भारत में सोने के गहनों की मांग और उन पर होने वाला खर्च इस साल अलग-अलग दिशा में बढ़े हैं। विश्व गोल्ड काउंसिल की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच भारत में आभूषणों की मांग 99.9 टन रही, जो पिछले साल की समान तिमाही से 20 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद गहनों पर कुल खर्च 16 प्रतिशत बढ़कर 1,487 अरब रुपये पहुंच गया। इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं। ग्राहक पहले से कम मात्रा खरीद रहे हैं, लेकिन बिल की कुल रकम अधिक हो रही है।
कम मात्रा के बावजूद खर्च क्यों बढ़ा?
सोने के गहनों की कीमत में धातु का भाव सबसे बड़ा हिस्सा होता है। जब सोना महंगा होता है, तो समान वजन का गहना खरीदने के लिए ग्राहक को अधिक पैसे देने पड़ते हैं। इस वजह से बाजार में बेचे गए सोने का वजन घट सकता है, लेकिन कुल बिक्री मूल्य बढ़ सकता है। इस तिमाही में यही स्थिति देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार गहनों की मांग मात्रा के आधार पर 20 प्रतिशत कम हुई, जबकि रुपये में खर्च 16 प्रतिशत बढ़ा।
जनवरी से सितंबर 2026 तक भारत में आभूषणों की कुल मांग 241.1 टन रही, जो पिछले साल से 18 प्रतिशत कम है। लेकिन इसी अवधि में ग्राहकों का खर्च 3,618.3 अरब रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 29 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ है कि कीमतों ने खर्च को ऊपर रखा, जबकि खरीदे गए सोने का वजन कम हुआ।
त्योहार और शादी का मौसम कितना अहम?
भारत में धनतेरस, दिवाली और शादी के मौसम में गहनों की खरीद बढ़ती है। परिवार कई बार इन अवसरों के लिए पहले से बजट बनाते हैं। सोने की कीमत में नरमी आने पर कुछ ग्राहक खरीदारी जल्दी कर सकते हैं, जबकि ऊंचे भाव पर वे हल्के गहने या कम वजन के डिजाइन चुन सकते हैं। रिपोर्ट में खुदरा दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही और दुकानदारों की दोबारा माल भरने की गतिविधि में सुधार के संकेत बताए गए हैं।
फिर भी मांग में तेज उछाल की गारंटी नहीं है। ग्रामीण आय, फसल और रोजमर्रा के खर्च का दबाव खरीदारी को प्रभावित कर सकता है। गहने अक्सर परिवार की बड़ी खरीद होते हैं, इसलिए ग्राहक कीमत और घरेलू बजट दोनों देखकर फैसला करते हैं। दुकानदारों के लिए भी बिक्री की मात्रा और कुल कमाई के बीच अंतर समझना जरूरी है।
💍 गहनों की मांग के मुख्य आंकड़े
- तीसरी तिमाही की मांग: 99.9 टन
- सालाना मात्रा बदलाव: 20 प्रतिशत की गिरावट
- तीसरी तिमाही खर्च: 1,487 अरब रुपये
- खर्च में सालाना बदलाव: 16 प्रतिशत की बढ़त
- जनवरी-सितंबर मांग: 241.1 टन
खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?
ग्राहक को केवल गहने की कुल कीमत नहीं देखनी चाहिए। सोने का शुद्ध वजन, कैरेट, हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज, पत्थरों का वजन और वापस बेचने की शर्तें भी समझनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों में मेकिंग चार्ज अलग हो सकता है। इसलिए खरीद से पहले लिखित बिल और पूरी कीमत का विवरण लेना उपयोगी है।
यदि बजट सीमित है, तो कम वजन वाले डिजाइन चुनना या खरीदारी को अलग-अलग समय में बांटना एक विकल्प हो सकता है। लेकिन कीमत घटने की उम्मीद में जरूरी खरीद को टालना भी हर परिवार के लिए सही नहीं होगा। सोने का भाव रोज बदल सकता है और भविष्य की दिशा निश्चित नहीं होती।
गहनों को लंबे समय तक साफ और सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त देखभाल सामग्री उपयोगी हो सकती है। हर धातु और रत्न के लिए एक ही सफाई द्रव्य सही नहीं होता। गहनों की सफाई के लिए उपलब्ध किट यहां देखें और उपयोग से पहले निर्माता के निर्देश पढ़ें।
आभूषण बाजार में आगे क्या देखा जाएगा?
आने वाले महीनों में त्योहारों और विवाह समारोहों से बाजार को सहारा मिल सकता है। यदि कीमतें स्थिर रहती हैं या कुछ नरमी आती है, तो ग्राहक खरीदारी बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर, यदि भाव फिर तेजी से चढ़ते हैं, तो मांग की मात्रा पर दबाव रह सकता है। इसलिए दुकानदारों की बिक्री, ग्राहकों की आवाजाही और सोने के भाव पर नजर रखना जरूरी होगा।
भारत दुनिया के सबसे बड़े आभूषण बाजारों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार तीसरी तिमाही में वैश्विक आभूषण मांग में भारत की हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत रही। इससे घरेलू बाजार का महत्व पता चलता है। हालांकि यह आंकड़ा हर परिवार की खरीद क्षमता या किसी खास शहर की बिक्री का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
पूरे आंकड़े विश्व गोल्ड काउंसिल की आधिकारिक रिपोर्ट में देखे जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में तीसरी तिमाही में गहनों की मांग कितनी रही?
जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में सोने के गहनों की मांग 99.9 टन रही। यह पिछले साल की समान तिमाही से 20 प्रतिशत कम थी। ऊंची कीमतों ने खरीद की मात्रा पर दबाव डाला।
2. गहनों की मांग घटने पर भी खर्च क्यों बढ़ा?
सोने की कीमत पिछले साल की तुलना में अधिक रहने से कम वजन के गहने खरीदने पर भी ग्राहकों को ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ी। इसलिए कुल खर्च बढ़ा, जबकि खरीदे गए सोने की मात्रा कम हुई।
3. क्या त्योहारों में गहनों की बिक्री बढ़ सकती है?
त्योहार और शादी का मौसम आमतौर पर खरीदारी को सहारा देते हैं। कीमतों में नरमी और ग्राहकों की आवाजाही से बिक्री बढ़ सकती है, लेकिन घरेलू बजट और सोने के भाव के कारण मात्रा सीमित भी रह सकती है।
4. गहने खरीदते समय कौन-सी जानकारी जरूरी है?
शुद्धता, हॉलमार्क, सोने का वास्तविक वजन, मेकिंग चार्ज, पत्थरों का वजन और वापस खरीद की शर्तें देखें। पक्का बिल लें और अलग-अलग दुकानों की कुल कीमत की तुलना करें।
5. क्या सोने के गहने निवेश के लिए बेहतर हैं?
गहनों का उपयोग पहनने और पारिवारिक जरूरतों के लिए भी होता है। मेकिंग चार्ज और बिक्री के समय कटौती के कारण उनका निवेश लाभ अलग हो सकता है। निवेश के उद्देश्य से खरीदने से पहले कुल लागत समझें।
निष्कर्ष
भारत में गहनों की खरीद की मात्रा घटी है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण कुल खर्च बढ़ा। खरीदारों को भाव के साथ शुद्धता, मेकिंग चार्ज और बिल पर ध्यान देना चाहिए। त्योहारों में खरीदारी बजट के अनुसार करें।
अस्वीकरण: यह लेख बाजार की सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। खरीदारी से पहले वर्तमान भाव और दुकानदार की शर्तें जांचें।
