मेटा ने किशोरों की सुरक्षा को लेकर अपने सोशल मीडिया प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका के प्रमुख अखबारों में पूरे पन्ने के विज्ञापन जारी किए हैं।
इन विज्ञापनों के जरिए कंपनी ने टिकटॉक और यूट्यूब से भी अपने प्लेटफॉर्म पर किशोरों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि बच्चों और किशोरों को सुरक्षित रखने के लिए केवल एक प्लेटफॉर्म पर नियम लागू करना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि प्रतिबंध बढ़ने पर वे दूसरे प्लेटफॉर्म का रुख कर सकते हैं।
मेटा ने किशोरों की सुरक्षा के लिए उठाई बड़ी मांग
यह मामला उस समझौते के बाद सामने आया है, जिसमें मेटा ने अमेरिका के कई राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर तक के समझौते पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत इंस्टाग्राम और फेसबुक पर किशोरों की सुरक्षा के लिए नए नियम लागू किए जाने हैं।

इनमें युवाओं द्वारा प्लेटफॉर्म पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करने जैसे उपाय भी शामिल हैं। हालांकि, इस समझौते की एक खास बात यह है कि मेटा को पूरी रकम तभी चुकानी होगी, जब उसके प्रतिद्वंद्वी भी अपने प्लेटफॉर्म पर इसी तरह के सुरक्षा उपाय और जुर्माने से जुड़ी शर्तें स्वीकार करेंगे।
मेटा का मानना है कि इस व्यवस्था से पूरे उद्योग में एक समान सुरक्षा मानक बनाने की कोशिश की जा सकती है। कंपनी ने अपने विज्ञापनों में कहा कि वह अकेले इस बदलाव को प्रभावी तरीके से लागू नहीं कर सकती। अगर टिकटॉक और यूट्यूब भी समान नियम अपनाते हैं, तो किशोरों को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहतर सुरक्षा मिल सकती है। इस अपील का मकसद दूसरी कंपनियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करना है।
टिकटॉक और यूट्यूब पर भी कानूनी दबाव
टिकटॉक और यूट्यूब पहले से ही नाबालिगों में सोशल मीडिया की कथित लत से जुड़े कई मामलों का सामना कर रहे हैं। इन कंपनियों के खिलाफ अमेरिका में चल रही कानूनी कार्रवाई में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने भी कहा है कि राज्य व्यापक समाधान चाहता है और स्नैप जैसी दूसरी कंपनियों से भी मेटा की तरह कदम उठाने की उम्मीद है।
🛡️ किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी अहम बातें
- मेटा की मांग: टिकटॉक और यूट्यूब भी किशोरों के लिए समान सुरक्षा उपाय अपनाएं
- समझौता: अमेरिका के कई राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर तक की शर्त
- नियम: युवाओं के प्लेटफॉर्म इस्तेमाल के समय को सीमित करने जैसे उपाय
- मुख्य चिंता: एक प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध के बाद किशोर दूसरे मंच पर जा सकते हैं
- कानूनी दबाव: बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर कई मामले चल रहे हैं
अखबारों के जरिए प्रतिस्पर्धियों पर बनाया दबाव
मेटा ने यह अभियान अमेरिका के कई बड़े अखबारों में शुरू किया है। गुरुवार और शुक्रवार से प्रकाशित हुए विज्ञापन पूरे सप्ताहांत तक जारी रहने की बात कही गई है। इनमें द न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, लॉस एंजिल्स टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क पोस्ट जैसे प्रमुख अखबार शामिल हैं। इस तरह अखबारों के जरिए सार्वजनिक अपील करके मेटा ने अपने प्रतिस्पर्धियों पर खुलकर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।
📰 मेटा के सार्वजनिक अभियान की खास बातें
- अभियान: अमेरिका के प्रमुख अखबारों में पूरे पन्ने के विज्ञापन
- अपील: टिकटॉक और यूट्यूब से समान सुरक्षा कदम उठाने की मांग
- प्रमुख अखबार: द न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और वॉल स्ट्रीट जर्नल सहित कई अखबार
- लक्ष्य: पूरे सोशल मीडिया उद्योग में समान सुरक्षा मानक बनाने की कोशिश
- पुराना उदाहरण: 2018 में डेटा विवाद के बाद भी मेटा ने अखबारों में सार्वजनिक संदेश दिया था
मेटा पहले भी अखबारों के जरिए दे चुकी है सार्वजनिक संदेश
मेटा इससे पहले भी अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक संदेश देने की रणनीति अपना चुकी है। साल 2018 में कंपनी, जिसे उस समय फेसबुक के नाम से जाना जाता था, कैंब्रिज एनालिटिका डेटा विवाद के बाद अमेरिकी और ब्रिटिश अखबारों में पूरे पन्ने के विज्ञापन लेकर सामने आई थी। उस मामले में करोड़ों फेसबुक उपयोगकर्ताओं के डेटा के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। तत्कालीन प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने विज्ञापनों के जरिए लोगों से माफी मांगी थी और इसे भरोसे से जुड़ा गंभीर मामला बताया था। इस बार कंपनी का ध्यान किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पूरे सोशल मीडिया क्षेत्र में समान नियम लागू कराने पर है।
Frequently Asked Questions
1. मेटा ने अखबारों में विज्ञापन क्यों दिए हैं?
मेटा ने टिकटॉक और यूट्यूब पर किशोरों की सुरक्षा के लिए समान नियम लागू करने का दबाव बनाने के लिए बड़े अखबारों में विज्ञापन दिए हैं। कंपनी का मानना है कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक जैसे सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
2. किशोरों के लिए मेटा के नए नियम क्या हैं?
नए नियमों में किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। इनमें प्लेटफॉर्म पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करना और युवाओं को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
3. मेटा और अमेरिकी राज्यों के बीच कितना समझौता हुआ?
मेटा ने अमेरिका के कई राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर तक के समझौते पर सहमति जताई है। इसके तहत कंपनी को किशोरों की सुरक्षा से जुड़े नए नियम अपनाने होंगे और कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी।
4. टिकटॉक और यूट्यूब से मेटा क्या चाहती है?
मेटा चाहती है कि टिकटॉक और यूट्यूब भी किशोरों की सुरक्षा के लिए उसके जैसे कदम उठाएं। कंपनी के अनुसार, केवल एक मंच पर सख्त नियम लगाने से पूरी समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि युवा दूसरे प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं।
5. सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा क्यों बढ़ा है?
अमेरिका में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर कई कानूनी मामले चल रहे हैं। इनमें कम उम्र के उपयोगकर्ताओं में प्लेटफॉर्म की कथित लत और मानसिक तथा सामाजिक प्रभावों को लेकर कंपनियों से जवाब मांगा जा रहा है।
निष्कर्ष
मेटा का नया अभियान दिखाता है कि किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा अब बड़ी चिंता बन चुकी है। कंपनी दूसरे प्लेटफॉर्म को भी समान नियम अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है, जिससे भविष्य में बच्चों के लिए इंटरनेट का माहौल ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश हो सकती है।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य समाचार उद्देश्य के लिए है और आधिकारिक कानूनी सलाह का विकल्प नहीं है।
