अब डीजल नहीं, हाइड्रोजन से दौड़ेगी ट्रेन! जानिए कैसे बदलेगी रेलवे

भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। प्रधानमंत्री जल्द ही देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यह परियोजना भारतीय रेलवे में प्रदूषण कम करने और वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाइड्रोजन ट्रेन डीजल की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है और संचालन के दौरान केवल जलवाष्प (Water Vapour) और गर्मी छोड़ती है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है?

🚆 हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं

  • ईंधन: हाइड्रोजन फ्यूल सेल
  • उत्सर्जन: केवल जलवाष्प और गर्मी
  • ऊर्जा स्रोत: फ्यूल सेल से उत्पन्न बिजली
  • अतिरिक्त ऊर्जा: लिथियम-आयन बैटरी में संग्रहित
  • मुख्य उद्देश्य: प्रदूषण और डीजल पर निर्भरता कम करना

हाइड्रोजन ट्रेन में उच्च दबाव वाले टैंकों में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है। यह फ्यूल सेल में ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रक्रिया करके बिजली बनाती है। इसी बिजली से ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटर चलते हैं, जबकि अतिरिक्त ऊर्जा लिथियम-आयन बैटरी में संग्रहित रहती है। इस वजह से यह तकनीक अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है।

हाइड्रोजन मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है। ग्रे हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस से बनाई जाती है और इसमें सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है। ब्लू हाइड्रोजन में कार्बन उत्सर्जन को कैप्चर कर संग्रहित किया जाता है, इसलिए यह अपेक्षाकृत साफ विकल्प है। वहीं ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा से तैयार की जाती है और इसमें लगभग शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है। भारत का राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन इसी ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

ग्रीन हाइड्रोजन क्यों है सबसे बेहतर विकल्प?

🌱 राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

  • शुरुआत: जनवरी 2023
  • उद्देश्य: ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना
  • लक्ष्य: भारत को वैश्विक हाइड्रोजन हब बनाना
  • फोकस: स्वच्छ ऊर्जा और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना
  • संबंधित पहल: मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और पीएलआई

हाइड्रोजन ट्रेनों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें उन रेल मार्गों पर भी चलाया जा सकता है जहां ओवरहेड बिजली लाइन बिछाना मुश्किल या बहुत महंगा है। पहाड़ी क्षेत्रों, विरासत रेल मार्गों, ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए यह एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इसके अलावा इन ट्रेनों में शोर कम होता है, रखरखाव अपेक्षाकृत आसान होता है और प्रदूषण भी लगभग नहीं के बराबर होता है।

भारत सरकार हाइड्रोजन रेल परियोजना के जरिए डीजल पर निर्भरता कम करना, आयातित ईंधन का खर्च घटाना और घरेलू स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग को बढ़ावा देना चाहती है। जनवरी 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके साथ ही रेलवे के आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

हाइड्रोजन रेल परियोजना की चुनौतियां और संभावनाएं

हालांकि इस तकनीक के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन अभी महंगा है, देश में हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है तथा सुरक्षा मानकों और नियामक ढांचे को और मजबूत बनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारत भविष्य में हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन को सफलतापूर्वक अपनाने में सक्षम हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों और उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित है। समय के साथ सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं में बदलाव संभव है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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