IDBI Bank Deal: दीपक पारेख और परेश सुतांकर की सलाह लेगी Fairfax

आईडीबीआई बैंक में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी कर रही कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स इस सौदे के लिए एचडीएफसी के पूर्व अध्यक्ष दीपक पारेख और एचडीएफसी बैंक के पूर्व उप प्रबंध निदेशक परेश सुतांकर से सलाह ले रही है। रिपोर्ट के अनुसार, फेयरफैक्स के संस्थापक प्रेम वत्स ने बताया कि कंपनी बैंक के मौजूदा प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश शर्मा को नेतृत्व में बनाए रखने की योजना बना रही है।

फेयरफैक्स आईडीबीआई बैंक की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 53,000 करोड़ रुपये में खरीदने वाली है। इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। यह सौदा पूरा होने पर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक होगा।

सौदे की मुख्य बातें

• प्रस्तावित हिस्सेदारी: 60.72 प्रतिशत

• अनुमानित सौदा मूल्य: करीब 53,000 करोड़ रुपये

• संभावित खरीदार: फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स

• आगे की प्रक्रिया: नियामकीय मंजूरियां और उपयुक्तता जांच

रिपोर्टों के मुताबिक, फेयरफैक्स ने बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन को लेकर भी योजना तैयार की है। मौजूदा प्रमुख राकेश शर्मा के साथ सीएसबी बैंक के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीवीआर राजेंद्रन और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एनएस कन्नन को संभावित नेतृत्व व्यवस्था में शामिल किए जाने की बात कही गई है। एनएस कन्नन को अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी पर निर्भर होगा।

दीपक पारेख कौन हैं?

दीपक पारेख लंबे समय तक एचडीएफसी के अध्यक्ष रहे और भारत के आवास वित्त क्षेत्र के प्रमुख कारोबारी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने 1978 में हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन में सहायक महाप्रबंधक के रूप में काम शुरू किया था। उनके नेतृत्व में एचडीएफसी ने आवास ऋण कारोबार का विस्तार किया और एचडीएफसी बैंक की स्थापना से जुड़े विकास में भी उनकी भूमिका रही।

एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय के बाद पारेख ने जून 2023 में अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। अपने करियर के दौरान वे एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी एर्गो और अन्य कंपनियों के बोर्ड में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनके अनुभव का इस्तेमाल फेयरफैक्स बैंक के अधिग्रहण और आगे की रणनीति पर सलाह लेने के लिए कर सकती है।

परेश सुतांकर का बैंकिंग अनुभव

परेश सुतांकर ने एचडीएफसी बैंक में करीब 24 साल काम किया और अगस्त 2018 में पद से इस्तीफा दिया। वे 1994 में बैंक से जुड़े थे और मार्च 2017 में कार्यकारी निदेशक से पदोन्नत होकर उप प्रबंध निदेशक बने। बैंकिंग क्षेत्र में उन्हें संचालन और नेतृत्व से जुड़े अनुभव के लिए जाना जाता है।

ग्राहकों और निवेशकों के लिए इसका क्या अर्थ है?

नए मालिक और सलाहकारों की नियुक्ति से बैंक की रणनीति, संचालन और प्रबंधन में आगे बदलाव संभव हैं। हालांकि, हिस्सेदारी बिक्री पूरी होने और नई नेतृत्व व्यवस्था लागू होने से पहले जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी है। ग्राहकों की सेवाओं या बैंक की नीतियों में तत्काल बदलाव मान लेना सही नहीं होगा।

आईडीबीआई बैंक की बिक्री प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी। शुरुआती बोलियां सरकार द्वारा तय आरक्षित मूल्य से कम रहने के कारण इस प्रक्रिया में पहले रुकावट आई थी। अब सौदे को भारतीय रिजर्व बैंक की उपयुक्तता जांच, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी की जरूरत होगी। इसलिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी लेनदेन को पूरा होने में समय लग सकता है।

बैंक से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए आईडीबीआई बैंक की वेबसाइट देखी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. फेयरफैक्स आईडीबीआई बैंक में कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी?

फेयरफैक्स सरकार और एलआईसी की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है।

2. इस सौदे की अनुमानित कीमत कितनी है?

प्रस्तावित सौदे का मूल्य करीब 53,000 करोड़ रुपये बताया गया है।

3. दीपक पारेख को सलाहकार के रूप में क्यों जोड़ा जा रहा है?

दीपक पारेख को आवास वित्त और बैंकिंग क्षेत्र में लंबा नेतृत्व अनुभव है। रिपोर्ट के अनुसार, फेयरफैक्स अधिग्रहण के लिए उनकी सलाह ले रही है।

4. परेश सुतांकर कौन हैं?

परेश सुतांकर एचडीएफसी बैंक के पूर्व उप प्रबंध निदेशक हैं। उन्होंने 1994 से 2018 तक बैंक में काम किया था।

5. क्या आईडीबीआई बैंक का सौदा पूरा हो गया है?

नहीं। सौदे के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी अभी जरूरी है।

निष्कर्ष

फेयरफैक्स आईडीबीआई बैंक अधिग्रहण के लिए दीपक पारेख और परेश सुतांकर का अनुभव लेना चाहती है। हालांकि, सौदे और प्रस्तावित नेतृत्व बदलाव अंतिम रूप से लागू होने से पहले नियामकीय मंजूरियां जरूरी हैं।

अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। बैंकिंग और निवेश संबंधी फैसले लेने से पहले आधिकारिक सूचनाओं की जांच करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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