Mutual Fund SIP: 3-5 फंड काफी या ज्यादा SIP से बढ़ेगा जोखिम?

कई निवेशक पहले से 3 से 5 म्यूचुअल फंड में SIP चला रहे होते हैं, लेकिन फिर भी वे नया फंड जोड़ने के बारे में सोचते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा फंड रखने से रिटर्न और डायवर्सिफिकेशन बेहतर हो जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि SIP की संख्या से ज्यादा जरूरी यह है कि हर फंड का पोर्टफोलियो में एक अलग उद्देश्य हो।

Mutual Fund SIP: ज्यादा फंड जोड़ना जरूरी नहीं, सही संतुलन है महत्वपूर्ण

वेल्थी.इन के को-फाउंडर आदित्य अग्रवाल के अनुसार, अगर किसी निवेशक के पास पहले से 3-5 SIP हैं, तो उसे नया फंड जोड़ने से पहले यह देखना चाहिए कि मौजूदा सभी फंड अलग-अलग भूमिका निभा रहे हैं या नहीं। हर SIP का एक स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए।

📊 SIP पोर्टफोलियो में क्या रखें ध्यान?

  • फंड संख्या: ज्यादा फंड हमेशा बेहतर नहीं होते
  • उद्देश्य: हर SIP का अलग लक्ष्य होना चाहिए
  • लार्ज कैप: पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकते हैं
  • मिड और स्मॉल कैप: लंबी अवधि में ग्रोथ में मददगार
  • डेट और हाइब्रिड फंड: संतुलन बनाने में सहायक
  • समीक्षा: समय-समय पर पोर्टफोलियो जांचना जरूरी

उदाहरण के लिए, लार्ज कैप या फ्लेक्सी कैप फंड पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकते हैं, जबकि मिड कैप और स्मॉल कैप फंड लंबे समय में ग्रोथ के लिए मददगार हो सकते हैं। वहीं, हाइब्रिड, डेट, इंटरनेशनल या गोल्ड फंड पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने का काम कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के फंड लेने से ही बेहतर डायवर्सिफिकेशन नहीं मिलता। कई बार अलग-अलग कंपनियों के फंड भी एक जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। जैसे लार्ज कैप और फ्लेक्सी कैप फंड में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, ICICI बैंक, इंफोसिस और भारती एयरटेल जैसे शेयरों की हिस्सेदारी समान हो सकती है।

एक जैसे फंड में निवेश से बढ़ सकता है जोखिम

अगर दो फंड के पोर्टफोलियो में 50 से 60 प्रतिशत तक समान शेयर हैं, तो निवेशक को अपने निवेश की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि इससे एक ही तरह के निवेश के लिए दो बार पैसा लगाया जा सकता है।

निवेशकों को अपनी SIP का जोखिम भी अपने वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से तय करना चाहिए। बाजार में तेजी आने पर कई लोग ज्यादा मिड कैप और स्मॉल कैप फंड जोड़ लेते हैं, जिससे पोर्टफोलियो में जोखिम बढ़ सकता है। अगर किसी निवेशक का लक्ष्य पांच साल बाद घर के लिए डाउन पेमेंट जमा करना है, तो उसे यह देखना चाहिए कि उसका ज्यादातर पैसा बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले फंड में तो नहीं लगा है।

💡 SIP निवेश से पहले खुद से पूछें ये सवाल

  • जोखिम क्षमता: क्या बाजार गिरने पर लक्ष्य प्रभावित होगा?
  • गिरावट सहने की क्षमता: क्या 25-30% गिरावट में निवेश जारी रख पाएंगे?
  • फंड चयन: क्या हर फंड की भूमिका अलग है?
  • निवेश अवधि: लक्ष्य के अनुसार फंड चुना गया है?
  • पोर्टफोलियो समीक्षा: क्या नियमित जांच की जा रही है?
  • अनावश्यक फंड: क्या सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए निवेश किया गया है?

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि अगर बाजार में 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो क्या उनका लक्ष्य प्रभावित होगा। अगर जवाब हां है, तो SIP पोर्टफोलियो में जोखिम ज्यादा हो सकता है।

कई बार निवेशक 1,000-2,000 रुपये की छोटी SIP कई फंडों में शुरू कर देते हैं। इससे पोर्टफोलियो बड़ा जरूर दिखता है, लेकिन उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति हर महीने 25,000 रुपये की SIP पांच अलग-अलग फंडों में बांटता है और हर फंड का उद्देश्य अलग है, तो यह बेहतर रणनीति हो सकती है। लेकिन यही पैसा 10 फंडों में बांटने से ज्यादा फायदा नहीं मिल सकता और पोर्टफोलियो की निगरानी भी कठिन हो जाती है।

पूरे पोर्टफोलियो के प्रदर्शन पर दें ध्यान

निवेशकों को अलग-अलग SIP के रिटर्न देखने के बजाय पूरे पोर्टफोलियो के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना चाहिए। असली उद्देश्य यह होना चाहिए कि निवेश भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर रहा है या नहीं और जोखिम आपकी क्षमता के अनुसार है या नहीं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को हर 6 से 12 महीने में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर बदलाव करना चाहिए, ताकि निवेश उनके वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुसार बना रहे।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश करने से पहले वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना उचित है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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