इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र की कंपनियों डिक्सन टेक्नोलॉजीज और एम्बर एंटरप्राइजेज के प्रवर्तक अपनी निजी क्षमता में भारतीय मोबाइल फोन कंपनी लावा इंटरनेशनल में हिस्सेदारी खरीदने को लेकर बातचीत कर रहे हैं। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, यह निवेश आने वाले कुछ हफ्तों में तय हो सकता है। इससे लावा को स्मार्टफोन निर्माण बढ़ाने और मोबाइल के अलग-अलग हिस्सों का घरेलू उत्पादन विकसित करने में मदद मिल सकती है।
लावा में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी
लावा विस्तार के लिए करीब ₹500-600 करोड़ जुटाने की कोशिश कर रही है। इस प्रस्तावित निवेश के साथ कंपनी के कुछ कर्ज को दोबारा व्यवस्थित करने की संभावना भी बताई जा रही है। हालांकि, निवेश की अंतिम राशि और हिस्सेदारी कितनी होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लावा की बाजार हिस्सेदारी और सालाना बिक्री लंबे समय से सीमित रही है। 2025 में ₹30,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम थी।
कंपनी के लिए संस्थागत निवेश जुटाना आसान नहीं रहा है। वर्ष 2021 में लावा की आईपीओ योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी, जब बाजार नियामक ने कंपनी को पेशकश से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव कर उन्हें दोबारा जमा करने को कहा था। इसके बाद कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक हरि ओम राय की अक्टूबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी के मामले ने भी निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक उसकी कुल देनदारियां करीब ₹1,800 करोड़ थीं।
सरकारी प्रोत्साहन योजना से उम्मीद
लावा में संभावित निवेश ऐसे समय पर सामने आया है जब केंद्र सरकार ने भारतीय मोबाइल ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए ₹62,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है। 21 अगस्त को अधिसूचित इस योजना की अवधि पांच साल है। इसका उद्देश्य मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मोबाइल के हिस्सों और अन्य जरूरी सामान की घरेलू खरीद को बढ़ावा देना है।
लावा के लिए निवेश और प्रोत्साहन की बड़ी बातें
- संभावित निवेश: करीब ₹500-600 करोड़
- सरकारी योजना: ₹62,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना
- योजना अवधि: पांच वर्ष
- अतिरिक्त बिक्री प्रोत्साहन: 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत
- घरेलू हिस्सों पर लाभ: 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त
- घरेलू डिजाइन और शोध: 3 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन
मोबाइल के हिस्सों का उत्पादन बढ़ाने की योजना
योजना के तहत पात्र कंपनियों को अतिरिक्त बिक्री के आधार पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है। घरेलू स्तर पर बनाए गए हिस्सों के इस्तेमाल पर 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त लाभ का प्रावधान है। भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांड के लिए अलग व्यवस्था भी रखी गई है। घरेलू डिजाइन और शोध एवं विकास से जुड़े उत्पादों पर 3 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
लावा इस योजना के लिए आवेदन कर सकती है और भारतीय स्वामित्व तथा देश में उत्पाद विकास की क्षमता के कारण उसे इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। कंपनी का लक्ष्य केवल मोबाइल जोड़ने तक सीमित न रहकर मोबाइल के जरूरी हिस्सों का उत्पादन भी बढ़ाना है। लावा ने भारत में वर्ष 2015 से निर्माण शुरू किया था और उसकी सालाना उत्पादन क्षमता करीब चार करोड़ इकाइयों की बताई गई है।
अगले पांच वर्षों में ₹1,100 करोड़ निवेश
कंपनी अगले पांच वर्षों में करीब ₹1,100 करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है। इस रकम का इस्तेमाल डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, पीसीबी, बहुस्तरीय पीसीबी और मोबाइल के बाहरी ढांचे जैसे हिस्सों के निर्माण में किया जा सकता है। इससे कंपनी मोबाइल निर्माण के साथ-साथ एक बड़ा घरेलू आपूर्ति तंत्र तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
लावा के कारोबार की अहम जानकारी
- निर्माण की शुरुआत: भारत में वर्ष 2015 से
- सालाना क्षमता: करीब चार करोड़ इकाइयां
- नया निवेश: अगले पांच वर्षों में करीब ₹1,100 करोड़
- वित्त वर्ष 2025 आय: करीब ₹1,612 करोड़
- शुद्ध घाटा: करीब ₹323 करोड़
- विदेशी विस्तार: ब्रिटेन के स्मार्टफोन बाजार में प्रवेश
विदेशी बाजार में भी विस्तार की कोशिश
लावा ने विदेशों में भी अपने कारोबार को बढ़ाने की कोशिश फिर से शुरू की है। कंपनी ब्रिटेन के स्मार्टफोन बाजार में प्रवेश कर चुकी है, जो उसकी नई विदेशी विस्तार योजना का प्रमुख हिस्सा है। इससे पहले लावा मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भी अपने फोन बेचती थी, लेकिन बाद में भारत पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कुछ बाजारों में गतिविधियां कम कर दी गई थीं।
वित्तीय स्थिति अभी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025 में लावा की कुल आय करीब ₹1,612 करोड़ रही, जबकि उसे ₹323 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। दूसरी ओर, डिक्सन और एम्बर दोनों इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण सेवा क्षेत्र में काम करती हैं और लावा से प्रतिस्पर्धा भी करती हैं। ऐसे में लावा में उनके प्रवर्तकों की हिस्सेदारी उन्हें एक ऐसे कारोबार में भागीदारी दे सकती है, जिसके पास अपना मोबाइल ब्रांड होने के साथ दूसरे ब्रांड के लिए निर्माण करने का अनुभव भी है। लावा पहले एचएमडी/नोकिया और मोटोरोला जैसे बड़े ब्रांड के लिए मोबाइल तैयार और उपलब्ध करा चुकी है।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है। निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेज और विशेषज्ञ सलाह जरूर देखें।