क्या हर NRI को भारत में ITR भरना पड़ता है? जानें पूरा नियम

विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के नियम उनकी आय और रेजिडेंशियल स्टेटस पर निर्भर करते हैं। केवल एनआरआई (NRI) होने से आईटीआर दाखिल करने की बाध्यता समाप्त नहीं होती, इसलिए आयकर नियमों को समझना जरूरी है।

एनआरआई के लिए भारत में ITR दाखिल करने के नियम

विदेश में रहने वाला हर भारतीय अपने आप एनआरआई (NRI) होने के कारण आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने से मुक्त नहीं हो जाता। यदि किसी व्यक्ति की भारत में आय होती है, तो उसे आयकर कानून के तहत अपने रेजिडेंशियल स्टेटस और आय के प्रकार के आधार पर यह तय करना होता है कि उसे भारत में आईटीआर भरना जरूरी है या नहीं।

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6 के अनुसार, जो व्यक्ति भारत का कर निवासी (Resident) नहीं माना जाता, उसे एनआरआई माना जाता है। सामान्य तौर पर यदि कोई व्यक्ति किसी वित्त वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक भारत में रहता है, या उस वर्ष 60 दिन तथा उससे पहले के चार वर्षों में कुल 365 दिन या उससे अधिक भारत में रहा है, तो वह भारत का निवासी माना जा सकता है। हालांकि भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के कुछ लोगों (PIO) के लिए कुछ विशेष नियम भी लागू होते हैं। यदि ऐसे व्यक्ति की भारत में विदेशी आय को छोड़कर कुल आय 15 लाख रुपये से अधिक है, तो कुछ मामलों में 182 दिनों की जगह 120 दिनों का नियम लागू हो सकता है।

📋 एनआरआई के लिए ITR से जुड़े मुख्य नियम

  • आधार: रेजिडेंशियल स्टेटस और आय का प्रकार
  • प्रमुख कानून: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 6
  • 182 दिन नियम: सामान्य रेजिडेंसी निर्धारण
  • 120 दिन नियम: कुछ मामलों में विशेष प्रावधान
  • आय सीमा: भारत में विदेशी आय छोड़कर 15 लाख रुपये से अधिक होने पर विशेष नियम लागू
  • उद्देश्य: सही कर स्थिति का निर्धारण

किन परिस्थितियों में ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है

यदि किसी एनआरआई की भारत में कर योग्य आय मूल कर छूट सीमा से अधिक है, तो उसे आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। नई कर व्यवस्था में यह सीमा 4 लाख रुपये है, जबकि पुरानी कर व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये है।

भारत में की गई नौकरी से मिलने वाला वेतन, भारत में स्थित मकान से मिलने वाला किराया, भारतीय शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति बेचने पर होने वाला पूंजीगत लाभ, एनआरओ खाते पर मिलने वाला ब्याज, भारतीय निवेश से मिलने वाला लाभांश तथा भारत में किए गए व्यवसाय या पेशे से होने वाली आय पर भी आयकर नियम लागू हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में एनआरआई को आईटीआर दाखिल करना पड़ सकता है।

रिफंड, TDS और DTAA से जुड़े प्रावधान

अगर किसी एनआरआई की आय पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) वास्तविक कर देनदारी से अधिक हो गई है, तो अतिरिक्त टैक्स वापस पाने के लिए भी आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी होता है। इसके अलावा यदि किसी वित्त वर्ष में पूंजीगत या व्यावसायिक नुकसान हुआ है और उसे भविष्य के वर्षों में समायोजित करना है, तब भी आईटीआर भरना आवश्यक है।

💰 ITR दाखिल करने के प्रमुख लाभ

  • TDS रिफंड: अतिरिक्त टैक्स वापस पाने का अवसर
  • नुकसान समायोजन: भविष्य के वर्षों में लाभ
  • DTAA लाभ: दोहरे कराधान से राहत या टैक्स क्रेडिट
  • कर अनुपालन: आयकर नियमों का पालन
  • सही रिकॉर्ड: आय और टैक्स का दस्तावेजी प्रमाण
  • सलाह: ITR दाखिल करने से पहले टैक्स विशेषज्ञ से परामर्श

टैक्स विशेषज्ञ की सलाह क्यों जरूरी है

जो एनआरआई एक ही आय पर भारत और किसी दूसरे देश दोनों जगह टैक्स देते हैं, वे डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत राहत या टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए भी आयकर रिटर्न दाखिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है。

कर नियम व्यक्ति की आय, निवास की स्थिति और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए आईटीआर दाखिल करने से पहले योग्य टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। व्यक्तिगत कर संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य टैक्स विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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