जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रों की भूख हड़ताल को लेकर मामला चर्चा में है। CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि 3 अक्टूबर से जारी हड़ताल के कारण छात्रों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनके अनुसार, 19 अक्टूबर को यह आंदोलन 17वें दिन में पहुंच गया था।
John Brittas ने राष्ट्रपति से क्या अपील की?
जॉन ब्रिटास ने सोशल मीडिया मंच X पर राष्ट्रपति को लिखे पत्र की जानकारी साझा की। उन्होंने छात्रों के निष्कासन के आदेश वापस लेने, मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (CPO) मैनुअल के विवादित नियमों की समीक्षा करने और विद्यार्थियों की बाकी मांगों पर जल्द बातचीत करने का आग्रह किया।
ब्रिटास ने कहा कि JNU में बहस, विचारों की असहमति और लोकतांत्रिक चर्चा की परंपरा रही है। उनके मुताबिक, चुने हुए छात्र प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय से दूर रखने पर छात्र संघ के काम और विद्यार्थियों की आवाज उठाने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अधिनियम, 1966 का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति की विश्वविद्यालय के विजिटर के रूप में भूमिका की ओर भी ध्यान दिलाया। अधिनियम से जुड़ी जानकारी के लिए JNU की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
📌 JNU Hunger Strike: मुख्य बातें
- हड़ताल शुरू: 3 अक्टूबर 2026
- 17वां दिन: 19 अक्टूबर को आंदोलन 17वें दिन में था
- हस्तक्षेप की अपील: राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा
- मुख्य मुद्दा: छात्र प्रतिनिधियों का निष्कासन और CPO मैनुअल
- छात्रों की चिंता: स्वास्थ्य, समान अवसर, लैंगिक न्याय और कैंपस सुविधाएं
John Brittas कौन हैं?
जॉन ब्रिटास केरल से CPI(M) के नेता और राज्यसभा सांसद हैं। उनका जन्म 15 मई 1966 को कन्नूर जिले के पुलिकुरुम्बा में हुआ था। राज्यसभा की प्रोफाइल में उनका पेशा वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया प्रबंधन से जुड़ा बताया गया है। उन्होंने कालीकट विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध की पढ़ाई की है।
अप्रैल 2021 में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद वे वाणिज्य, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समेत कई संसदीय समितियों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने JNU में पढ़ाई भी की थी। इसी वजह से उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए।
JNU के छात्र भूख हड़ताल क्यों कर रहे हैं?
छात्र संघ के मुताबिक, आंदोलन की एक प्रमुख वजह निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई है। संघ अपने पदाधिकारियों के निष्कासन आदेश वापस लेने और उन्हें दोबारा छात्र संघ का काम करने देने की मांग कर रहा है। कुछ प्रतिनिधियों पर पहले हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद कार्रवाई की गई थी।
छात्रों ने CPO मैनुअल के नियमों पर भी सवाल उठाए हैं। इस मैनुअल में विरोध, सभा और प्रदर्शन के कुछ तरीकों के लिए जुर्माने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। छात्र संघ का कहना है कि इन नियमों की समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि इनके कारण विद्यार्थियों के विरोध दर्ज कराने और कैंपस मामलों में हिस्सा लेने के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
⚠️ छात्रों की प्रमुख मांगें
- निष्कासन आदेश: छात्र संघ के पदाधिकारियों पर लगी कार्रवाई वापस ली जाए
- CPO मैनुअल: विवादित नियमों की समीक्षा और बदलाव किया जाए
- कैंपस सुविधाएं: जर्जर बुनियादी ढांचे की मरम्मत पर ध्यान दिया जाए
- लैंगिक न्याय: यौन उत्पीड़न के खिलाफ GSCASH व्यवस्था बहाल की जाए
- जांच की मांग: IQAC के जरिए कथित भर्ती गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच हो
- समान अवसर: रोहित एक्ट के प्रस्ताव के अनुरूप Equal Opportunity Cell बनाया जाए
विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संघ के बयान
छात्र संघ ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बातचीत के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा के अनुसार, कुलपति संतिश्री धुलिपुड़ी पंडित 16 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल पर आईं, लेकिन निष्कासित छात्रों से बात किए बिना लौट गईं। छात्र संघ ने यह भी दावा किया कि हड़ताल के शुरुआती छह दिनों में उसके कुछ पदाधिकारियों की नियमित चिकित्सकीय जांच नहीं हुई। ये छात्र संघ के आरोप हैं।
दूसरी ओर, कुलपति के बयान के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 16 अक्टूबर की सुबह छात्रों से मिलने की कोशिश की गई, लेकिन उस समय प्रदर्शन स्थल पर कोई मौजूद नहीं था। प्रशासन ने कहा कि मानवीय आधार पर निष्कासित छात्रों को चिकित्सा सहायता दी जा रही है और पहले भी मांगों पर बातचीत हुई है। प्रशासन के मुताबिक, आगे भी चर्चा की जा सकती है।
इस तरह दोनों पक्षों के बयानों में बातचीत और चिकित्सा सहायता को लेकर मतभेद दिखाई देता है। छात्र संघ ने कहा है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, प्रशासन ने बातचीत के दौर होने की बात कही है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सभी आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
इस विवाद का समाधान छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत, मांगों की स्पष्ट समीक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर समय पर कार्रवाई से जुड़ा है। भूख हड़ताल लंबी चलने पर छात्रों की सेहत को लेकर जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए आगे की स्थिति प्रशासन के कदमों, छात्र संघ की प्रतिक्रिया और किसी संभावित बैठक पर निर्भर करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. JNU के छात्रों ने भूख हड़ताल कब शुरू की?
छात्र संघ के अनुसार, यह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 3 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई थी। 19 अक्टूबर को आंदोलन 17वें दिन में पहुंच गया था। छात्रों ने निष्कासन आदेश और CPO मैनुअल से जुड़े मुद्दों पर समाधान होने तक विरोध जारी रखने की बात कही।
2. जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति से क्या मांग की?
जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से JNU के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों के निष्कासन आदेश वापस लेने, CPO मैनुअल के विवादित प्रावधानों की समीक्षा कराने और विद्यार्थियों की बाकी शिकायतों का जल्द समाधान कराने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
3. CPO मैनुअल को लेकर छात्रों की आपत्ति क्या है?
छात्र संघ का कहना है कि मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय के मैनुअल में प्रदर्शन और सभाओं से जुड़े ऐसे नियम हैं जिनके तहत जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। संघ चाहता है कि इन प्रावधानों की समीक्षा हो, ताकि विद्यार्थियों की भागीदारी और विरोध दर्ज कराने के अधिकार प्रभावित न हों।
4. JNU छात्रों की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?
छात्र संघ ने कैंपस की खराब बुनियादी सुविधाएं सुधारने, यौन उत्पीड़न के खिलाफ GSCASH व्यवस्था बहाल करने, कथित भर्ती गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच कराने और समान अवसर प्रकोष्ठ को फिर से गठित करने की मांग भी उठाई है। इन मांगों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया आगे महत्वपूर्ण होगी।
5. क्या JNU प्रशासन ने छात्रों से बातचीत की है?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि मांगों पर बातचीत के दो दौर हुए हैं और आगे बैठकें हो सकती हैं। छात्र संघ ने बातचीत को लेकर प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं। इसलिए दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और आगे की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
JNU में भूख हड़ताल का विवाद छात्र प्रतिनिधियों के निष्कासन, CPO मैनुअल और कैंपस सुविधाओं से जुड़ा है। सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप मांगा है। अब समाधान के लिए प्रशासन और छात्र संघ के बीच भरोसेमंद बातचीत तथा छात्रों की सेहत पर ध्यान जरूरी है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। नए घटनाक्रम के लिए आधिकारिक जानकारी देखें।