भारत में सोने की खरीद को लेकर 3 नवंबर 2026 को जारी नई रिपोर्ट ने एक अहम बदलाव दिखाया है। जुलाई से सितंबर के बीच देश में सोने की कुल मांग पिछले साल की समान अवधि से 29 प्रतिशत कम होकर करीब 162.5 टन रही। इसके बावजूद सोने पर किया गया कुल खर्च बढ़ा। इसकी मुख्य वजह यह है कि एक साल पहले के मुकाबले सोने का औसत भाव काफी ऊंचा रहा। यानी परिवारों और निवेशकों ने कम वजन में सोना खरीदा, लेकिन उस पर अधिक रकम खर्च की।
सोने की मांग और खर्च में अलग-अलग तस्वीर
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की भारत केंद्रित रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में सोने की मांग का कुल मूल्य लगभग 2.419 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत अधिक है। मात्रा में बड़ी गिरावट और खर्च में बढ़ोतरी का अंतर बताता है कि बाजार में केवल खरीदारों की संख्या ही नहीं, बल्कि कीमत भी अहम भूमिका निभा रही है। यदि प्रति ग्राम भाव बढ़ जाता है तो समान बजट में ग्राहक पहले से कम सोना खरीद पाता है।
जनवरी से सितंबर 2026 तक भारत की कुल मांग करीब 444 टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि से 12 प्रतिशत कम है। लेकिन इस अवधि में कुल खर्च 38 प्रतिशत बढ़कर लगभग 6.688 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर परिवार ने ज्यादा सोना खरीदा। आंकड़ा पूरे बाजार का है और इसमें आभूषण, सिक्के, छड़ें तथा निवेश से जुड़ी मांग शामिल होती है।
रिपोर्ट में तीसरी तिमाही का औसत घरेलू भाव करीब 1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम बताया गया, जो सालाना आधार पर लगभग 45 प्रतिशत अधिक था। कीमतों में इस उछाल ने खरीदारी की क्षमता पर दबाव डाला। शादी और त्योहार के लिए खरीदने वाले परिवारों ने वजन घटाया, जबकि कुछ निवेशकों ने खरीद को टालना बेहतर समझा।
भारत में सोने की मांग के मुख्य आंकड़े
- तिमाही मांग: करीब 162.5 टन
- सालाना बदलाव: 29 प्रतिशत की कमी
- कुल खर्च: करीब 2.419 लाख करोड़ रुपये
- नौ महीने की मांग: करीब 444 टन
- औसत भाव: करीब 1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम
महंगे भाव ने परिवारों की खरीदारी कैसे बदली?
सोना भारतीय परिवारों के लिए केवल निवेश नहीं है। इसका इस्तेमाल शादी, त्योहार, पारिवारिक उपहार और लंबे समय की बचत के रूप में भी होता है। इसलिए भाव बढ़ने पर मांग पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि खरीदने का तरीका बदल जाता है। कई ग्राहक भारी हार की जगह हल्की चेन, छोटे झुमके या कम वजन के कंगन चुनते हैं। कुछ लोग पुराने गहने बदलकर नया डिजाइन लेते हैं। ऐसे बदलाव से बाजार में खरीद जारी रहती है, लेकिन कुल वजन घट सकता है।
आभूषणों की मांग तीसरी तिमाही में लगभग 99.9 टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि से 20 प्रतिशत कम है। फिर भी गहनों पर खर्च करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 1.487 लाख करोड़ रुपये हुआ। इससे साफ है कि ग्राहक कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं, पर ऊंचे भाव के कारण बिल की रकम बड़ी बनी हुई है। यह स्थिति छोटे बजट वाले खरीदारों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
ज्वेलर्स के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। उन्हें अलग-अलग बजट के हिसाब से हल्के डिजाइन, कम वजन वाले विकल्प और पुराने गहनों के बदले नए आभूषण देने की सुविधा पर ध्यान देना पड़ सकता है। ग्राहक को भी खरीद से पहले केवल कुल कीमत नहीं देखनी चाहिए। सोने का शुद्ध वजन, कैरेट, हॉलमार्क, पत्थरों का वजन और बनाने का शुल्क अलग-अलग समझना जरूरी है।
ग्राहक किस तरह समझदारी से खरीद सकते हैं?
सबसे पहले खरीदारी का बजट तय करें और उसी के अनुसार डिजाइन चुनें। दुकानदार से सोने का शुद्ध वजन और पत्थरों का वजन अलग लिखवाएं। बिल में कैरेट, हॉलमार्क पहचान, बनाने का शुल्क और कर स्पष्ट होना चाहिए। यदि पुराने गहने बदल रहे हैं तो उनकी जांच किस आधार पर होगी और कितनी कटौती लगेगी, यह पहले पूछें। दो या तीन दुकानों के बिल की तुलना करने से वास्तविक खर्च समझने में मदद मिल सकती है।
निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को आभूषण और शुद्ध सोने के बीच अंतर समझना चाहिए। आभूषण में बनाने का शुल्क और बेचते समय कटौती हो सकती है। सिक्के या छड़ खरीदने पर भी शुद्धता, विक्रेता की विश्वसनीयता, बिल और वापस बेचने की सुविधा देखनी चाहिए। केवल यह सोचकर खरीदना सही नहीं कि कीमत हर हाल में बढ़ेगी। सोने का भाव घट भी सकता है और निवेश का समय महत्वपूर्ण होता है।
आने वाले महीनों में मांग कैसी रह सकती है?
रिपोर्ट के अनुसार चौथी तिमाही में त्योहार और शादी का मौसम मांग को सहारा दे सकता है। धनतेरस, दिवाली और विवाह से जुड़ी खरीदारी के कारण दुकानों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि ऊंचे भाव के कारण गहनों की मात्रा पर दबाव बना रह सकता है। ग्रामीण आय, फसल की स्थिति, घरेलू महंगाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव भी खरीदारी को प्रभावित करेंगे। इसलिए किसी एक अनुमान को निश्चित नतीजा नहीं मानना चाहिए।
यदि कीमतों में नरमी आती है तो कुछ ऐसे ग्राहक बाजार में लौट सकते हैं जिन्होंने खरीद टाल रखी थी। लेकिन भाव घटने पर भी यह जरूरी नहीं कि मांग तुरंत पुराने स्तर पर पहुंच जाए। परिवारों की आय, बचत और जरूरी खर्चों के बाद उपलब्ध रकम भी खरीदारी तय करती है। ज्वेलरी बाजार की स्थिति समझने के लिए केवल सोने का भाव नहीं, बल्कि बिक्री की मात्रा और ग्राहकों के बजट पर भी नजर रखना उपयोगी होगा।
इस रिपोर्ट का मूल विवरण वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। सोने से जुड़े निवेश की बुनियादी जानकारी समझने के लिए सोने में निवेश पर उपयोगी किताबें यहां देखें।
खरीदारी से पहले जरूरी सावधानियां
- बजट और जरूरत पहले तय करें।
- हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें।
- सोने और पत्थरों का वजन अलग देखें।
- मेकिंग चार्ज और कर सहित बिल लें।
- पुराने गहने बदलने की कटौती समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में तीसरी तिमाही में सोने की मांग कितनी रही?
जुलाई से सितंबर 2026 के बीच भारत में सोने की कुल मांग करीब 162.5 टन रही। यह पिछले साल की समान अवधि से 29 प्रतिशत कम थी। ऊंचे भाव के कारण खरीदारी की मात्रा घटने के बावजूद कुल खर्च बढ़ा।
2. कम मांग के बावजूद सोने पर खर्च क्यों बढ़ा?
इस दौरान सोने का औसत घरेलू भाव पिछले साल से लगभग 45 प्रतिशत अधिक था। इसलिए परिवारों और निवेशकों ने कम वजन खरीदा, लेकिन प्रति ग्राम ज्यादा रकम चुकाई। इसी कारण कुल बाजार खर्च में बढ़ोतरी दर्ज हुई।
3. क्या भारत में गहनों की खरीद भी घटी?
हां, तीसरी तिमाही में गहनों की मांग करीब 99.9 टन रही, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत कम थी। हालांकि गहनों पर खर्च बढ़ा, क्योंकि ऊंची कीमतों ने कुल बिल की रकम बढ़ा दी।
4. क्या त्योहारों में सोने की मांग बढ़ सकती है?
त्योहार और शादी का मौसम चौथी तिमाही में खरीदारी को सहारा दे सकता है। फिर भी ऊंचे भाव, परिवारों की आय और ग्रामीण मांग के कारण कुल वजन में सुधार सीमित रह सकता है।
5. गहने खरीदते समय किन बातों की जांच करनी चाहिए?
खरीदार को हॉलमार्क, कैरेट, सोने का शुद्ध वजन, पत्थरों का वजन और बनाने का शुल्क देखना चाहिए। पक्का बिल लेना और पुराने गहने बदलने की शर्तें पहले समझना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
भारत में सोने की मांग घटने के बावजूद खर्च बढ़ना बताता है कि ऊंची कीमतों ने खरीदारी का तरीका बदल दिया है। आने वाले त्योहारों में मांग सुधर सकती है, लेकिन परिवारों के बजट और भाव पर निर्भरता बनी रहेगी।
अस्वीकरण: यह लेख जानकारी के लिए है। सोना खरीदने या निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, जोखिम और प्रमाणित विक्रेता की जांच अवश्य करें।
