भारत और ब्रिटेन के बीच सामाजिक सुरक्षा योगदान को लेकर नया समझौता उन कर्मचारियों के लिए अहम है, जिन्हें उनकी कंपनी कुछ वर्षों के लिए दूसरे देश में काम करने भेजती है। ऐसे मामलों में पहले कर्मचारी को अपने देश में योगदान जारी रखने के साथ-साथ काम वाले देश में भी भुगतान करना पड़ सकता था। 15 जुलाई 2026 से लागू Double Contributions Convention (DCC) के तहत पात्र कर्मचारियों को दो देशों में एक साथ सामाजिक सुरक्षा योगदान देने से छूट की अवधि 52 सप्ताह से बढ़ाकर 60 महीने कर दी गई है।
India-UK DCC क्या है और क्यों जरूरी है?
सामाजिक सुरक्षा योगदान वह रकम है, जो कर्मचारी और नियोक्ता पेंशन, रिटायरमेंट बचत और कुछ अन्य लाभों के लिए जमा करते हैं। आम तौर पर यह योगदान उस देश में दिया जाता है, जहां कर्मचारी काम करता है। भारत और ब्रिटेन का DCC समझौता अस्थायी रूप से दूसरे देश में भेजे गए पात्र कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को दोनों देशों में एक साथ योगदान देने से बचाने के लिए बनाया गया है।
इस व्यवस्था से कर्मचारी का सामाजिक सुरक्षा रिकॉर्ड उसके मूल देश में बना रह सकता है। इससे योगदान दो अलग-अलग देशों में बंटने या रिकॉर्ड में अंतर आने की आशंका कम होती है। नियमों का लाभ पाने के लिए कर्मचारी को समझौते की शर्तें पूरी करनी होंगी।
📌 DCC समझौते की मुख्य बातें
- लागू होने की तारीख: 15 जुलाई 2026
- छूट की अवधि: पात्र कर्मचारियों के लिए अधिकतम 60 महीने
- भारत में योगदान: पात्र भारतीय कर्मचारी EPF में योगदान जारी रख सकते हैं
- ब्रिटेन में योगदान: पात्र कर्मचारियों को UK National Insurance Contributions (NICs) से छूट मिल सकती है
- मुख्य उद्देश्य: एक ही अस्थायी काम के लिए दो देशों में सामाजिक सुरक्षा योगदान से बचाना
पहले क्या नियम था और अब क्या बदला है?
पहले, दूसरे देश में अस्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारियों पर दोनों देशों के घरेलू नियम लागू हो सकते थे। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी को UK National Insurance Contributions यानी NICs देना पड़ सकता था। इसी तरह भारत में काम करने वाले पात्र ब्रिटिश कर्मचारी को Employees’ Provident Fund यानी EPF में योगदान करना पड़ सकता था।
EPF भारत की रिटायरमेंट बचत योजना है, जिसमें पात्र कर्मचारी और नियोक्ता रकम जमा करते हैं। NICs ब्रिटेन की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। इनके योगदान से UK State Pension और कुछ अन्य लाभों की पात्रता तय करने में मदद मिलती है। पहले ब्रिटेन के नियमों के तहत कुछ कर्मचारियों को शुरुआती 52 सप्ताह तक छूट मिल सकती थी। नए समझौते ने पात्र अस्थायी नियुक्तियों के लिए यह अवधि बढ़ाकर 60 महीने कर दी है।
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की 17 जून 2026 की जानकारी के अनुसार, यह समझौता अस्थायी नियुक्तियों के दौरान भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को ब्रिटेन में दोहरा सामाजिक सुरक्षा योगदान देने से राहत देने के लिए है। शुरुआत में तीन साल की अवधि का प्रस्ताव था, लेकिन लागू समझौते में इसे पांच साल कर दिया गया।
UK में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों पर असर
भारत में स्थित कंपनी द्वारा अस्थायी रूप से ब्रिटेन भेजे गए पात्र कर्मचारी अधिकतम 60 महीने तक UK NICs से छूट पा सकते हैं। इस दौरान वे भारत की EPF योजना में योगदान जारी रखेंगे, जिससे उनका भारतीय सामाजिक सुरक्षा रिकॉर्ड बना रह सकता है। यह छूट अपने आप सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होती, इसलिए नियुक्ति और योगदान से जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है।
ऐसे कर्मचारियों को समझौते के तहत अस्थायी रूप से भेजा गया कर्मचारी यानी detached worker माना जा सकता है। हालांकि, UK NICs से छूट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि इस अवधि में वे ब्रिटेन की State Pension या अन्य योगदान आधारित लाभों के लिए पात्रता बना रहे होंगे। वे भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत बने रहेंगे।
यदि कोई व्यक्ति खुद ब्रिटेन जाकर वहां की स्थानीय कंपनी में नौकरी शुरू करता है, तो सामान्य तौर पर उसे नौकरी शुरू होने से ही UK NICs देने होंगे। यह समझौता मुख्य रूप से उस कर्मचारी के लिए है, जिसे उसका मौजूदा नियोक्ता सीमित अवधि के लिए दूसरे देश भेजता है। नियमों के बारे में अधिक जानकारी के लिए ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
🇬🇧 UK कर्मचारियों के लिए भारत में नियम
- EPF की सामान्य व्यवस्था: पात्र विदेशी कर्मचारी International Workers के रूप में कवर हो सकते हैं
- योगदान की दर: सामान्य नियमों में कर्मचारी और नियोक्ता का योगदान प्रासंगिक वेतन का 12%-12% हो सकता है
- DCC का लाभ: पात्र UK कर्मचारी और नियोक्ता भारत में EPF योगदान से अधिकतम 60 महीने की छूट पा सकते हैं
- योगदान जारी रहेगा: इस दौरान वे ब्रिटेन की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान देते रहेंगे
- फायदा: UK State Pension के लिए योगदान रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद मिल सकती है
भारत में काम करने वाले ब्रिटिश कर्मचारियों के लिए बदलाव
ब्रिटेन की कंपनी द्वारा अस्थायी रूप से भारत भेजे गए पात्र कर्मचारी और उनके नियोक्ता भी पांच साल तक EPF योगदान से छूट पा सकते हैं। सामान्य नियमों के तहत पात्र अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों के लिए कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों का योगदान लागू वेतन आधार का 12% हो सकता है। DCC की शर्तें पूरी होने पर वे भारत में EPF योगदान देने के बजाय ब्रिटेन की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान जारी रख सकते हैं।
इससे कर्मचारियों के योगदान का रिकॉर्ड उनके अपने देश में बना रह सकता है। हालांकि, छूट के लिए नियुक्ति की अवधि, नियोक्ता और कर्मचारी की स्थिति तथा समझौते की अन्य शर्तें देखना जरूरी है।
किन कर्मचारियों को छूट नहीं मिलेगी?
यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आने-जाने वाले हर कर्मचारी पर लागू नहीं होता। यदि कोई भारतीय निवासी खुद ब्रिटेन जाकर वहां के नियोक्ता के साथ स्थानीय नौकरी करता है, तो उसे आम तौर पर नौकरी शुरू होने से UK NICs देने होंगे।
यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति शुरू से ही 60 महीने से अधिक की है, तो उसे सामान्य तौर पर असाइनमेंट की शुरुआत से ही ब्रिटेन के NICs देने पड़ सकते हैं। इसी तरह, कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य ब्रिटेन में अलग से नौकरी करता है, तो उसे अपने रोजगार पर लागू नियमों के अनुसार NICs देना होगा। मुख्य कर्मचारी को मिली छूट परिवार के सदस्यों पर अपने आप लागू नहीं होती।
क्या वीजा नियमों या वेतन में भी बदलाव होगा?
नहीं। DCC सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़ा समझौता है। इससे ब्रिटेन के आव्रजन नियम, वीजा की शर्तें या देश में प्रवेश पर नियंत्रण नहीं बदलता। यह भारतीय कर्मचारियों को अपने आप ब्रिटेन में काम करने की अनुमति भी नहीं देता और न ही भारतीय कर्मचारियों को नियुक्त करना सस्ता बनाता है।
भारतीय कर्मचारियों को संबंधित वीजा, प्रायोजन और वेतन की शर्तें पूरी करनी होंगी। उदाहरण के लिए, Senior or Specialist Worker वीजा के लिए लागू न्यूनतम वेतन या संबंधित नौकरी की तय दर जैसी शर्तें हो सकती हैं। वीजा आवेदन शुल्क, Immigration Health Surcharge (IHS), Certificate of Sponsorship और लागू होने पर Immigration Skills Charge जैसे खर्च भी अलग से लग सकते हैं। ये रकम और शर्तें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक सरकारी जानकारी देखना जरूरी है।
यदि कर्मचारी और नियोक्ता जरूरी वीजा या रोजगार संबंधी शर्तें पूरी नहीं करते, तो उन्हें वीजा नहीं मिलेगा और वे DCC का लाभ भी नहीं ले पाएंगे। इसलिए विदेश में काम करने की योजना बनाते समय सामाजिक सुरक्षा छूट और इमिग्रेशन नियमों को अलग-अलग समझना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. India-UK DCC कब लागू हुआ?
भारत और ब्रिटेन के बीच Double Contributions Convention 15 जुलाई 2026 से लागू हुआ। यह पात्र कर्मचारियों की अस्थायी विदेशी नियुक्तियों के दौरान दो देशों में सामाजिक सुरक्षा योगदान देने की समस्या कम करने के लिए है।
2. भारतीय कर्मचारी UK NICs से कितने समय तक छूट पा सकते हैं?
समझौते की शर्तें पूरी करने वाले भारतीय कर्मचारियों को ब्रिटेन में अस्थायी नियुक्ति के दौरान अधिकतम 60 महीने तक UK NICs से छूट मिल सकती है। इस अवधि में वे भारत की EPF योजना में योगदान जारी रखते हैं।
3. क्या ब्रिटेन में स्थानीय नौकरी करने वाले भारतीयों को भी छूट मिलेगी?
आम तौर पर नहीं। यदि कोई व्यक्ति खुद ब्रिटेन जाकर वहां के नियोक्ता के साथ स्थानीय नौकरी शुरू करता है, तो उसे सामान्य नियमों के अनुसार नौकरी शुरू होने से UK NICs देना पड़ सकता है।
4. क्या DCC से UK का वर्क वीजा आसानी से मिल जाएगा?
नहीं। DCC केवल सामाजिक सुरक्षा योगदान से संबंधित है। वीजा, प्रायोजन, वेतन और अन्य आव्रजन शर्तें अलग हैं और कर्मचारियों तथा नियोक्ताओं को उन्हें पूरा करना होगा।
5. क्या कर्मचारी के परिवार को भी सामाजिक सुरक्षा छूट मिलेगी?
नहीं, मुख्य कर्मचारी को मिलने वाली छूट परिवार के सदस्यों पर अपने आप लागू नहीं होती। यदि परिवार का कोई सदस्य ब्रिटेन में नौकरी करता है, तो उसे अपने रोजगार और लागू नियमों के अनुसार योगदान देना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
भारत-ब्रिटेन DCC पात्र कर्मचारियों को अस्थायी विदेशी नियुक्ति के दौरान दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से राहत दे सकता है। पांच साल की छूट उपयोगी है, लेकिन इसका लाभ नियुक्ति की शर्तों पर निर्भर है। यात्रा या नौकरी शुरू करने से पहले सरकारी नियमों की पुष्टि करें।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। निर्णय लेने से पहले नवीनतम आधिकारिक सरकारी नियमों और विशेषज्ञ सलाह की पुष्टि करें।