहीं है। परियोजना की कानूनी स्थिति, भुगतान, मंजूरियां और CoC की प्रक्रिया देखी जाएगी। नए नियम कुछ पात्र मामलों में मंजूरी की प्रक्रिया सरल कर सकते हैं।
3. क्या एक परियोजना को दिवालिया प्रक्रिया से बाहर रखा जा सकता है?
कुछ परिस्थितियों में CoC परियोजना की स्थिति देखकर उसे प्रक्रिया से अलग रखने की सिफारिश कर सकती है। इसके लिए तय मतदान, लिखित कारण और सक्षम न्यायाधिकरण की मंजूरी जैसी शर्तें लागू होंगी।
4. घर खरीदारों की भूमिका में क्या बदलाव आया है?
खरीदारों के अधिकृत प्रतिनिधियों की राय और चिंताओं को CoC की बैठकों के विवरण में दर्ज किया जाएगा। निगरानी समिति में भी खरीदार प्रतिनिधि और संबंधित RERA प्राधिकरण की भागीदारी संभव बनाई गई है।
5. खरीदार अपने दस्तावेज कैसे तैयार रखें?
खरीदार भुगतान रसीद, समझौता, आवंटन पत्र, RERA विवरण और बिल्डर से हुई लिखित बातचीत सुरक्षित रखें। समाधान पेशेवर से परियोजना की स्थिति पूछें और कब्जे के अनुरोध को लिखित रूप में जमा करें।
निष्कर्ष
IBBI के नए नियम घर खरीदारों को बेहतर जानकारी, भागीदारी और कब्जे की प्रक्रिया में राहत दे सकते हैं। फिर भी हर मामले का परिणाम परियोजना की स्थिति, कानूनी मंजूरी और समाधान योजना पर निर्भर करेगा।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी देता है। किसी कानूनी कदम से पहले अपने दस्तावेजों के साथ योग्य वकील से सलाह अवश्य लें।
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