ठीक उसी समय जब लोग भागलपुर के विक्रमशिला पुल के टूटे हुए खंभों वाली घटना को भूल ही रहे थे, एक और चिंताजनक स्थिति सामने आ गई—इस बार नालंदा से। सिर्फ़ 10 साल बाद ही, बिहारशरीफ़-कतरिसराय मुख्य मार्ग पर सकरी नदी के ऊपर बना एक पुल जर्जर हो गया है और ढहना शुरू हो गया है।
Intro: बिहार में पुलों की गुणवत्ता और निर्माण प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नालंदा जिले में सकरी नदी पर बना पुल समय से पहले जर्जर होने के कारण स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गए हैं।
नालंदा में पुल की हालत बनी चिंता का कारण

पुल की खुली हुई लोहे की सरिया और इसके कई टेढ़े-मेढ़े खंभे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका पैदा करते हैं। पुल की बिगड़ती हालत को देखते हुए सरकार ने एहतियात के तौर पर पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है, जिससे स्थानीय लोगों में डर फैल गया है।
जब नालंदा में भी ऐसी ही चिंताजनक स्थिति पैदा हुई, तब भागलपुर के विक्रमशिला पुल के खंभों में मौजूद ढांचागत खामियों—और उसके कारण कई दिनों तक बाधित रही यातायात व्यवस्था—को लेकर चल रही चर्चा अभी पूरी तरह थमी भी नहीं थी। अपने निर्माण के 10 साल के भीतर ही, बिहारशरीफ़-कतरिसराय मुख्य राजमार्ग पर बना सकरी नदी का पुल जर्जर होने लगा और ढहने की कगार पर पहुँच गया।
⚠️ नालंदा पुल संकट
- स्थान: बिहारशरीफ़-कतरिसराय मुख्य मार्ग
- नदी: सकरी नदी
- निर्माण अवधि: लगभग 10 वर्ष पहले
- मुख्य समस्या: पुल के खंभे झुके और सरिया बाहर निकली
- सरकारी कार्रवाई: पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद
- खतरा: किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका
पुल निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
पुल के कई खंभों के झुक जाने और लोहे की सरिया के बाहर निकल आने के कारण एक बड़ी आपदा का खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने एहतियात के तौर पर पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है। इस घटना के बाद बिहार में पुलों की गुणवत्ता और निर्माण प्रबंधन के मानकों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, बिहार के नालंदा ज़िले से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहाँ बिहारशरीफ़-कतरिसराय मुख्य मार्ग पर सकरी नदी के ऊपर बना एक पुल, भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। इस पुल का निर्माण अभी 10 साल पहले ही हुआ था, लेकिन अब यह पूरी तरह से ढह गया है और धँसना शुरू हो गया है। पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कंक्रीट की परत टूटकर गिर गई है और लोहे की सरिया बाहर निकल आई है; साथ ही, पुल के कुछ खंभे भी खतरनाक तरीके से झुक गए हैं। पुल की इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है।
प्रशासन ने बंद की आवाजाही
दरियापुर के पास सकरी नदी पर बने इस पुल का निर्माण, मिली जानकारी के अनुसार, लगभग दस साल पहले किया गया था। लेकिन अपनी अनुमानित जीवन-अवधि पूरी होने से काफी पहले ही, पुल का ढांचा जर्जर हो गया। बताया जा रहा है कि पुल की नींव के नीचे की ज़मीन अचानक धँस जाने के कारण पुल के कई खंभे झुक गए हैं। इसके अलावा, पुल के ऊपरी हिस्से में भी कई जगह दरारें पड़ गई हैं और लोहे की सरिया बाहर निकल आई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए, ज़िला प्रशासन ने किसी भी गंभीर दुर्घटना को रोकने के लिए तेज़ी से कदम उठाए और पुल के दोनों सिरों पर ईंटों के मज़बूत बैरियर बना दिए। इसके चलते, इस सड़क पर आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई है। लेकिन पुल पार करने के लिए, कई मोटरसाइकिल सवार अपनी जान जोखिम में डालते हुए अपनी मोटरसाइकिलों को बैरियर के ऊपर से उठाते हुए देखे जा रहे हैं।
🏗️ तकनीकी जांच में क्या सामने आया?
- जांच टीम: बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और NIT विशेषज्ञ
- स्थिति: पुल को “बेहद असुरक्षित” घोषित किया गया
- मुख्य कारण: नींव के नीचे जमीन धंसना
- सुझाव: तुरंत नया पुल बनाने की सिफारिश
- प्रभाव: नालंदा और शेखपुरा के बीच संपर्क प्रभावित
- स्थानीय आरोप: निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री का इस्तेमाल
तकनीकी जांच में बड़ा खुलासा
सूत्रों का दावा है कि हाल ही में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और NIT के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त तकनीकी टीम ने पुल का मुआयना किया था। टीम ने मुआयने के दौरान पुल को “बहुत ज़्यादा असुरक्षित” पाया और तुरंत एक नया पुल बनाने का सुझाव दिया। जांच के मुताबिक, मौजूदा पुल की वजह से किसी भी समय कोई बड़ी आपदा आ सकती है।
पुल के बंद होने से नालंदा और शेखपुरा के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों के बीच सीधा संपर्क टूट गया है। इन दोनों ज़िलों की सीमाओं के भीतर आने वाले कई गांवों के निवासियों को अब भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस इलाके की रोज़मर्रा की आवाजाही, व्यापार और खेती-बाड़ी काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर थी। स्थानीय किसान रंजीत कुमार के मुताबिक, पुल बंद होने की वजह से अब लोगों को कई किलोमीटर ज़्यादा गाड़ी चलानी पड़ रही है। वहीं, स्थानीय निवासी आमोद कुमार ने दावा किया कि पुल के इतनी तेज़ी से खराब होने की वजह इसके निर्माण के दौरान हुआ बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है।
लोगों में बढ़ा आक्रोश और डर
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता और उनकी निगरानी प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं, भले ही प्रशासन की सतर्कता ने फिलहाल के लिए एक बड़ी आपदा को टाल दिया हो। लोग यह जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, पुल सिर्फ़ 10 साल में ही क्यों ढह गया।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट्स और स्थानीय जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।
