यह लेख भारत में AI (Artificial Intelligence) के बदलते परिदृश्य, सॉवरेन AI की अवधारणा और HCLTech–Sarvam AI डील के रणनीतिक प्रभाव को समझाता है।
ज़्यादातर IT कंपनियों के लिए भारत हमेशा से एक पसंदीदा बाज़ार रहा है। भारत की आबादी और बड़े टैलेंट पूल ने ईमेल, सर्च, सोशल मीडिया से लेकर बैक ऑफिस तक के कामों के लिए ग्लोबल कंपनियों को देश की ओर आकर्षित किया है।
भारत में AI का बदलता परिदृश्य
आजकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है: भारत की बौद्धिक क्षमता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और दुनिया के सबसे बड़े यूज़र बेस में से एक होने के बावजूद, देश के पब्लिक और कमर्शियल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले ज़्यादातर AI सिस्टम विदेशी कंपनियों द्वारा बनाए गए हैं।
स्वदेशी AI की ओर शुरुआती कदम
शायद अब यह स्थिति बदल रही है। पिछले हफ़्ते, HCLTech ने घरेलू कंपनी Sarvam AI में 10.46 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी, जो कि एक शुरुआती कदम है। Sarvam को सीरीज़ B राउंड से कुल 234 मिलियन डॉलर मिले, जिसमें HCLTech का 150 मिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल था, जिससे यह कंपनी ‘यूनिकॉर्न’ बन गई।
रिलायंस, अडानी और टाटा जैसे कई भारतीय कॉर्पोरेट ग्रुप्स ने AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इंटरनेशनल कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। इन प्रोजेक्ट्स में डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने से लेकर एंटरप्राइज़ AI सर्विसेज़ और कंज्यूमर-फेसिंग AI एक्सेस तक सब कुछ शामिल है।
🚀 भारत में सॉवरेन AI की शुरुआत
- कंपनी: HCLTech & Sarvam AI
- निवेश: 150 मिलियन डॉलर
- लक्ष्य: स्वदेशी AI मॉडल विकसित करना
- फोकस: बैंकिंग, GovTech और एंटरप्राइज़ AI
- महत्व: विदेशी AI पर निर्भरता कम करना
- परिणाम: भारत में AI आत्मनिर्भरता की शुरुआत
अपनी पार्टनरशिप के तहत, HCLTech अपनी क्लाउड, इंजीनियरिंग और कंसल्टिंग सर्विसेज़ के लिए OpenAI के अत्याधुनिक मॉडलों का इस्तेमाल करेगी। HCLTech को उम्मीद है कि Sarvam के साथ वह पारंपरिक भारतीय IT सर्विसेज़ मॉडल से आगे बढ़ पाएगी।
AI सॉवरेनिटी पर बढ़ता फोकस
HCLTech के CEO सी. विजयकुमार ने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ की शिवानी शिंदे के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि Sarvam इस बड़ी टेक कंपनी को “सॉवरेन AI” के मौके पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगी। इसमें बैंकिंग, इंश्योरेंस, GovTech और बड़ी कमर्शियल कंपनियों में एंटरप्राइज़ लेवल पर AI को अपनाना और नागरिकों के लिए सर्विसेज़ को नए सिरे से तैयार करने में AI का इस्तेमाल करना शामिल है।
उनके अनुसार, कंपनियाँ ग्लोबल स्तर पर बिज़नेस-स्पेसिफिक ज़रूरतों के लिए ‘फ्रंटियर मॉडलों’ से आगे सोचना शुरू कर सकती हैं, जहाँ डोमेन-स्पेसिफिक मॉडल या छोटे लैंग्वेज मॉडल ज़्यादा असरदार साबित हो सकते हैं। यह HCLTech की Sarvam डील की असल कार्य-योजना (प्लेबुक) है। भारतीय IT सर्विस कंपनियों ने सॉफ्टवेयर के दौर में इंटरनेशनल टेक कंपनियों द्वारा बनाए गए सिस्टम को लागू करके, उनमें बदलाव करके और उन्हें सपोर्ट करके अपना आकार बढ़ाया।
⚡ AI बनाम पारंपरिक IT मॉडल
- पुराना मॉडल: सिस्टम इंटीग्रेशन और सपोर्ट
- नया मॉडल: AI प्लेटफॉर्म और IP कंट्रोल
- जोखिम: विदेशी LLM पर निर्भरता
- फायदा: डेटा-सॉवरेन समाधान
- बदलाव: IT कंपनियाँ आर्किटेक्ट बन रही हैं
- भविष्य: AI-ड्रिवन कॉर्पोरेट इंटेलिजेंस
AI इस वैल्यू चेन के लिए खतरा पैदा करता है। अगर बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) और एजेंटिक प्लेटफॉर्म भविष्य की कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी का आधार बनते हैं, तो जो कंपनियाँ इस आधार के सबसे करीब होंगी, वे इसे सिर्फ़ लागू करने वाली कंपनियों की तुलना में ज़्यादा रणनीतिक फ़ायदा उठा सकती हैं।
AI में सांस्कृतिक पूर्वाग्रह का मुद्दा
पुणे की FLAME यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर डिजिटल लर्निंग के डायरेक्टर डॉ. सौरभ बजाज ने कहा, “मौजूदा पश्चिमी बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) मूल रूप से गैर-भारतीय ज्ञान के आधार तक सीमित हैं, जिनमें स्वाभाविक रूप से सांस्कृतिक और भाषाई पूर्वाग्रह होते हैं जो भारत की जटिल सच्चाई को नहीं समझ पाते।”
उन्होंने कहा, “असली सॉवरेन AI (संप्रभु AI) के लिए ऐसे लोकल LLM की ज़रूरत है जिन्हें भारतीय बारीकियों, स्थानीय बातचीत के तरीकों और स्थानीय डेटासेट को ध्यान में रखकर शुरू से बनाया गया हो।” AI-पावर्ड प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ‘Match It Up’ के क्रिएटर कुणाल खन्ना ने ‘Business Standard’ से बातचीत में कहा कि यह समझौता HCLTech को टेक्नोलॉजी स्टैक के सबसे निचले स्तर पर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) की सुरक्षा करने में सक्षम बनाता है।
खन्ना के अनुसार, “यह रणनीतिक मालिकाना हक उन्हें अपने कॉर्पोरेट और सरकारी ग्राहकों को बहुत ज़्यादा कस्टमाइज़्ड, गहराई से इंटीग्रेटेड और पूरी तरह से डेटा-सॉवरेन समाधान देने की सुविधा देता है।” “यह उनके काम को सिस्टम इंटीग्रेटर से बदलकर कॉर्पोरेट इंटेलिजेंस के मुख्य आर्किटेक्ट के रूप में बदल देता है, जिससे वे मूल रूप से प्राइवेसी और सुरक्षा सुनिश्चित कर पाते हैं।”
भारत की AI रणनीति का टेस्ट केस
AI-पावर्ड वीडियो एडिटिंग प्लेटफॉर्म CRAON के CEO और को-फाउंडर ऋषभ सागर हैं। Sarvam में हिस्सेदारी होने से HCLTech को लोगों, टेक्नोलॉजी और भारतीय व व्यावसायिक ज़रूरतों के हिसाब से बनाए गए प्रोडक्ट्स को प्रभावित करने की क्षमता मिलती है।
इंडस्ट्री के अधिकारियों के अनुसार, AI सॉवरेनिटी (AI पर अपना कंट्रोल) की ज़रूरत का एक उदाहरण अमेरिकी सरकार का एक्सपोर्ट-कंट्रोल ऑर्डर है, जो विदेशी कंपनियों को Anthropic के बेहतरीन AI मॉडल तक पहुँचने से रोकता है।
डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी Xoriant के चीफ ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर विनीत मोरोनी के अनुसार, Sarvam में HCLTech का निवेश भारत की सॉवरेन AI पॉलिसी के लिए एक बड़ा टेस्ट केस है। उन्होंने Business Standard को बताया कि इसके लिए “सिर्फ़ थ्योरी में आत्मनिर्भरता से हटकर असल कमर्शियल इस्तेमाल” की ओर बढ़ने की ज़रूरत है।
मोरोनी ने कहा, “असली डिजिटल इक्विटी का मतलब है उन बुनियादी वेट्स (weights), डेटा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंट्रोल रखना, जो ऐसे समय में ज़रूरी हैं जब विदेशी सरकारें रातों-रात फ्रंटियर मॉडल तक पहुँच रोक सकती हैं।”
खन्ना के अनुसार, Fable 5 की घटना ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को लोकल डेटा स्टोरेज के अलावा AI सॉवरेनिटी पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर किसी भारतीय AI एजेंट को अपनी पहचान सुरक्षित रूप से वेरिफाई करने या किसी दूसरे लोकल एजेंट से बातचीत करने के लिए विदेशी सर्वर से गुज़रना पड़ता है, तो हम असल डिजिटल आज़ादी खो देते हैं।”
हालाँकि, भारत को सिर्फ़ दिखावटी AI चैंपियन की ज़रूरत नहीं है। मॉडल ऐसे होने चाहिए जो प्रैक्टिकल हों, जिनकी कीमत सही हो, और जो इतने सुरक्षित और भरोसेमंद हों कि बिज़नेस और सरकारें रोज़मर्रा के कामों में उन पर भरोसा कर सकें।
जानकारों के अनुसार, एक सॉवरेन मॉडल तभी फायदेमंद होता है जब उसे उन मुश्किल हालात में लागू किया जा सके जहाँ असल काम होता है, जैसे लोन प्रोसेसिंग, क्लेम प्रोसेसिंग, कस्टमर केयर, कई भाषाओं में पब्लिक सर्विस डिलीवरी, खरीद-फरोख्त (procurement), कंप्लायंस, डॉक्यूमेंट रिव्यू और फ्रंटलाइन ऑपरेशन्स।
AI का व्यावहारिक उपयोग और “एप्लाइड इंटेलिजेंस”
मोरोनी ने कहा, “आखिरकार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों को तभी सही मायने में फायदा पहुँचा सकता है जब इसे प्रोडक्ट बनाने, प्रोसेस चलाने और फैसले लेने के मुख्य तरीकों में शामिल किया जाए—जिसे हम ‘एप्लाइड इंटेलिजेंस’ कहते हैं।”
इस स्थिति में HCLTech की कॉर्पोरेट पहुँच बहुत अहम है। खुद को सिर्फ़ एक सीमित मॉडल लैब के तौर पर पेश करने के बजाय, Sarvam ने खुद को एक फुल-स्टैक AI कंपनी के तौर पर स्थापित किया है। इसने भारत में शुरू से तैयार किए गए कई मॉडल पेश किए हैं, जिनमें 105-बिलियन-पैरामीटर वाला रीजनिंग मॉडल और कंज्यूमर-ग्रेड हार्डवेयर पर चलने वाला 30-बिलियन-पैरामीटर वाला मॉडल शामिल है।
🤖 सॉवरेन AI का व्यावहारिक प्रभाव
- फोकस: वास्तविक बिज़नेस समस्याओं का समाधान
- उपयोग: लोन, क्लेम, कस्टमर केयर
- लक्ष्य: भरोसेमंद और कम लागत AI सिस्टम
- क्षेत्र: सरकार और एंटरप्राइज़ सेवाएँ
- महत्व: डिजिटल स्वतंत्रता को मजबूत करना
- दिशा: “एप्लाइड इंटेलिजेंस” मॉडल
इसके काम में कन्वर्सेशनल AI, वॉइस, विज़न, कॉर्पोरेट इस्तेमाल के मामले और सरकारी एप्लीकेशन शामिल हैं। सर्वम (Sarvam) भले ही मॉडल लेयर बना ले, लेकिन HCLTech बड़े संगठनों में ऐसे मॉडल को लागू करने, उन्हें मौजूदा तकनीकी सिस्टम के साथ जोड़ने और किसी खास इंडस्ट्री की खास समस्याओं को हल करने के लिए उन्हें ढालने में मदद कर सकती है। खन्ना के अनुसार, लोगों की स्वीकार्यता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि भारतीय AI कंपनियाँ बातचीत वाले इंटरफ़ेस से आगे बढ़कर क्या करती हैं।
AI का भविष्य और भारत का डिजिटल ढांचा
उन्होंने कहा, “बातचीत वाले इंटरफ़ेस से बुनियादी, ऑटोनॉमस इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ना भारतीय AI के लिए अगला अहम पड़ाव है।” “जब भारतीय AI कंपनियाँ हमारे MSME और कॉर्पोरेशन की रोज़मर्रा की कामकाज की प्रक्रियाओं में पूरी तरह से शामिल हो जाएँगी, तो लोगों की स्वीकार्यता असल में बढ़ेगी।”
अब तक, भारत की स्वतंत्र AI पहल ज़्यादातर सरकारी मदद पर निर्भर रही है। ₹10,371.92 करोड़ के पाँच साल के बजट के साथ, IndiaAI मिशन का लक्ष्य AI को अपनाने, कंप्यूट की उपलब्धता, डेटा की गुणवत्ता, स्वदेशी मॉडल के विकास और स्टार्टअप फाइनेंसिंग को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, भारत ने लोकल डेटा मैनेजमेंट, आवाज़ के इस्तेमाल और भारतीय भाषाओं पर ज़ोर देते हुए घरेलू AI मॉडल जारी किए हैं। सागर के अनुसार, सरकारी खरीद शुरुआती तौर पर अपनाने में मदद कर सकती है, लेकिन लंबी अवधि की असली परीक्षा कहीं और है।
उन्होंने कहा, “लंबे समय तक स्वीकार्यता तभी मिलेगी जब ऐसी समाधान तैयार किए जाएं जो कंपनियों और उपभोक्ताओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान करें, लेकिन शुरुआती दौर में सरकारी समर्थन मददगार हो सकता है।” “भारतीय AI व्यवसायों को एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, मीडिया, हेल्थकेयर, शिक्षा और वित्तीय सेवाओं जैसे उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
📊 भारत की AI ग्रोथ रणनीति
- मिशन: IndiaAI कार्यक्रम
- बजट: ₹10,371.92 करोड़
- फोकस: कंप्यूट, डेटा और स्टार्टअप सपोर्ट
- लक्ष्य: स्वदेशी AI मॉडल विकास
- उद्योग: हेल्थ, फाइनेंस, एजुकेशन
- रणनीति: सरकारी + निजी साझेदारी
खन्ना के अनुसार, निजी पूंजी और सरकारी समर्थन एक-दूसरे के पूरक हैं। “IndiaAI मिशन के तहत सरकारी मदद एक ज़बरदस्त बढ़ावा देने वाली चीज़ है। यह ज़रूरी कानूनी और स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क बनाती है और शुरुआती बड़े कंप्यूटिंग खर्चों के जोखिम को कम करने में मदद करती है,” उन्होंने कहा। “HCLTech जैसी कंपनियों से मिलने वाली प्राइवेट फंडिंग, इन समाधानों को दुनिया भर में ले जाने के लिए ज़रूरी ऑपरेशनल स्केल, मार्केट डिसिप्लिन और एंटरप्राइज़ डिस्ट्रीब्यूशन देती है।”
Sarvam को HCLTech की फंडिंग से आर्थिक और जागरूकता के मामले में फ़ायदा हो सकता है, लेकिन आगे का रास्ता मुश्किल है। बड़े मॉडल को ट्रेनिंग और सर्विसिंग के लिए महंगे ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है। मॉडल की परफ़ॉर्मेंस में लगातार सुधार होना चाहिए।
इनफ़रेंस की लागत को कंट्रोल करना ज़रूरी है। बिज़नेस कस्टमर तेज़ी से विकसित हो रहे ओपन-सोर्स कॉम्पिटिटर और दुनिया भर के क्लोज़्ड मॉडल, दोनों के मुकाबले Sarvam का मूल्यांकन करेंगे। बिज़नेस तभी भुगतान करेंगे जब प्रोडक्ट सफल होगा, जबकि सरकारी एजेंसियां घरेलू AI की मदद कर सकती हैं।
आसान शब्दों में कहें तो, Sarvam को यह दिखाना होगा कि सॉवरेनिटी (संप्रभुता) को सिर्फ़ एक राष्ट्रीय लक्ष्य के बजाय एक कमर्शियल फ़ायदे के तौर पर भी बेचा जा सकता है।
Moroney के अनुसार, “यह समझौता यह परखेगा कि क्या भारत एक ऐसा देसी, मल्टीलिंगुअल AI इकोसिस्टम बना सकता है जो कड़े स्थानीय गवर्नेंस नियमों को पूरा करे और साथ ही ग्लोबल बिज़नेस में अपनाए जाने के लिए काफ़ी कॉम्पिटिटिव भी हो।”
Sagar के अनुसार, HCLTech का निवेश एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन सफलता का फ़ैसला सिर्फ़ एक लेन-देन से नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि “असली सफलता तब मिलेगी जब भारतीय AI स्टार्टअप बड़े पैमाने पर अपनाए जाएंगे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉम्पिटिटिव समाधान बनाएंगे और टिकाऊ बिज़नेस स्थापित करेंगे।” “अभी शुरुआती दौर ही चल रहा है।”
Bajaj के अनुसार, अगर Sarvam के मॉडल पांच साल में सफल हो जाते हैं, तो वे मौजूदा कंप्यूटर लागत के एक छोटे से हिस्से में घरेलू कॉर्पोरेट प्लेटफ़ॉर्म, स्थानीय ई-गवर्नेंस और नागरिकों के लिए ज़रूरी अहम ऑपरेशन्स के लिए स्टैंडर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाएंगे।
Bajaj के अनुसार, “असफलता का मतलब होगा कि Sarvam विदेशी फ़ाउंडेशन मॉडल के ऊपर सामान्य कंसल्टेंसी लेयर या सतही एप्लीकेशन रैपर बनाने तक ही सीमित रह जाए, क्योंकि वह अत्याधुनिक R&D के लिए ज़रूरी भारी-भरकम पूंजीगत खर्च को बनाए रखने में असमर्थ हो।”
“अगर भारत अपने मुख्य इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मूल रूप से विदेशी API पर निर्भर रहता है, तो उसकी सॉवरेन AI रणनीति विफल हो जाएगी।”
यह चेतावनी मददगार है क्योंकि यह दो संभावित भविष्य के बीच अंतर करती है। एक स्थिति में Sarvam इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाता है। दूसरी स्थिति में, यह AI सेवाओं की एक अतिरिक्त लेयर बन जाता है।
अगर यह दांव सफल होता है, तो इसके नतीजे Sarvam और HCLTech से कहीं आगे जा सकते हैं। Bajaj के अनुसार, HCLTech का निवेश बदलाव लाता है। यह एक लंबे समय से चला आ रहा ट्रेंड है जिसमें भारतीय कंपनियाँ घरेलू डीप-टेक को बढ़ावा देने के बजाय विदेशी टेक्नोलॉजी सप्लायर्स पर निर्भर रहती हैं।
उन्होंने कहा, “एक सफल ‘सर्वम’ (Sarvam) कॉर्पोरेट इंडिया के लिए घरेलू AI स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने का एक मॉडल बनाता है, जो यह दिखाता है कि भारतीय फाइनेंस प्रभावी ढंग से स्वदेशी बुनियादी रिसर्च का विस्तार कर सकता है।”
खन्ना ने कहा, “जैसे-जैसे ये मॉडल आगे बढ़ेंगे, हम एक स्वाभाविक बदलाव देखेंगे जिसमें भारतीय कंपनियाँ सिर्फ़ AI का लाइसेंस लेने से आगे बढ़कर, लोकल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर में सक्रिय रूप से निवेश करेंगी और उसे मिलकर बनाएँगी।”
आने वाले सालों में यह पता चलेगा कि सर्वम (Sarvam) मॉडल लॉन्च करने के चरण से आगे बढ़कर, किस तरह से इसे बिज़नेस और सरकारी सिस्टम में नियमित रूप से इस्तेमाल में लाती है। अगर HCLTech ऐसा कर पाती है, तो उसका 150 मिलियन डॉलर का दाँव सिर्फ़ एक मुनाफ़े वाले स्टार्टअप वेंचर से कहीं ज़्यादा साबित हो सकता है। यह भारत की उस कोशिश का सबूत बन सकता है जिसके तहत वह ऑटोनॉमस AI को एक काम करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर विकसित कर रहा है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी हेतु है, किसी निवेश सलाह के रूप में न लें।

