Solar Power Curtailment: सितंबर में 314 MU बिजली क्यों रोकी गई?

भारत में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ रही है, लेकिन हर समय पैदा होने वाली पूरी बिजली का इस्तेमाल करना आसान नहीं होता। 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत में उपलब्ध सौर और पवन बिजली का 378.52 मिलियन यूनिट (MU) हिस्सा उपयोग में नहीं आ सका। इसमें सौर ऊर्जा का हिस्सा 314 MU था। रिपोर्ट में इसके पीछे ग्रिड की सीमाओं और बिजली आपूर्ति-मांग को संतुलित करने की जरूरत जैसे कारण बताए गए।

सितंबर में कितनी सौर बिजली उपयोग नहीं हो सकी?

रिपोर्ट में Grid-India के आँकड़ों और JMK Research & Analytics के विश्लेषण का हवाला दिया गया है। कुल 378.52 MU सौर और पवन बिजली का उपयोग नहीं हो सका, जो उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का 1.28 प्रतिशत बताया गया। इसमें 314 MU सौर बिजली और 64.98 MU पवन बिजली शामिल थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात और राजस्थान का संयुक्त हिस्सा इस कटौती का लगभग 79 प्रतिशत था। इन राज्यों में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की बड़ी मौजूदगी है। जब बिजली उत्पादन और ग्रिड की उसे ले जाने या इस्तेमाल करने की क्षमता में तालमेल नहीं बैठता, तब कुछ उपलब्ध बिजली को ग्रिड में शामिल नहीं किया जा पाता।

⚡ रिपोर्ट के मुख्य आँकड़े

  • अवधि: सितंबर 2026
  • उपयोग नहीं हुई कुल सौर-पवन बिजली: 378.52 MU
  • इसमें सौर बिजली: 314 MU
  • इसमें पवन बिजली: 64.98 MU
  • कुल नवीकरणीय उत्पादन का हिस्सा: 1.28%
  • अधिक प्रभावित राज्य: गुजरात और राजस्थान, संयुक्त रूप से लगभग 79%

Solar Power Curtailment क्यों होता है?

बिजली ग्रिड को हर समय उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनाए रखना होता है। कुछ जगहों पर बिजली बनाने की क्षमता अधिक हो सकती है, जबकि ट्रांसमिशन लाइनें उस बिजली को दूसरे क्षेत्रों तक पहुँचाने में सीमित हों। कभी-कभी मांग, मौसम या ग्रिड सुरक्षा की स्थिति के कारण भी उत्पादन कम करने का निर्देश दिया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, कटौती का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा आपूर्ति और मांग के संतुलन के लिए उठाए गए आपात कदमों से जुड़ा था। बाकी लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा वास्तविक समय में ग्रिड की सीमाओं, जिनमें ट्रांसमिशन की भीड़ शामिल है, से संबंधित था। इसलिए केवल नए सोलर प्लांट बनाना पर्याप्त नहीं, साथ में ट्रांसमिशन और बिजली स्टोरेज भी विकसित करना जरूरी है।

🔋 बिजली का बेहतर इस्तेमाल कैसे हो सकता है?

  • ग्रिड और ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाई जाए।
  • बैटरी स्टोरेज से अतिरिक्त दिन की बिजली बाद में इस्तेमाल की जा सके।
  • मांग और उत्पादन का बेहतर पूर्वानुमान किया जाए।
  • बिजली की खपत को उस समय बढ़ावा दिया जाए जब सौर ऊर्जा ज्यादा उपलब्ध हो।

रिपोर्ट और आँकड़ों के विवरण के लिए Financial Express की वेबसाइट देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Solar power curtailment का क्या अर्थ है?

इसका मतलब है कि उपलब्ध सौर बिजली को ग्रिड में पूरी तरह शामिल नहीं किया जा सका या उत्पादन घटाने के निर्देश दिए गए। ऐसा ग्रिड की क्षमता, सुरक्षा, मांग और बिजली के प्रवाह को संतुलित रखने की जरूरत के कारण हो सकता है।

2. सितंबर 2026 में कितनी सौर बिजली उपयोग नहीं हुई?

रिपोर्ट में सितंबर के दौरान 314 मिलियन यूनिट सौर बिजली का उपयोग नहीं हो पाने का उल्लेख है। सौर और पवन बिजली मिलाकर कुल मात्रा 378.52 MU बताई गई, जो उपलब्ध नवीकरणीय उत्पादन का 1.28 प्रतिशत थी।

3. गुजरात और राजस्थान का नाम क्यों आया?

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों राज्यों का संयुक्त हिस्सा सौर और पवन बिजली की कुल कटौती का लगभग 79 प्रतिशत था। इन क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की बड़ी क्षमता होने के कारण ग्रिड और ट्रांसमिशन व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है।

4. बैटरी स्टोरेज इस समस्या को कैसे कम कर सकता है?

बैटरी अतिरिक्त बिजली को उस समय संग्रहित कर सकती है जब उत्पादन अधिक हो और मांग कम हो। बाद में यह बिजली मांग बढ़ने पर इस्तेमाल की जा सकती है। इससे मदद मिल सकती है, लेकिन परिणाम स्टोरेज क्षमता और लागत पर निर्भर करेंगे।

5. क्या बिजली की कटौती का मतलब सोलर पैनल बेकार हैं?

नहीं। सौर बिजली अब भी स्वच्छ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। कटौती यह दिखाती है कि उत्पादन क्षमता के साथ ग्रिड, ट्रांसमिशन, स्टोरेज और मांग प्रबंधन भी विकसित करने होंगे ताकि अधिक उपलब्ध बिजली का उपयोग हो सके।

निष्कर्ष: सितंबर में सौर बिजली की कटौती बताती है कि भारत को नई उत्पादन क्षमता के साथ बेहतर ट्रांसमिशन और स्टोरेज भी चाहिए। ग्रिड में सुधार, बैटरी और मांग का सही प्रबंधन बढ़ती सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग करने में मदद कर सकते हैं।

Disclaimer: आँकड़े प्रकाशित रिपोर्ट और उसमें उद्धृत विश्लेषण पर आधारित हैं। अंतिम संदर्भ के लिए Grid-India तथा संबंधित आधिकारिक रिपोर्ट देखें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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