सॉफ्टबैंक के निवेश वाली भुगतान तकनीक कंपनी जस्पे को वित्त वर्ष 2025-26 में 90 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 62 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। कंपनी ने पहली बार मुनाफा दर्ज करने के बाद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विदेशों में कारोबार बढ़ाने पर खर्च बढ़ाया है, जिसका असर उसकी कमाई पर पड़ा है।
जस्पे को 90 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा

हालांकि, घाटे के बावजूद कंपनी के राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में जस्पे का राजस्व 30 प्रतिशत बढ़कर 664 करोड़ रुपये हो गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 514 करोड़ रुपये था। कंपनी के मुताबिक, इस दौरान उसने अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने और नई तकनीक विकसित करने पर निवेश किया।
जस्पे के वित्तीय प्रदर्शन की मुख्य बातें
- शुद्ध घाटा: वित्त वर्ष 2025-26 में 90 करोड़ रुपये
- पिछले साल का मुनाफा: वित्त वर्ष 2024-25 में 62 करोड़ रुपये
- कुल राजस्व: 664 करोड़ रुपये
- राजस्व में बढ़ोतरी: सालाना आधार पर 30 प्रतिशत
- निवेश का प्रमुख क्षेत्र: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार
विदेशों में कारोबार बढ़ा रही है भुगतान तकनीक कंपनी
बेंगलुरु स्थित जस्पे ने विदेशों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। कंपनी अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र, यूरोप, अमेरिका, लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया के बाजारों में काम कर रही है। इन क्षेत्रों में वह बैंकों और बड़ी कंपनियों को भुगतान से जुड़ी तकनीकी सेवाएं देती है। इसके अलावा, कंपनी वास्तविक समय में भुगतान की सुविधा चलाने के लिए जरूरी तकनीक भी तैयार करती है।
कंपनी का दावा है कि वह दुनियाभर में 500 से अधिक कंपनियों के डिजिटल भुगतान में मदद करती है। उसके माध्यम से होने वाले भुगतानों की सालाना दर के आधार पर कुल राशि 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक है। कंपनी हर दिन 40 करोड़ से ज्यादा लेनदेन संभालने का भी दावा करती है।
जस्पे का वैश्विक कारोबार और तकनीकी विस्तार
- ग्राहक कंपनियां: 500 से अधिक कंपनियों के डिजिटल भुगतान में मदद का दावा
- भुगतान का आकार: सालाना दर के आधार पर 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक
- दैनिक लेनदेन: 40 करोड़ से ज्यादा लेनदेन संभालने का दावा
- अंतरराष्ट्रीय बाजार: एशिया-प्रशांत, यूरोप, अमेरिका, लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया
- प्रमुख निवेश: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भुगतान तकनीक का विकास
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निवेश बढ़ा रही है जस्पे
जस्पे के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी शीतल लालवानी के मुताबिक, कंपनी विदेशों में कारोबार बढ़ाने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी निवेश कर रही है। इससे निकट भविष्य में कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य भविष्य में बेहतर सेवाएं विकसित करना और ग्राहकों के लिए लंबे समय तक उपयोगी समाधान तैयार करना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कंपनी जाइन, ब्रीज बडी, ब्रीज यूनिवर्सल और जस्पे जीनियस जैसे मंचों पर काम कर रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य भुगतान सेवाओं को बेहतर बनाना और कारोबारियों को नई तकनीक उपलब्ध कराना है। शीतल लालवानी और विमल कुमार ने वर्ष 2012 में जस्पे की स्थापना की थी। कंपनी सैन फ्रांसिस्को, डबलिन, साओ पाउलो, सिंगापुर और दुबई जैसे शहरों में भी काम करती है।
कंपनी की सेवाओं और तकनीकी समाधानों के बारे में अधिक जानकारी के लिए जस्पे की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
जस्पे के घाटे और कारोबार से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. जस्पे को वित्त वर्ष 2025-26 में कितना घाटा हुआ?
जस्पे को वित्त वर्ष 2025-26 में 90 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 62 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर बढ़ते खर्च को इस बदलाव से जोड़ा गया है।
2. वित्त वर्ष 2025-26 में जस्पे का राजस्व कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में जस्पे का राजस्व 30 प्रतिशत बढ़कर 664 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का राजस्व 514 करोड़ रुपये था। इससे पता चलता है कि शुद्ध घाटे के बावजूद कंपनी की कमाई में वृद्धि दर्ज की गई।
3. जस्पे किन क्षेत्रों में भुगतान सेवाएं देती है?
जस्पे एशिया-प्रशांत क्षेत्र, यूरोप, अमेरिका, लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया के बाजारों में काम करती है। कंपनी बैंकों और बड़ी कंपनियों को डिजिटल भुगतान से जुड़ी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराती है। वह वास्तविक समय में भुगतान की सुविधा के लिए भी तकनीक विकसित करती है।
4. जस्पे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में क्यों निवेश कर रही है?
जस्पे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश करके भुगतान सेवाओं को बेहतर बनाने और कारोबारियों को नई तकनीक उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है। कंपनी का उद्देश्य भविष्य में उपयोगी समाधान विकसित करना है। हालांकि, इस तरह के निवेश से निकट भविष्य में वित्तीय खर्च बढ़ सकता है।
5. जस्पे की स्थापना कब और किसने की थी?
जस्पे की स्थापना वर्ष 2012 में शीतल लालवानी और विमल कुमार ने की थी। कंपनी का मुख्यालय बेंगलुरु में है और इसकी मौजूदगी कई अंतरराष्ट्रीय शहरों में भी है। यह बैंकों तथा बड़ी कंपनियों के लिए भुगतान से जुड़ी तकनीकी सेवाएं विकसित करती है।
निष्कर्ष
जस्पे के वित्तीय नतीजे बताते हैं कि बढ़ते राजस्व के बावजूद तकनीक और अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर निवेश से कंपनी को घाटा हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश भविष्य में कारोबार के अवसर बढ़ा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक असर आगामी वित्तीय नतीजों से स्पष्ट होगा।
अस्वीकरण
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। वित्तीय निर्णय लेने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।