Manufacturing News: सिर्फ 3.6% कारखानों से आया 62% उत्पादन

भारत के विनिर्माण क्षेत्र की तस्वीर से जुड़ी एक सरकारी रिपोर्ट ने उद्योग के आकार और उत्पादन के बीच बड़ा अंतर दिखाया है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश के केवल 3.6 प्रतिशत चालू कारखानों ने कुल विनिर्माण उत्पादन का 62.07 प्रतिशत हिस्सा दिया। यह आंकड़ा बताता है कि भारत के पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन का बड़ा हिस्सा कुछ बड़े कारखानों पर केंद्रित है।

बड़े कारखानों का उत्पादन में इतना बड़ा हिस्सा क्यों

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के अनुसार ₹500 करोड़ से अधिक वार्षिक उत्पादन वाले कारखाने कुल चालू इकाइयों का केवल 3.6 प्रतिशत थे। इसके बावजूद इन इकाइयों ने वित्त वर्ष 2024-25 में कुल विनिर्माण उत्पादन का 62.07 प्रतिशत हिस्सा दिया और शुद्ध मूल्यवर्धन में लगभग 61 प्रतिशत योगदान किया।

यह स्थिति बताती है कि बड़े संयंत्रों में मशीनरी, पूंजी, उत्पादन क्षमता और बाजार तक पहुंच का स्तर काफी अधिक है। बड़े कारखानों में एक ही जगह पर बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है, जिससे प्रति इकाई लागत कम रखने और बड़ी मांग पूरी करने में मदद मिलती है।

इसके उलट ₹10 करोड़ तक का वार्षिक उत्पादन करने वाली इकाइयां चालू कारखानों की 52.36 प्रतिशत थीं, लेकिन कुल उत्पादन में उनका हिस्सा केवल 1.92 प्रतिशत रहा। इससे छोटे और बड़े उद्योगों के बीच उत्पादन क्षमता का अंतर साफ दिखाई देता है।

छोटे कारखानों की बड़ी संख्या लेकिन कम उत्पादन

छोटे कारखाने देश के औद्योगिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी संख्या बड़ी है और ये स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आपूर्ति श्रृंखला में योगदान देते हैं। लेकिन उत्पादन के आंकड़े बताते हैं कि उनका औसत उत्पादन बड़े संयंत्रों की तुलना में काफी कम है। इसका कारण पूंजी, तकनीक, मशीनरी, बाजार और वित्त की उपलब्धता हो सकता है।

सर्वे में पूंजी के आधार पर भी बड़ा अंतर दिखाई देता है। ₹10 करोड़ या उससे अधिक की संयंत्र और मशीनरी वाली इकाइयां चालू कारखानों का 15.84 प्रतिशत थीं, लेकिन उन्होंने कुल उत्पादन का 76.82 प्रतिशत और शुद्ध मूल्यवर्धन का 78.07 प्रतिशत हिस्सा दिया।

दूसरी ओर ₹5 करोड़ तक की पूंजी वाली इकाइयां 78.69 प्रतिशत चालू कारखानों का हिस्सा थीं। फिर भी कुल उत्पादन में उनका योगदान 19.24 प्रतिशत रहा। इससे स्पष्ट है कि पूंजी की मात्रा और उत्पादन क्षमता के बीच मजबूत संबंध है।

🏭 विनिर्माण सर्वे की बड़ी बातें

  • बड़े कारखाने: केवल 3.6 प्रतिशत
  • कुल उत्पादन में हिस्सा: 62.07 प्रतिशत
  • शुद्ध मूल्यवर्धन: करीब 61 प्रतिशत
  • ₹10 करोड़ तक की इकाइयां: 52.36 प्रतिशत
  • छोटी इकाइयों का उत्पादन हिस्सा: 1.92 प्रतिशत
  • विनिर्माण जीवीए वृद्धि: वित्त वर्ष 2024-25 में 9.28 प्रतिशत

उत्पादन बढ़ा, लेकिन प्रति कर्मचारी मूल्यवर्धन की गति धीमी

सर्वे में यह भी सामने आया कि विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों के सकल मूल्यवर्धन में वित्त वर्ष 2024-25 में 9.28 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई। संयंत्र और मशीनरी के सकल मूल्य में 7.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं प्रति चालू कारखाना शुद्ध मूल्यवर्धन 6.59 प्रतिशत बढ़ा।

लेकिन प्रति कर्मचारी मूल्यवर्धन की वृद्धि केवल 2.25 प्रतिशत रही। इसी अवधि में विनिर्माण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या 7.57 प्रतिशत बढ़ी। इसका अर्थ है कि रोजगार बढ़ने के बावजूद प्रति कर्मचारी उत्पादन या मूल्यवर्धन की वृद्धि उतनी तेज नहीं रही।

कारखानों की संख्या भी 3.45 प्रतिशत बढ़ी। इससे संकेत मिलता है कि उद्योग में विस्तार हो रहा है, लेकिन उत्पादन और रोजगार की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए तकनीक, कौशल और उत्पादकता पर अधिक ध्यान जरूरी हो सकता है।

रोजगार की दृष्टि से खाद्य उत्पाद, कपड़ा, मूल धातु, मोटर वाहन और परिधान जैसे पांच प्रमुख उद्योगों ने कुल विनिर्माण रोजगार का 41 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दिया। इससे पता चलता है कि कुछ उद्योग रोजगार के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

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किन राज्यों का योगदान सबसे ज्यादा रहा

राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने मिलकर देश के विनिर्माण सकल मूल्यवर्धन में 54 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। इन राज्यों में औद्योगिक आधार, बाजार, परिवहन, बंदरगाह और श्रम की उपलब्धता जैसे कई कारक बड़ी कंपनियों के विस्तार में मदद करते हैं।

यह क्षेत्रीय एकाग्रता यह भी बताती है कि भारत में औद्योगिक विकास सभी राज्यों में समान नहीं है। जिन राज्यों में बुनियादी ढांचा और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण है, वहां बड़े संयंत्रों की संख्या और उत्पादन दोनों अधिक दिखाई दे सकते हैं।

सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि छोटे और मध्यम कारखानों को भी पूंजी, तकनीक और बाजार तक बेहतर पहुंच मिले। यदि छोटी इकाइयां उत्पादन बढ़ाती हैं तो रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधि को फायदा हो सकता है।

सर्वे का विस्तृत विवरण यहां देखा जा सकता है।

📊 उद्योग के लिए आगे की दिशा

  • मुख्य अवसर: छोटे उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ाना
  • जरूरत: तकनीक और वित्त तक बेहतर पहुंच
  • रोजगार: प्रमुख उद्योगों में केंद्रित
  • चुनौती: प्रति कर्मचारी उत्पादकता बढ़ाना
  • आगे की नजर: राज्यों और छोटे उद्योगों की क्षमता पर

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. कितने प्रतिशत बड़े कारखानों ने 62 प्रतिशत उत्पादन दिया?

वित्त वर्ष 2024-25 में ₹500 करोड़ से अधिक वार्षिक उत्पादन वाले कारखाने चालू इकाइयों का करीब 3.6 प्रतिशत थे। इन इकाइयों ने कुल विनिर्माण उत्पादन का 62.07 प्रतिशत हिस्सा दिया।

2. छोटे कारखानों की स्थिति कैसी रही?

₹10 करोड़ तक वार्षिक उत्पादन वाली इकाइयां चालू कारखानों की 52.36 प्रतिशत थीं, लेकिन उनका कुल उत्पादन में योगदान केवल 1.92 प्रतिशत रहा। इससे बड़े और छोटे उद्योगों की उत्पादन क्षमता का अंतर दिखाई देता है।

3. विनिर्माण जीवीए कितना बढ़ा?

वित्त वर्ष 2024-25 में विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों का सकल मूल्यवर्धन 9.28 प्रतिशत बढ़ा। यह उद्योग में मूल्य सृजन की गति मजबूत रहने का संकेत देता है।

4. किन राज्यों का विनिर्माण में बड़ा योगदान रहा?

महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने मिलकर देश के विनिर्माण सकल मूल्यवर्धन में 54 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। इन राज्यों में औद्योगिक गतिविधि का आधार मजबूत है।

5. रोजगार के लिए कौन से उद्योग महत्वपूर्ण रहे?

खाद्य उत्पाद, कपड़ा, मूल धातु, मोटर वाहन और परिधान जैसे उद्योगों ने मिलकर कुल विनिर्माण रोजगार का 41 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दिया। ये उद्योग बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं।

निष्कर्ष

भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बड़े कारखानों की भूमिका बहुत बड़ी है, जबकि छोटे उद्योग संख्या में अधिक हैं। आगे की चुनौती उत्पादन के साथ छोटे उद्योगों की क्षमता और प्रति कर्मचारी उत्पादकता बढ़ाने की है। इससे रोजगार और व्यापक औद्योगिक विकास को मजबूती मिल सकती है।

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अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है, इसे निवेश या वित्तीय सलाह न मानें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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