भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग स्टेशन बनाने की जरूरत भी बढ़ रही है। इस क्षेत्र में कारोबार शुरू करने वाले उद्यमियों को जमीन, बिजली कनेक्शन, चार्जर और तकनीकी व्यवस्था के लिए पूंजी चाहिए। इसी जरूरत को देखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के Indian Bank ने IND Green Charge नाम से वित्तपोषण योजना शुरू की है। 1 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के शेष पांच महीनों में इस योजना के तहत 100 करोड़ रुपये का कर्ज देने का लक्ष्य रखा है। बैंक ने अगले वित्त वर्ष के लिए 250 करोड़ रुपये का lending target भी बताया है।
Indian Bank की IND Green Charge योजना क्या है?
Economic Times और Moneycontrol की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, IND Green Charge योजना सार्वजनिक, captive और fleet charging stations को वित्त उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। इसमें standalone और franchise दोनों तरह के मॉडल शामिल हैं। बैंक के MD और CEO Binod Kumar ने बताया कि योजना के तहत अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का loan दिया जा सकता है और इसकी अधिकतम अवधि आठ वर्ष होगी। किसी भी आवेदक को कर्ज मिलने से पहले बैंक की पात्रता, परियोजना की व्यवहार्यता और repayment क्षमता की जांच से गुजरना होगा।
Public charging station आम लोगों के उपयोग के लिए बनाया जाता है। Captive charging station किसी खास कंपनी, संस्थान या वाहन समूह के लिए होता है। Fleet charging station टैक्सी, delivery vans, buses या अन्य व्यावसायिक वाहनों के समूह को चार्ज करने के लिए बनाया जा सकता है। अलग-अलग मॉडल में ग्राहक संख्या, बिजली की जरूरत, स्टेशन का स्थान और आय का तरीका अलग होता है। इसलिए बैंक प्रत्येक परियोजना को उसकी अपनी स्थिति के आधार पर देखेगा।
कर्ज की सीमा और अवधि कितनी है?
बैंक ने प्रति परियोजना 10 करोड़ रुपये तक कर्ज की सुविधा बताई है। अधिकतम repayment अवधि आठ साल हो सकती है। यह अधिकतम सीमा है, हर आवेदक को पूरी राशि या आठ साल की अवधि मिलना तय नहीं है। बैंक की जांच में परियोजना लागत, promoter contribution, अनुमानित उपयोग, आय, खर्च और ऋण चुकाने की क्षमता देखी जाएगी। किसी उद्यमी को आवेदन से पहले बैंक से ब्याज दर, processing fee, collateral, margin और अन्य शर्तों की लिखित जानकारी लेनी चाहिए।
Indian Bank ने चालू वित्त वर्ष के शेष पांच महीनों के लिए 100 करोड़ रुपये के lending target की बात कही है। अगले वित्त वर्ष के लिए लक्ष्य 250 करोड़ रुपये रखा गया है। इससे पता चलता है कि बैंक इस योजना को केवल सीमित पायलट के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि आगे बढ़ाने की योजना रखता है। हालांकि lending target का अर्थ यह नहीं कि पूरा पैसा पहले ही वितरित हो चुका है। वास्तविक वितरण योग्य परियोजनाओं और कर्ज की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
EV Charging Station कारोबार में अवसर
Electric vehicle बाजार में दोपहिया, तिपहिया, कार, बस और commercial fleet जैसे कई हिस्से शामिल हैं। प्रत्येक वाहन श्रेणी की charging जरूरत अलग होती है। दोपहिया वाहन के लिए कम क्षमता वाला चार्जर पर्याप्त हो सकता है, जबकि बस या भारी वाहन के लिए तेज और अधिक क्षमता वाले charger की जरूरत पड़ सकती है। स्टेशन लगाने वाले उद्यमी को यह समझना होगा कि उसके इलाके में किस तरह के वाहन अधिक हैं और वे कितनी बार चार्जिंग की मांग करेंगे।
रिपोर्ट में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में EV बिक्री 29.7 प्रतिशत बढ़कर 26.59 लाख इकाई पहुंची। रिपोर्ट में भारतीय EV charging station बाजार के 2025 में 6,139 करोड़ रुपये से बढ़कर 2030 तक 21,940 करोड़ रुपये होने का अनुमान भी दिया गया। ये बाजार अनुमान हैं, निश्चित भविष्य की कमाई नहीं। चार्जिंग स्टेशन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्थान कितना उपयुक्त है, बिजली की उपलब्धता कैसी है और ग्राहक नियमित रूप से वहां आते हैं या नहीं।
किसी स्टेशन की आय का अनुमान लगाते समय केवल कुल वाहन संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। उद्यमी को आसपास के प्रतिस्पर्धी स्टेशन, बिजली की लागत, किराया, रखरखाव, charger downtime, भुगतान प्रणाली और ग्राहक के ठहरने के समय का आकलन करना चाहिए। यदि स्टेशन ऐसी जगह लगाया जाए जहां EV उपयोगकर्ता कम आते हों, तो महंगे उपकरण होने के बावजूद आय कम रह सकती है। इसलिए परियोजना की व्यवहार्यता जांच कर्ज लेने से पहले जरूरी है।
छोटे कारोबार और MSME को कैसे मदद मिल सकती है?
Indian Bank ने कहा है कि यह योजना MSME और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने, रोजगार बनाने और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। Standalone और franchise मॉडल के कारण कारोबार शुरू करने के अलग रास्ते उपलब्ध हो सकते हैं। छोटे शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों में भी बैंक व्यवहार्य प्रस्तावों पर विचार करेगा। इसके लिए स्थानीय मांग, जगह की उपयुक्तता, अनुमानित उपयोग और कर्ज चुकाने की क्षमता देखी जाएगी। इसका मतलब है कि केवल बड़े महानगर ही संभावित बाजार नहीं हैं, लेकिन हर स्थान पर स्टेशन लाभदायक होगा, यह जरूरी नहीं।
बैंक ने AC, DC और high-capacity DC charging परियोजनाओं का अध्ययन करने तथा अलग-अलग उपयोग स्तरों पर stress testing करने की बात कही है। AC चार्जिंग सामान्यतः धीमी हो सकती है और कई वाहनों के लिए उपयुक्त होती है। DC charging तेज चार्जिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है, जबकि high-capacity DC उपकरण अधिक शक्ति की जरूरत वाले वाहनों के लिए बनाए जाते हैं। चार्जर चुनते समय वाहन संगतता, बिजली कनेक्शन, installation cost और भविष्य में उपकरण upgrade करने की क्षमता देखनी चाहिए।
उद्यमी को यह भी जांचना चाहिए कि स्थानीय बिजली वितरण कंपनी से कितनी load capacity मिल सकती है। जमीन का स्वामित्व या किराया समझौता, fire safety, स्थानीय अनुमति, parking layout और उपकरण की warranty भी महत्वपूर्ण हैं। कुछ परियोजनाओं में software आधारित भुगतान और दूर से निगरानी की व्यवस्था चाहिए। इन सभी लागतों को business plan में शामिल करना चाहिए ताकि loan repayment केवल आशावादी अनुमान पर आधारित न हो।
⚡ IND Green Charge योजना की मुख्य बातें
- बैंक: Indian Bank
- योजना: IND Green Charge
- FY27 लक्ष्य: ₹100 करोड़
- अगले वित्त वर्ष का लक्ष्य: ₹250 करोड़
- अधिकतम कर्ज: ₹10 करोड़
- अधिकतम अवधि: 8 वर्ष
- मॉडल: Public, captive और fleet charging
बैंक के लिए यह योजना नए lending segment में प्रवेश का अवसर है। EV charging infrastructure में कर्ज देने से बैंक को green finance का पोर्टफोलियो बढ़ाने में मदद मिल सकती है। लेकिन किसी भी अन्य व्यावसायिक कर्ज की तरह यहां भी default का जोखिम मौजूद है। बैंक को परियोजना की आय और लागत का सावधानी से मूल्यांकन करना होगा। उद्यमियों को भी केवल सरकारी या बैंकिंग समर्थन की खबर देखकर निवेश नहीं करना चाहिए, बल्कि अपनी परियोजना की वास्तविक मांग और लागत समझनी चाहिए।
आवेदन से पहले क्या तैयारी करें?
आवेदक को परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए, जिसमें स्थान, जमीन, बिजली की उपलब्धता, charger type, अनुमानित ग्राहक, लागत, संभावित आय और repayment plan शामिल हों। कंपनी या फर्म के वित्तीय रिकॉर्ड, पहचान दस्तावेज और अन्य बैंकिंग जानकारी भी मांगी जा सकती है। सटीक दस्तावेज और पात्रता के लिए Indian Bank की शाखा या आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लें। योजना की शर्तें बैंक के मूल्यांकन के अनुसार लागू होंगी।
EV charging क्षेत्र में काम शुरू करने वाले पाठकों के लिए Indian Bank की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी देखना उपयोगी होगा। आवेदन से पहले बैंक से ब्याज दर, सुरक्षा, शुल्क, मार्जिन और पूर्व भुगतान नियम लिखित रूप में समझें।
🔋 EV Business की जानकारी के लिए किताबें
Electric vehicle और charging infrastructure कारोबार को समझने के लिए Amazon पर यह किताब खोजें:
EV Charging Infrastructure Books देखें
योग्य खरीदारी पर WealthScopeNews को कमीशन मिल सकता है।
पाठकों के जरूरी सवाल
1. Indian Bank की IND Green Charge योजना किसके लिए है?
यह योजना सार्वजनिक, captive और fleet EV charging stations स्थापित करने वाले कारोबारियों और उद्यमियों के लिए है। बैंक standalone और franchise मॉडल दोनों के व्यवहार्य प्रस्तावों पर विचार कर सकता है।
2. इस योजना में अधिकतम कितना कर्ज मिल सकता है?
Indian Bank ने अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक कर्ज की सुविधा बताई है। वास्तविक मंजूर राशि परियोजना की लागत, पात्रता, वित्तीय स्थिति और बैंक की जांच पर निर्भर करेगी।
3. कर्ज चुकाने की अधिकतम अवधि कितनी है?
योजना के तहत अधिकतम अवधि आठ वर्ष बताई गई है। यह हर आवेदक को मिलने वाली तय अवधि नहीं है। बैंक परियोजना की प्रकृति और भुगतान क्षमता देखकर शर्तें तय करेगा।
4. क्या छोटे शहरों में भी EV charging station के लिए कर्ज मिल सकता है?
बैंक ने छोटे और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के व्यवहार्य प्रस्तावों पर विचार करने की बात कही है। वहां स्थानीय मांग, जगह, अनुमानित उपयोग और repayment क्षमता की जांच की जाएगी।
5. EV charging station शुरू करने से पहले क्या जांचना चाहिए?
उद्यमी को स्थान, बिजली कनेक्शन, वाहन संख्या, प्रतिस्पर्धी स्टेशन, charger लागत, रखरखाव और संभावित आय का आकलन करना चाहिए। पूरी परियोजना रिपोर्ट बनाकर बैंक से लिखित शर्तें समझनी चाहिए।
निष्कर्ष
IND Green Charge योजना EV charging infrastructure में उद्यमियों के लिए कर्ज का नया विकल्प खोलती है। ₹100 करोड़ का FY27 लक्ष्य इस क्षेत्र में बैंक की रुचि दिखाता है। परियोजना की सफलता सही स्थान और व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी है। कर्ज या कारोबार शुरू करने से पहले बैंक की शर्तें और परियोजना जोखिम जांचें।
