भारत के नारियल रेशे से बने उत्पादों के निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन किया है। भारतीय व्यापार पोर्टल पर 3 नवंबर 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, देश से कोयर और उससे बने उत्पादों का निर्यात बढ़कर 6,614.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा छोटे उद्योगों, ग्रामीण रोजगार और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाने वाले कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। नारियल के छिलके से मिलने वाले रेशे का उपयोग रस्सी, चटाई, गद्दे, बागवानी सामग्री और कई अन्य उत्पाद बनाने में होता है।
निर्यात में कितनी बढ़ोतरी दर्ज हुई
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कोयर और कोयर उत्पादों का निर्यात 4,343.45 करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 6,614.40 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह एक साल में निर्यात मूल्य में लगभग 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि बताती है कि भारतीय उत्पादों की विदेशों में मांग और बिक्री का मूल्य बढ़ा है।
इस क्षेत्र में केवल तैयार चटाइयां या रस्सियां ही नहीं, बल्कि नारियल रेशा, कोयर यार्न और कोयर पीथ जैसे कच्चे तथा अर्ध-तैयार उत्पाद भी शामिल हैं। कोयर पीथ का उपयोग बागवानी और पौधों को उगाने के माध्यम के रूप में किया जाता है। इससे इस उद्योग के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अलग-अलग तरह के अवसर बनते हैं।
भारत के निर्यात बाजार कौन-से हैं
सरकारी जानकारी के अनुसार, अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन भारतीय कोयर उत्पादों के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। अलग-अलग देशों में इन उत्पादों का इस्तेमाल बागवानी, घरों की सजावट, फर्श पर बिछाने वाली सामग्री, पैकिंग और औद्योगिक उपयोग के लिए किया जाता है। पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच प्राकृतिक रेशों से बने उत्पादों की मांग को अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
भारत दुनिया के बड़े कोयर उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। नारियल की खेती वाले राज्यों में इस उद्योग को कच्चा माल मिलता है। नारियल के छिलके को पहले फेंक दिया जाता था या सीमित उपयोग में लाया जाता था, लेकिन अब उससे रेशा निकालकर कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। इससे कृषि से जुड़े अवशेष का उपयोगी सामान में रूपांतरण होता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बनता है।
🥥 कोयर उद्योग के मुख्य आंकड़े
- निर्यात वर्ष: वित्त वर्ष 2025-26
- कुल निर्यात: 6,614.40 करोड़ रुपये
- पिछले वर्ष का निर्यात: 4,343.45 करोड़ रुपये
- सालाना बढ़ोतरी: लगभग 52 प्रतिशत
- प्रमुख बाजार: अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन
- उद्योग की इकाइयां: 21,000 से अधिक
ग्रामीण रोजगार और छोटे उद्योगों के लिए महत्व
कोयर उद्योग की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें गांवों और छोटे कस्बों में काम करने वाले लोगों की भागीदारी रहती है। सरकारी जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में 21 हजार से अधिक इकाइयां हैं और सात लाख से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। इनमें लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं ग्रामीण परिवारों से आती हैं। इसलिए निर्यात में बढ़ोतरी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छोटे उत्पादकों और कामगारों तक भी पहुंच सकता है।
कई छोटे उद्योग नारियल के छिलके से रेशा निकालने, धागा बनाने, चटाई बुनने और बागवानी के लिए सामग्री तैयार करने का काम करते हैं। यदि निर्यात के ऑर्डर बढ़ते हैं तो इन इकाइयों को अधिक उत्पादन की जरूरत पड़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर काम के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसका लाभ तभी टिकाऊ होगा जब छोटे उत्पादकों को उचित भुगतान, समय पर ऑर्डर और जरूरी मशीनों तक पहुंच मिले।
इस उद्योग में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कई स्थानों पर महिलाएं रेशा तैयार करने, धागा बनाने और उत्पादों की बुनाई जैसे काम करती हैं। कौशल प्रशिक्षण, सुरक्षित कार्यस्थल और बेहतर बाजार संपर्क से उनकी आय और काम की स्थिरता को सहारा मिल सकता है। निर्यात बढ़ने के साथ यह जरूरी है कि लाभ उत्पादन श्रृंखला के हर स्तर तक पहुंचे।
प्राकृतिक रेशे से बने उत्पादों की मांग
कोयर एक प्राकृतिक रेशा है जो नारियल के बाहरी कठोर छिलके से प्राप्त होता है। यह टिकाऊ और कई उपयोगों के लिए उपयुक्त सामग्री है। इससे रस्सियां, दरवाजे की चटाइयां, फर्श की चटाइयां, गद्दों में उपयोग होने वाली सामग्री, बागवानी के लिए पीथ ब्लॉक और पौधों के गमलों में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद बनाए जाते हैं। इन उत्पादों का बाजार घरों, बागवानी, निर्माण और कृषि से जुड़ा है।
बागवानी में कोयर पीथ का उपयोग मिट्टी के विकल्प या मिट्टी में मिलाने वाली सामग्री के रूप में किया जाता है। यह पानी को रोकने में मदद कर सकता है और पौधों की जड़ों के आसपास नमी बनाए रखने में उपयोगी होता है। हालांकि, इसे किस पौधे और किस अनुपात में इस्तेमाल करना है, यह खेती या बागवानी की जरूरत पर निर्भर करता है। उत्पाद की गुणवत्ता और प्रसंस्करण भी महत्वपूर्ण हैं।
🌱 उद्योग के प्रमुख उत्पाद और उपयोग
- कोयर रेशा: रस्सी, मैट और औद्योगिक सामग्री
- कोयर यार्न: बुनाई और घरेलू उपयोग के उत्पाद
- कोयर पीथ: पौधों और बागवानी में उपयोग
- चटाइयां: घरों, कार्यालयों और व्यावसायिक स्थानों में उपयोग
- ग्रामीण इकाइयां: स्थानीय उत्पादन और रोजगार का आधार
सरकार की योजनाओं से उद्योग को मदद
केंद्र सरकार का कोयर विकास योजना कार्यक्रम इस क्षेत्र के विकास और उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए चलाया जाता है। इसके अंतर्गत नई तकनीक और मशीनों के उपयोग, कौशल प्रशिक्षण, प्रचार, घरेलू तथा विदेशी बाजारों में बिक्री और व्यापार मेलों में भागीदारी को प्रोत्साहन देने जैसे काम शामिल हैं। निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में हिस्सा लेने में मदद मिल सकती है, जिससे उन्हें नए खरीदारों से संपर्क बनाने का अवसर मिलता है।
छोटी इकाइयों के लिए नई मशीनें खरीदना, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना और बड़े ऑर्डर पूरे करना चुनौती हो सकता है। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से उत्पादन क्षमता बेहतर हो सकती है। इसके अलावा, पैकेजिंग, समय पर शिपमेंट, गुणवत्ता प्रमाणन और विदेशी खरीदारों की जरूरतों को समझना भी जरूरी है। केवल निर्यात के आंकड़े बढ़ना पर्याप्त नहीं है; भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता भी बनी रहनी चाहिए।
निर्यातकों के सामने चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय कारोबार में माल ढुलाई का खर्च, समुद्री परिवहन की उपलब्धता, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और दूसरे देशों के गुणवत्ता मानक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छोटे निर्यातकों को कई बार खरीदारों तक पहुंच बनाने और बड़े ऑर्डर के लिए पूंजी जुटाने में कठिनाई होती है। कच्चे माल की उपलब्धता और उत्पादन की लागत में बदलाव से भी कारोबार प्रभावित हो सकता है।
यदि किसी देश में मांग घटती है या आयात नियम बदलते हैं तो निर्यात पर असर पड़ सकता है। इसलिए भारतीय कंपनियों को कुछ चुनिंदा बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय नए खरीदारों और नए उपयोग क्षेत्रों की तलाश करनी चाहिए। उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और समय पर आपूर्ति पर ध्यान देने से उन्हें लंबे समय तक बाजार में टिकने में मदद मिल सकती है।
सरकारी आंकड़ों के लिए एमएसएमई मंत्रालय के कोयर निर्यात डैशबोर्ड को देखा जा सकता है। घर या बागवानी में नारियल रेशे के उत्पादों का उपयोग जानने के लिए पाठक कोयर से बने बागवानी उत्पाद भी देख सकते हैं।
आगे उद्योग की संभावनाएं
भारत के कोयर उद्योग के सामने निर्यात बढ़ाने का अवसर है। प्राकृतिक रेशों से बने उत्पादों की अलग-अलग बाजारों में मांग, ग्रामीण उत्पादन का आधार और सरकारी सहायता इस क्षेत्र को आगे बढ़ा सकते हैं। लेकिन उद्योग को बेहतर मशीनों, प्रशिक्षित कर्मचारियों, उत्पाद की गुणवत्ता और नए बाजारों पर लगातार काम करना होगा। छोटे उत्पादकों को भी निर्यात श्रृंखला से जोड़ना जरूरी है।
आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्यात की बढ़ोतरी कितनी स्थायी रहती है और क्या इसका लाभ ग्रामीण इकाइयों तक पहुंचता है। यदि उद्योग नए उत्पाद विकसित करता है और खरीदारों की जरूरतों के अनुसार गुणवत्ता बनाए रखता है तो भारत अपनी मजबूत स्थिति को और बेहतर कर सकता है। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन और कामगारों की आय को भी प्राथमिकता देनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. वित्त वर्ष 2025-26 में कोयर उत्पादों का निर्यात कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कोयर और उससे बने उत्पादों का निर्यात 6,614.40 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष में यह 4,343.45 करोड़ रुपये था। इस तरह निर्यात मूल्य में लगभग 52 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2. कोयर किस चीज से बनाया जाता है?
कोयर नारियल के बाहरी कठोर छिलके से मिलने वाला प्राकृतिक रेशा है। इस रेशे को निकालकर साफ किया जाता है और फिर उससे धागा, रस्सी, चटाई, गद्दे की सामग्री तथा बागवानी में काम आने वाले कई उत्पाद बनाए जाते हैं।
3. भारत के कोयर उत्पाद किन देशों में भेजे जाते हैं?
भारत के प्रमुख खरीदार देशों में अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन शामिल हैं। इन बाजारों में कोयर रेशा, धागा, चटाई और बागवानी से जुड़े उत्पादों की मांग रहती है। अलग-अलग देशों में इनका उपयोग अलग-अलग कामों के लिए होता है।
4. कोयर उद्योग से कितने लोगों को रोजगार मिलता है?
सरकारी जानकारी के अनुसार, भारत में कोयर क्षेत्र से सात लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। इस क्षेत्र में 21 हजार से ज्यादा इकाइयां हैं और ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
5. कोयर पीथ का उपयोग किस काम में होता है?
कोयर पीथ का उपयोग बागवानी और पौधे उगाने में किया जाता है। यह पानी रोकने और जड़ों के आसपास नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग पौधे, मिट्टी, मौसम और उत्पाद की गुणवत्ता के अनुसार करना चाहिए।
निष्कर्ष
कोयर उत्पादों का निर्यात बढ़ना भारत के ग्रामीण उद्योग और प्राकृतिक रेशे के कारोबार के लिए अच्छा संकेत है। आगे की वृद्धि के लिए गुणवत्ता, आधुनिक मशीनों, नए बाजारों और छोटे उत्पादकों को बेहतर अवसर देने पर ध्यान देना जरूरी होगा।
अस्वीकरण: यह लेख सरकारी आंकड़ों पर आधारित सामान्य जानकारी है। व्यापार या निवेश का निर्णय लेने से पहले संबंधित विभाग से नवीनतम विवरण जांचें।
