भारत के स्मार्टफोन बाजार में जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज होने की रिपोर्ट 27 अक्टूबर को सामने आई। Counterpoint Research के आंकड़ों के अनुसार, देश में स्मार्टफोन शिपमेंट एक साल पहले की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत घटकर पिछले दस वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले Omdia ने भी तीसरी तिमाही में 26 प्रतिशत गिरावट का अनुमान दिया था। दोनों रिपोर्टों में गिरावट की सीमा अलग है, लेकिन दोनों संकेत देती हैं कि बाजार में मांग कमजोर रही और बढ़ती लागत ने फोन कंपनियों पर दबाव डाला।
स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट क्यों आई?
Counterpoint के अनुसार, मेमोरी चिप की कीमतों में तेज बढ़ोतरी स्मार्टफोन बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारणों में से एक रही। फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी और दूसरे घटकों की लागत बढ़ने से कंपनियों के लिए कम कीमत वाले मॉडल बनाना मुश्किल हो सकता है। कंपनियां या तो कीमत बढ़ाती हैं, कुछ फीचर्स कम करती हैं या अपने लाभ को बचाने के लिए दुकानों में कम स्टॉक भेजती हैं। इन सभी बातों का असर बाजार की बिक्री और ग्राहकों के चुनाव पर पड़ सकता है।
शिपमेंट का आंकड़ा और ग्राहकों द्वारा खरीदे गए फोन की संख्या एक ही चीज नहीं हैं। शिपमेंट का मतलब है कि कंपनियों ने बाजार में कितने फोन भेजे। जब दुकानों और वितरकों के पास पहले से स्टॉक हो, तो कंपनियां नए फोन कम भेज सकती हैं। कमजोर मांग की स्थिति में वे जरूरत से ज्यादा माल जमा करने से बचती हैं। इसलिए शिपमेंट में गिरावट बाजार की स्थिति का संकेत देती है, लेकिन यह सीधे तौर पर हर दुकान की बिक्री में समान गिरावट साबित नहीं करती।
📉 भारत के स्मार्टफोन बाजार की तस्वीर
- रिपोर्ट अवधि: जुलाई-सितंबर 2026
- Counterpoint अनुमान: शिपमेंट में 20% सालाना गिरावट
- Omdia अनुमान: 26% सालाना गिरावट
- सबसे प्रभावित श्रेणी: ₹20,000 से कम के फोन
- मुख्य दबाव: मेमोरी की बढ़ती कीमत और कमजोर मांग
बजट फोन की बिक्री पर सबसे ज्यादा दबाव
Counterpoint के आंकड़ों में 20,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन के शिपमेंट में लगभग 47 प्रतिशत गिरावट बताई गई। 15,000 रुपये से कम के फोन में दबाव विशेष रूप से मजबूत रहा। इस श्रेणी में खरीदने वाले ग्राहक आम तौर पर कीमत को लेकर ज्यादा सतर्क होते हैं। यदि नया फोन पहले से महंगा हो जाए या समान बजट में कम फीचर मिलें, तो कई ग्राहक खरीदारी टाल सकते हैं या पुराने फोन को अधिक समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
बजट श्रेणी के खरीदार अक्सर बैटरी, स्टोरेज, कैमरा और 5G सपोर्ट को कीमत के साथ तौलते हैं। यदि कीमत बढ़ती है, तो ग्राहक पुराने मॉडल, रिफर्बिश्ड फोन या ऑफर के समय खरीदने पर विचार कर सकते हैं। कंपनियों के लिए इस वर्ग में सही कीमत तय करना जरूरी है, क्योंकि छोटी कीमत वृद्धि भी खरीदार के फैसले को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, हर ब्रांड और हर कीमत श्रेणी पर असर एक जैसा नहीं होगा।
कौन सी कंपनियां बाजार में आगे रहीं?
Counterpoint के अनुसार, Samsung ने नौ तिमाहियों के बाद फिर से पहला स्थान हासिल किया और बाजार में लगभग 17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। Galaxy A सीरीज और तुलनात्मक रूप से सीमित कीमत वृद्धि को इसके प्रदर्शन से जोड़ा गया। vivo, जिसमें iQOO शामिल नहीं था, लगभग 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। Oppo करीब 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर बताया गया, जिसे 20,000 रुपये से ऊपर की श्रेणी में मजबूत वृद्धि से मदद मिली।
Xiaomi और Poco को साथ गिनने पर उनकी हिस्सेदारी भी लगभग 12 प्रतिशत बताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, Xiaomi 10,001 से 20,000 रुपये की कीमत श्रेणी में अग्रणी रहा। भारतीय ब्रांडों की संयुक्त हिस्सेदारी भी बढ़कर लगभग 7 प्रतिशत होने की बात कही गई, जबकि पहले यह करीब 2 प्रतिशत थी। Ai+ Smartphone, itel और Google जैसे ब्रांडों के लिए भी वृद्धि के संकेत दिए गए। हालांकि बाजार हिस्सेदारी और शिपमेंट की गणना करने वाली कंपनियों के तरीके अलग हो सकते हैं, इसलिए अलग रिपोर्टों के आंकड़े सीधे समान नहीं माने जाने चाहिए।
ग्राहकों और फोन कंपनियों के लिए इसका क्या मतलब है?
ग्राहकों के लिए इस स्थिति का अर्थ यह हो सकता है कि आने वाले महीनों में हर फोन की कीमत कम होना जरूरी नहीं है। यदि मेमोरी और अन्य घटकों की लागत ऊंची बनी रहती है, तो कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं या कम कीमत वाले मॉडल में कुछ सुविधाएं सीमित कर सकती हैं। दूसरी ओर, पुराने स्टॉक को निकालने के लिए छूट भी दी जा सकती है। इसलिए किसी भी फोन को खरीदने से पहले उसकी मौजूदा कीमत, पुराने मॉडल और प्रतिस्पर्धी विकल्पों की तुलना करना समझदारी है।
फोन कंपनियां भी अपने उत्पादों और स्टॉक की योजना बदल सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ब्रांड कम कीमत वाले बाजार के लिए 4G या कम स्पेसिफिकेशन वाले मॉडल पर अधिक ध्यान दे सकते हैं, ताकि कीमत नियंत्रण में रखी जा सके। इससे ग्राहकों को सस्ते विकल्प मिल सकते हैं, लेकिन हर मॉडल में समान कैमरा, प्रोसेसर या 5G सुविधा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। खरीदारी से पहले यह जांचना जरूरी होगा कि फोन में कौन से बैंड, अपडेट और सुरक्षा सुविधाएं मिलती हैं।
2027 में बाजार की दिशा क्या हो सकती है?
Counterpoint ने 2026 में भारत के स्मार्टफोन बाजार में लगभग 13 प्रतिशत संकुचन की संभावना जताई। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि त्योहारों की बिक्री के बाद कुछ फोन की कीमतों पर फिर दबाव आ सकता है। यह एक अनुमान है, निश्चित परिणाम नहीं। मांग, महंगाई, घटकों की उपलब्धता, कंपनियों की रणनीति और ग्राहकों की आय जैसे कई कारक आने वाले महीनों में बाजार को प्रभावित करेंगे।
खरीदारों को बाजार की गिरावट को केवल फोन सस्ते होने के संकेत के रूप में नहीं देखना चाहिए। अगर फोन की तत्काल जरूरत है, तो बजट और आवश्यक सुविधाओं के अनुसार खरीदना बेहतर है। यदि पुराना फोन ठीक चल रहा है, तो नए मॉडल और ऑफर की तुलना के लिए समय लिया जा सकता है। रिपोर्ट के विवरण के लिए Counterpoint Research की वेबसाइट देखें और आंकड़ों को अन्य शोध रिपोर्टों के साथ समझें।
🛒 फोन खरीदने वालों के लिए सुझाव
- बजट तय करें: जरूरत से ज्यादा खर्च न करें
- तुलना करें: पुराने और नए मॉडल देखें
- फीचर्स: RAM, स्टोरेज, बैटरी और नेटवर्क जांचें
- ऑफर: बैंक छूट की शर्तें पढ़ें
- अपडेट: सुरक्षा और सॉफ्टवेयर सपोर्ट देखें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट कितने घटे?
Counterpoint Research के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना लगभग 20 प्रतिशत गिरावट आई। Omdia ने इससे बड़ी 26 प्रतिशत गिरावट बताई। अलग शोध संस्थाओं के आंकड़ों में अंतर हो सकता है, इसलिए रिपोर्ट की पद्धति भी देखनी चाहिए।
2. बजट फोन सबसे ज्यादा प्रभावित क्यों हुए?
20,000 रुपये से कम के फोन के शिपमेंट में लगभग 47 प्रतिशत गिरावट बताई गई। इस श्रेणी के ग्राहक कीमत के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। घटकों की लागत बढ़ने पर कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे कुछ खरीदार फोन बदलने का फैसला टाल देते हैं।
3. Samsung की बाजार हिस्सेदारी कितनी बताई गई?
Counterpoint की रिपोर्ट में Samsung की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत बताई गई, जिससे कंपनी नौ तिमाहियों बाद शीर्ष स्थान पर लौटी। यह आंकड़ा शोध संस्था के अनुमान पर आधारित है और अन्य संस्थाओं की गणना से अलग हो सकता है।
4. क्या फोन की कीमतें आगे बढ़ सकती हैं?
यदि मेमोरी और दूसरे घटकों की लागत ऊंची रहती है, तो कुछ कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं या कम कीमत वाले मॉडल में फीचर सीमित कर सकती हैं। लेकिन ऑफर, स्टॉक और प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ फोन सस्ते भी मिल सकते हैं।
5. क्या अभी नया स्मार्टफोन खरीदना चाहिए?
यदि फोन की जरूरत है, तो अपने बजट में उपलब्ध मॉडलों की तुलना करके खरीद सकते हैं। अगर वर्तमान फोन ठीक काम कर रहा है, तो नए लॉन्च और ऑफर देखने के लिए इंतजार करना भी विकल्प है। सिर्फ बाजार गिरने की खबर के आधार पर फैसला न लें।
निष्कर्ष
भारत के स्मार्टफोन बाजार में Q3 2026 की गिरावट कमजोर मांग और बढ़ती लागत का संकेत देती है। बजट फोन पर दबाव ज्यादा रहा, जबकि ब्रांडों की हिस्सेदारी बदली। खरीदारों को कीमत, फीचर और अपडेट की तुलना करके फैसला करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: बाजार के आंकड़े शोध रिपोर्टों पर आधारित अनुमान हैं। अलग संस्थाओं की पद्धति और नतीजों में अंतर हो सकता है।