अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित स्टार्टअप Marathon Fusion ने दावा किया है कि उसने फ्यूजन प्रक्रिया से निकलने वाले न्यूट्रॉन की मदद से पारे को स्थिर सोने में बदलने का प्रयोग किया है। कंपनी का कहना है कि उसका तरीका पहले दर्ज किए गए एक रिकॉर्ड से दस गुना बेहतर रहा। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि प्रयोग में कितना सोना बना और उसने अपने दावे के समर्थन में विस्तृत प्रयोगात्मक आंकड़े भी जारी नहीं किए हैं। इसलिए इस उपलब्धि को फिलहाल कंपनी का दावा समझना जरूरी है।
Marathon Fusion का Gold Production दावा क्या है?
21 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए संदेश में कंपनी ने इस प्रक्रिया को “हाई-रेट अल्केमी” कहा। कंपनी के अनुसार, उसने पारे को वास्तविक और स्थिर सोने में बदलने का प्रदर्शन किया है। उसने यह भी कहा कि उसके प्रयोग की दर CERN द्वारा 2025 में दर्ज किए गए रिकॉर्ड से दस गुना अधिक थी।
कंपनी ने अपने संदेश में यह भी बताया कि उसने आइसोटोप को अलग करने और उनकी मात्रा बढ़ाने की तकनीक पर काम किया है। उसका दावा है कि इस काम में उसने करीब 40 साल पुराने सोवियत रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अधिक तकनीकी जानकारी की जरूरत है।
सोना बनाने के दावे की मुख्य बातें
- कंपनी: Marathon Fusion
- स्थान: सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका
- दावा: फ्यूजन से निकले न्यूट्रॉन की मदद से पारे को सोने में बदलना
- घोषणा: 21 अक्टूबर 2026 को X पर साझा की गई
- महत्वपूर्ण कमी: बने सोने की मात्रा और विस्तृत प्रयोगात्मक आंकड़े जारी नहीं किए गए
पारे से सोना कैसे बन सकता है?
Marathon Fusion ने 2025 में प्रकाशित एक शोध पत्र में अपनी प्रस्तावित प्रक्रिया समझाई थी। इसमें ड्यूटेरियम और ट्रिटियम के फ्यूजन से पैदा होने वाले तेज न्यूट्रॉन का इस्तेमाल करके पारे के एक खास आइसोटोप, मर्करी-198, को मर्करी-197 में बदलने का विचार दिया गया था। इसके बाद रेडियोधर्मी मर्करी-197 समय के साथ बदलकर सोने के स्थिर आइसोटोप गोल्ड-197 में बदल सकता है।
इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन कहा जाता है। इसमें परमाणु के केंद्रक में बदलाव करके एक तत्व को दूसरे तत्व में बदला जाता है। यह सामान्य रासायनिक प्रक्रिया से अलग है, क्योंकि रासायनिक तरीकों से पारे को सीधे सोने में नहीं बदला जा सकता। कंपनी ने पहले अनुमान लगाया था कि एक गीगावाट तापीय क्षमता वाला फ्यूजन पावर प्लांट इस तरीके से साल में करीब दो टन सोना बना सकता है। यह अनुमान है, प्रमाणित व्यावसायिक उत्पादन नहीं।
CERN के रिकॉर्ड से क्या है अंतर?
यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन CERN ने 2025 में Large Hadron Collider में सीसे के परमाणु केंद्रकों की टक्कर से सोने के केंद्रक बनने की जानकारी दी थी। यह काम ALICE प्रयोग के जरिए मापा गया था। Marathon Fusion का कहना है कि उसका तरीका सोना बनाने की दर के मामले में उस रिकॉर्ड से आगे है, लेकिन कंपनी ने अभी तुलना की जांच के लिए पर्याप्त आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
इसलिए दोनों प्रयोगों की तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। किसी तत्व के परमाणु केंद्रक बन जाना और बड़ी मात्रा में उपयोगी, स्थिर सोना तैयार करना अलग बातें हैं। उत्पादन की मात्रा, प्रक्रिया की ऊर्जा जरूरत, लागत और लगातार काम करने की क्षमता जानने के बाद ही इसके व्यावहारिक महत्व का आकलन किया जा सकेगा। CERN की जानकारी के लिए CERN की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले आइसोटोप
- दूसरा लक्ष्य: मेडिकल उपयोग के लिए जरूरी रेडियोधर्मी आइसोटोप की कमी कम करना
- कॉपर-64: मेडिकल इमेजिंग में उपयोग होता है और इलाज में इसके इस्तेमाल पर भी शोध जारी है
- कॉपर-67: लक्षित रेडियोफार्मास्यूटिकल उपचारों के शोध और विकास में उपयोगी
- प्रस्तावित तरीका: जिंक पर फ्यूजन से निकले न्यूट्रॉन डालकर कुछ आइसोटोप तैयार करना
- मौजूदा स्थिति: तकनीक के बड़े स्तर पर उत्पादन और व्यावसायिक उपयोग की पुष्टि बाकी है
कैंसर उपचार के लिए आइसोटोप बनाने की योजना
कंपनी का कहना है कि उसका काम केवल सोना बनाने तक सीमित नहीं है। वह ऐसे रेडियोधर्मी आइसोटोप की कमी दूर करने में भी मदद करना चाहती है, जिनका उपयोग मेडिकल इमेजिंग और कुछ लक्षित कैंसर उपचारों में होता है। Marathon Fusion ने पहले जिंक पर फ्यूजन से उत्पन्न न्यूट्रॉन डालकर कॉपर-64 और कॉपर-67 बनाने का प्रस्ताव रखा था।
कॉपर-64 मेडिकल इमेजिंग में इस्तेमाल किया जाता है और इसके संभावित उपचार संबंधी उपयोगों पर भी अध्ययन हो रहा है। कॉपर-67 का उपयोग लक्षित रेडियोफार्मास्यूटिकल उपचारों के शोध और विकास में किया जाता है। फिर भी, किसी तकनीक का प्रस्ताव होना और अस्पतालों के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित आइसोटोप तैयार कर पाना अलग चरण हैं।
कंपनी का अगला लक्ष्य फ्यूजन रिएक्टर बनाना
Marathon Fusion ने बताया कि उसका तत्काल लक्ष्य सैन फ्रांसिस्को में ऐसा फ्यूजन रिएक्टर विकसित करना है, जिसमें कम जगह में अधिक शक्ति पैदा की जा सके। कंपनी ने कहा है कि वह तकनीक को बढ़ाते हुए हर महीने पावर डेंसिटी दोगुनी करने की कोशिश करेगी। पावर डेंसिटी का अर्थ किसी सिस्टम के आकार या आयतन के मुकाबले पैदा होने वाली शक्ति से है।
कंपनी के मुताबिक, छोटे रिएक्टरों के विकास से मिलने वाला अनुभव भविष्य में बड़े फ्यूजन पावर प्लांट बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन अभी सोने के व्यावसायिक उत्पादन की कोई समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। प्रयोग की मात्रा, लागत, ऊर्जा दक्षता और स्वतंत्र जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही इस तकनीक की वास्तविक उपयोगिता स्पष्ट होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या Marathon Fusion ने सच में पारे को सोने में बदल दिया है?
कंपनी ने ऐसा करने का दावा किया है, लेकिन उसने बने सोने की मात्रा या विस्तृत प्रयोगात्मक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए अभी इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं की जा सकती।
2. पारे से सोना बनाने की प्रक्रिया क्या है?
कंपनी की प्रस्तावित तकनीक में फ्यूजन से निकलने वाले न्यूट्रॉन पारे के परमाणु केंद्रक को बदलते हैं। एक रेडियोधर्मी आइसोटोप बाद में बदलकर स्थिर सोना बन सकता है। यह सामान्य रासायनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परमाणु प्रक्रिया है।
3. क्या इससे बाजार में सोना सस्ता हो जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। तकनीक को बड़े स्तर पर चलाने की लागत, ऊर्जा की जरूरत, उत्पादन की मात्रा और सुरक्षा जैसे पहलुओं की पुष्टि जरूरी है। कंपनी ने व्यावसायिक उत्पादन की समय-सीमा भी नहीं बताई है।
4. Marathon Fusion मेडिकल आइसोटोप क्यों बनाना चाहती है?
कंपनी का कहना है कि कुछ मेडिकल आइसोटोप की कमी दूर करना उसके काम का एक उद्देश्य है। कॉपर-64 इमेजिंग में उपयोग होता है, जबकि कॉपर-67 लक्षित उपचारों के शोध और विकास में काम आता है।
5. क्या कंपनी का फ्यूजन रिएक्टर तैयार हो चुका है?
कंपनी ने सैन फ्रांसिस्को में फ्यूजन रिएक्टर बनाने की योजना बताई है। उपलब्ध घोषणा के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि रिएक्टर तैयार होकर व्यावसायिक रूप से चलने लगा है।
निष्कर्ष
Marathon Fusion का दावा परमाणु तकनीक और मेडिकल आइसोटोप के क्षेत्र में दिलचस्प संभावना दिखाता है। लेकिन सोना बनाने की मात्रा, लागत और प्रयोग के विस्तृत नतीजे सामने आने बाकी हैं। स्वतंत्र पुष्टि और व्यावहारिक उत्पादन के आंकड़ों के बिना इसे अभी शुरुआती दावा ही मानना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर सार्वजनिक कंपनी के बयान पर आधारित है। दावों की स्वतंत्र पुष्टि और व्यावसायिक उपयोगिता के लिए आगे के तकनीकी आंकड़ों की जरूरत है।