ITR में छोटी गलती पर राहत! ₹10 लाख का जुर्माना ITAT ने किया रद्द

आयकर रिटर्न (ITR) भरने वाले करदाताओं के लिए एक अहम राहत की खबर सामने आई है। चेन्नई ITAT के एक फैसले में ब्लैक मनी एक्ट, Schedule FA, विदेशी ESOP शेयरों की रिपोर्टिंग और ₹10 लाख के जुर्माने को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है। आइए जानते हैं पूरा मामला।

आयकर रिटर्न यानी ITR भरने वाले करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। चेन्नई स्थित ITAT ने एक मामले में ब्लैक मनी एक्ट के तहत लगाया गया ₹10 लाख का जुर्माना रद्द कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति से विदेशी ESOP शेयरों की जानकारी Schedule FA में गलती से छूट गई हो और टैक्स पहले ही चुकाया जा चुका हो, तो केवल इस आधार पर जुर्माना लगाना सही नहीं माना जा सकता।

ITAT ने क्यों रद्द किया ₹10 लाख का जुर्माना

यह मामला किशोर कुमार राजगोपाल और आयकर विभाग के बीच था। राजगोपाल को विदेश में काम करने के दौरान Vedanta Resources Plc (यूके) की ओर से ESOP के रूप में शेयर मिले थे। ये शेयर जर्सी में एक विशेष व्यवस्था के तहत रखे गए थे। जब उन्होंने आकलन वर्ष 2016-17 का आयकर रिटर्न दाखिल किया, तब उन्होंने इन विदेशी शेयरों का विवरण Schedule FA में नहीं दिया।

आयकर विभाग ने इसे ब्लैक मनी एक्ट की धारा 43 का उल्लंघन मानते हुए ₹10 लाख का जुर्माना लगा दिया। बाद में आयकर आयुक्त (अपील) ने भी इस फैसले को सही माना। इसके बाद करदाता ने ITAT में अपील की।

📌 मामले की मुख्य बातें

  • मामला: विदेशी ESOP शेयरों की जानकारी छूटना
  • जुर्माना: ₹10 लाख
  • कानून: ब्लैक मनी एक्ट, धारा 43
  • फैसला: ITAT ने जुर्माना रद्द किया
  • कारण: टैक्स पहले ही जमा था और गलती जानबूझकर नहीं थी

करदाता की दलील और ITAT की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान करदाता ने बताया कि जानकारी छूटना जानबूझकर नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय पहली बार विदेशी संपत्तियों की रिपोर्टिंग का नियम लागू हुआ था और शेयर जिस व्यवस्था के तहत रखे गए थे, उसके कारण भ्रम की स्थिति बन गई। उन्होंने यह भी बताया कि ESOP मिलने के समय उस पर टैक्स पहले ही काटा जा चुका था और बाद में शेयर बेचने पर हुए पूंजीगत लाभ पर भी उन्होंने नियमानुसार टैक्स चुकाया था।

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद ITAT ने पाया कि इस पूरे लेनदेन में सरकार के राजस्व का कोई नुकसान नहीं हुआ। ट्रिब्यूनल ने कहा कि शेयरों पर पहले ही टैक्स दिया जा चुका था और बाद में बिक्री से हुए लाभ पर भी कर जमा किया गया। ऐसे में केवल Schedule FA में जानकारी नहीं देने को विदेशी संपत्ति छिपाने की कोशिश नहीं माना जा सकता।

⚖️ फैसले से क्या सीख मिलती है

  • Schedule FA: विदेशी संपत्तियों की जानकारी सही भरें
  • टैक्स भुगतान: पहले से टैक्स जमा होना महत्वपूर्ण तथ्य
  • गलती: वास्तविक भूल और जानबूझकर छिपाने में अंतर
  • धारा 43: हर मामले में जुर्माना अनिवार्य नहीं
  • सावधानी: ITR भरते समय सभी विदेशी संपत्तियां जरूर घोषित करें

ट्रिब्यूनल ने क्या कहा

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि रिपोर्टिंग का नियम उस समय नया था और इस मामले में गलती जानबूझकर नहीं बल्कि वास्तविक भूल थी। इसलिए इस तरह के मामले में सीधे जुर्माना लगाना उचित नहीं है。

अपने फैसले में ITAT ने पहले दिए गए कुछ न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ब्लैक मनी एक्ट की धारा 43 में “may” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब है कि हर मामले में जुर्माना लगाना अनिवार्य नहीं है। संबंधित अधिकारी को प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखकर फैसला लेना चाहिए।

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि विदेशी संपत्तियों की सही जानकारी देना हर करदाता की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि किसी मामले में जानकारी गलती से छूट जाए, टैक्स पहले ही जमा हो चुका हो और आय छिपाने का कोई इरादा न हो, तो केवल तकनीकी चूक के आधार पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को Income Tax Return भरते समय सभी विदेशी संपत्तियों और वित्तीय हितों की जानकारी पूरी सावधानी के साथ दर्ज करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद या कानूनी परेशानी न हो।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी कर संबंधी निर्णय से पहले योग्य टैक्स विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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