भारत में होटल और पर्यटन से जुड़े रियल एस्टेट बाजार में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। CBRE की रिपोर्ट के मुताबिक, 2035 तक देश में होटल कमरों की मांग बढ़ने की उम्मीद है और प्रीमियम श्रेणी के होटल इस विस्तार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कारोबार, छुट्टियों, वेलनेस और धार्मिक यात्राओं में बढ़ती रुचि इस मांग को सहारा दे सकती है।
2035 तक होटल बाजार में कितना विस्तार होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2035 तक लगभग 1.9 लाख से 2.1 लाख अतिरिक्त संगठित होटल कमरों की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए करीब 120 से 125 करोड़ वर्ग फुट रियल एस्टेट क्षेत्र की आवश्यकता का अनुमान है। रिपोर्ट 22 अक्टूबर को जारी की गई थी।
अपस्केल, अपर-अपस्केल और लग्जरी होटल मिलकर होटल रियल एस्टेट की अनुमानित जरूरत का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा बना सकते हैं। इन श्रेणियों में करीब 95,000 नए कमरे जुड़ने का अनुमान है, जिनके लिए लगभग 83.1 मिलियन वर्ग फुट जगह की जरूरत होगी।
🏨 भारत में होटल मांग के प्रमुख आंकड़े
- अतिरिक्त कमरे: 2035 तक लगभग 1.9 से 2.1 लाख
- रियल एस्टेट जरूरत: करीब 120 से 125 करोड़ वर्ग फुट
- प्रीमियम होटल: अनुमानित रियल एस्टेट मांग का लगभग 67%
- प्रीमियम श्रेणी के नए कमरे: लगभग 95,000
- निवेश: 2024 से 2026 की पहली छमाही तक करीब 905 मिलियन डॉलर
प्रीमियम होटलों की मांग क्यों बढ़ रही है?
CBRE के अनुमान में अपस्केल होटल के लिए अतिरिक्त 32.6 मिलियन वर्ग फुट, लग्जरी होटल के लिए 28.2 मिलियन वर्ग फुट और अपर-अपस्केल संपत्तियों के लिए 22.3 मिलियन वर्ग फुट जगह की जरूरत शामिल है। इसके मुकाबले इकोनॉमी होटलों के लिए करीब 9 मिलियन वर्ग फुट, मिडस्केल के लिए 18.3 मिलियन वर्ग फुट और अपर-मिडस्केल होटलों के लिए 13.8 मिलियन वर्ग फुट का अनुमान है।
लोगों की खर्च करने की क्षमता, बेहतर अनुभव पाने की इच्छा और कारोबारी यात्राओं के साथ छुट्टियों, वेलनेस तथा धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी से प्रीमियम होटलों को फायदा मिल सकता है। कुछ बाजारों में नए कमरों की सीमित आपूर्ति ने कमरे के किराये और होटल में ठहरने की दर को भी समर्थन दिया है।
होटल कारोबार की मौजूदा स्थिति
CBRE के अनुसार, 2025 के अंत तक भारत के संगठित होटल क्षेत्र में लगभग 4.5 लाख कमरे थे। उस वर्ष करीब 14,400 कमरे जोड़े गए। 2025 में होटल ऑक्यूपेंसी लगभग 64 प्रतिशत रही और प्रति उपलब्ध कमरे से मिलने वाला राजस्व यानी RevPAR करीब 11 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,500 रुपये पहुंच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से 2026 की पहली छमाही के बीच होटल रियल एस्टेट में करीब 905 मिलियन डॉलर का निवेश आया। मांग बढ़ने के साथ मौजूदा होटलों में निवेश और होटल संचालन से जुड़े प्लेटफॉर्म का विस्तार भी बाजार के विकास में योगदान दे सकता है।
📍 छोटे शहरों में भी बढ़ रहे हैं अवसर
- पर्यटन स्थल: भरतपुर, कुमारकोम, मैसूर और बरापानी
- धार्मिक केंद्र: वाराणसी, तिरुपति, ऋषिकेश और पुरी
- मुख्य वजह: घरेलू पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी
- डेवलपर्स की चुनौती: स्थानीय मांग के अनुसार होटल का सही प्रकार चुनना
- लंबी अवधि का लक्ष्य: टिकाऊ और अलग पहचान वाली होटल संपत्तियां विकसित करना
बड़े शहरों से आगे बढ़ रहा है पर्यटन
होटलों की मांग अब केवल बड़े महानगरों और पारंपरिक पर्यटन केंद्रों तक सीमित नहीं रह गई है। CBRE ने भरतपुर, कुमारकोम, मैसूर और बरापानी जैसे छोटे पर्यटन तथा सांस्कृतिक स्थलों में अवसरों का उल्लेख किया है। घरेलू यात्राओं में वृद्धि और बेहतर परिवहन संपर्क इन स्थानों को होटल कंपनियों के लिए आकर्षक बना सकते हैं।
वाराणसी, तिरुपति, ऋषिकेश और पुरी जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्रों में भी होटल संचालकों की रुचि बढ़ रही है। CBRE के चेयरमैन और सीईओ, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका, अंशुमान मैगजीन के मुताबिक, यात्रा की जरूरतें बदल रही हैं और डेवलपर अब हर स्थान की मांग को समझकर निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।
इसका मतलब है कि होटल बनाने की योजना में केवल कमरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय यात्रियों की जरूरत, जमीन की लागत, पहुंच, संचालन की क्षमता और होटल की अलग पहचान पर भी ध्यान देना होगा। अधिक जानकारी के लिए CBRE India की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. 2035 तक भारत में कितने नए होटल कमरों की जरूरत होगी?
CBRE की रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक भारत में लगभग 1.9 लाख से 2.1 लाख अतिरिक्त संगठित होटल कमरों की जरूरत पड़ सकती है। वास्तविक मांग पर्यटन, कारोबारी यात्राओं, नई परियोजनाओं और अलग-अलग शहरों में होटल की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
2. होटल रियल एस्टेट की मांग में प्रीमियम होटलों की कितनी हिस्सेदारी हो सकती है?
अपस्केल, अपर-अपस्केल और लग्जरी होटल मिलकर 2035 तक अनुमानित होटल रियल एस्टेट जरूरत का करीब 67 प्रतिशत हिस्सा बना सकते हैं। इन श्रेणियों में कमरे बड़े और सुविधाएं अधिक होने के कारण कुल जगह की जरूरत भी ज्यादा हो सकती है।
3. भारत में होटल निवेश को किन कारणों से समर्थन मिल सकता है?
घरेलू पर्यटन, कारोबारी यात्राएं, बेहतर परिवहन, धार्मिक यात्राएं और प्रीमियम अनुभवों की मांग होटल निवेश को सहारा दे सकती है। हालांकि, किसी परियोजना की सफलता स्थानीय मांग, जमीन की कीमत, संचालन की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा पर भी निर्भर करेगी।
4. क्या छोटे शहरों में भी होटल कारोबार के अवसर बढ़ रहे हैं?
रिपोर्ट में भरतपुर, कुमारकोम, मैसूर और बरापानी जैसे पर्यटन स्थलों के साथ वाराणसी, तिरुपति, ऋषिकेश और पुरी जैसे धार्मिक केंद्रों का उल्लेख है। बेहतर कनेक्टिविटी और घरेलू यात्राओं से इन जगहों पर होटल संचालकों की रुचि बढ़ सकती है।
5. होटल बनाने से पहले डेवलपर्स को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
डेवलपर्स को स्थानीय यात्रियों की जरूरत, जमीन और निर्माण की लागत, परिवहन संपर्क, संभावित ऑक्यूपेंसी और होटल संचालन की क्षमता का आकलन करना चाहिए। सही होटल श्रेणी और मजबूत संचालन साझेदारी लंबे समय तक संपत्ति को उपयोगी और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष
भारत में पर्यटन और कारोबारी यात्राओं के विस्तार से होटल रियल एस्टेट में नए अवसर बन सकते हैं। CBRE के अनुमान प्रीमियम होटलों की बड़ी भूमिका दिखाते हैं, लेकिन निवेश की सफलता स्थानीय मांग, सही योजना और प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगी।
अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। दिए गए आंकड़े अनुमान हैं, इन्हें निवेश या कारोबार की गारंटी न माना जाए।